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अमेरिकी हथियार उत्पादन में 4 गुना वृद्धि: हथियार उत्पादन को लेकर ट्रंप का बड़ा ऐलान

डोनाल्ड ट्रम्प, डोनाल्ड ट्रम्प हथियार उत्पादन, अमेरिकी हथियार उत्पादन में वृद्धि- इंडिया टीवी हिंदी
छवि स्रोत: एपी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.
 
अमेरिकी हथियार उत्पादन (US Weapons Production) को लेकर वाशिंगटन से एक बेहद अहम और भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से खौफनाक खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को देश की शीर्ष रक्षा विनिर्माण कंपनियों के प्रमुखों (CEOs) के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में एक बड़ा महाविनाशकारी फैसला लिया गया है—कंपनियां ‘एक्सक्विजिट क्लास’ (Exquisite Class – अति-आधुनिक और सटीक मारक क्षमता वाले) हथियारों के उत्पादन को 4 गुना तक बढ़ाने पर सहमत हो गई हैं।ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस रणनीतिक कदम की पुष्टि की। उन्होंने लिखा, “अमेरिका की सबसे बड़ी रक्षा विनिर्माण कंपनियों के साथ हमारी बहुत अच्छी बैठक हुई। हमने उत्पादन और उसकी समय-सारणी पर गहन चर्चा की। उन्होंने ‘एक्सक्विज़िट क्लास’ हथियारों का उत्पादन 4 गुना बढ़ाने पर सहमति जताई है, ताकि हम जल्द से जल्द और अधिक उन्नत हथियार बना सकें।”

अमेरिकी हथियार उत्पादन: रक्षा दिग्गजों के साथ ट्रंप की बड़ी डील

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर हथियारों की मांग और आपूर्ति में असंतुलन देखा जा रहा है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी हथियार उत्पादन में यह बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है, बल्कि बैठक से तीन महीने पहले ही इस पर काम शुरू हो गया था। वर्तमान में कई नए हथियार संयंत्र (Weapons Plants) पहले से ही उत्पादन कर रहे हैं।

राष्ट्रपति ने कहा, “हमारे पास मध्यम और उच्च-मध्यम श्रेणी के हथियारों की भारी आपूर्ति है। इनका उपयोग हम ईरान में कर रहे हैं और हाल ही में वेनेजुएला में भी इसका प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया है।” इस उच्च स्तरीय बैठक में बीएई सिस्टम्स (BAE Systems), बोइंग (Boeing), हनीवेल एयरोस्पेस, एल3हैरिस मिसाइल सॉल्यूशंस, लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन और रेथियॉन ग्रुप जैसे रक्षा क्षेत्र के दिग्गजों के सीईओ शामिल थे। दो महीने बाद स्थिति की समीक्षा के लिए पुनः बैठक आयोजित की जाएगी।

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अमेरिकी हथियार उत्पादन का सीधा असर: ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की आक्रामकता

अमेरिकी हथियार उत्पादन में इस अभूतपूर्व वृद्धि का सीधा संबंध पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव से है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि अमेरिका ईरान में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) चला रहा है। इस ऑपरेशन के लक्ष्यों को अगले 4 से 6 सप्ताह में हासिल करने की योजना है। लेविट ने आश्वस्त किया कि अमेरिका के पास इन लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद का भंडार मौजूद है।

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हालांकि, इस युद्ध की भारी कीमत भी चुकानी पड़ रही है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने शुक्रवार को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में मारे गए 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “हमारा देश 6 असाधारण अमेरिकी नायकों की मौत पर शोक मना रहा है… इनकी मौत व्यर्थ नहीं जाएगी।” हेगसेथ ने इन मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों को पूरी तरह नष्ट करने की कसम खाई है।

अमेरिकी हथियार उत्पादन और इजरायल-ईरान युद्ध: 80% वायु रक्षा प्रणाली नष्ट

हथियारों की इस नई खेप और अमेरिकी हथियार उत्पादन क्षमता का असर युद्ध के मैदान पर स्पष्ट दिख रहा है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी / रोरिंग लायन’ के तहत अमेरिका और इजरायली सेना ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई और मिसाइल हमले किए हैं।

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  • आईडीएफ का दावा: इजरायली सेना (IDF) के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नदव शोशानी ने दावा किया है कि ईरान के 60% मिसाइल लॉन्चर और बड़े मिसाइल भंडार नष्ट कर दिए गए हैं।
  • हवाई नियंत्रण: शोशानी के अनुसार, “ईरान की लगभग 80 प्रतिशत वायु रक्षा प्रणालियां नष्ट हो गई हैं, जिससे अब ईरान के आसमान पर हमारा नियंत्रण है।”
  • तनाव का मूल कारण: 28 फरवरी (2026) को अमेरिका और इजराइल के संयुक्त सैन्य हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और अन्य वरिष्ठ नेताओं की हत्या के बाद से पश्चिम एशिया बारूद के ढेर पर बैठा है।

कुल मिलाकर, वाशिंगटन का यह नया रुख स्पष्ट करता है कि अमेरिका भविष्य के किसी भी सैन्य टकराव के लिए अपनी ‘हार्ड पावर’ को चरम पर ले जाने की तैयारी कर चुका है।

 

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