धर्म

मोहिनी एकादशी 2026: मोहिनी एकादशी का व्रत करने से सांसारिक मोह-माया से मुक्ति मिलती है।

आज मोहिनी एकादशी व्रत है, मोहिनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इस दिन श्रीहरि की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और मानसिक शांति मिलती है, तो आइए आपको मोहिनी एकादशी व्रत के महत्व और पूजा विधि के बारे में बताते हैं।

जानिए मोहिनी एकादशी के बारे में

मोहिनी एकादशी हिंदू धर्म में सबसे खास दिन है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। इसके अलावा कई महिलाएं विधिपूर्वक भी व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्रत आपके स्वभाव को शांत करता है और आपको सांसारिक मोह-माया से मुक्त कराता है।

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वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की यह एकादशी भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ी है, जो समुद्र मंथन की पौराणिक कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पंडितों के मुताबिक, इस दिन अगर विधि-विधान से पूजा की जाए तो पापों का नाश होता है और जीवन की परेशानियां दूर हो जाती हैं। साथ ही आर्थिक परेशानियां, कर्ज और धन संबंधी परेशानियों से राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति की किस्मत बदल जाती है और सुख-समृद्धि आती है।

मोहिनी एकादशी व्रत का शुभ समय

पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 फरवरी को शाम 6 बजकर 06 मिनट पर शुरू होगी. एकादशी तिथि 27 मार्च को शाम 6 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी. उदयातिथि के अनुसार मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल 2026 को रखा जाएगा। मोहिनी एकादशी की पूजा के लिए ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4.43 बजे से सुबह 5.28 बजे तक रहेगा। जबकि अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12.11 बजे से 1.02 बजे तक रहेगा।

मोहिनी एकादशी व्रत खोलने का समय

दूसरे दिन 28 अप्रैल 2026 को मोहिनी एकादशी मनाई जाएगी। एकादशी पारण का शुभ समय सुबह 6.12 बजे से 8.46 बजे तक रहेगा। पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्ति का समय शाम 6 बजकर 51 मिनट तक रहेगा. आपको बता दें कि एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि के भीतर करना जरूरी होता है।

जानिए मोहिनी एकादशी व्रत के महत्व के बारे में

हिंदू धर्म में मोहिनी एकादशी को बहुत ही पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह वैशाख माह के शुक्ल पक्ष में आता है और भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ा है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं, मन शुद्ध होता है और आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। मोहिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ-साथ माता लक्ष्मी की भी पूजा करें। ऐसा करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है और कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। मोहिनी एकादशी के दिन व्रत रखने से व्यक्ति को मोह-माया के सभी बंधनों से मुक्ति मिल जाती है और वह जीवन में एक के बाद एक प्रगति करता जाता है।

मोहिनी एकादशी व्रत से जुड़ी पौराणिक कथा भी रोचक है

पौराणिक कथा के अनुसार भद्रावती नगरी में धनपाल नाम का एक धर्मात्मा वैश्य रहता था। उनका सबसे छोटा पुत्र धृष्टबुद्धि अत्यंत शरारती और बुरे कामों में लिप्त था, जिसके कारण उनके पिता ने उन्हें घर से निकाल दिया। घूमते-घूमते वह ऋषि कौंडिन्य के आश्रम में पहुंचा और अपने पापों का प्रायश्चित करने का उपाय पूछा। ऋषि ने उसे वैशाख शुक्ल पक्ष की ‘मोहिनी एकादशी’ का व्रत करने की सलाह दी। धृष्टबुद्धि ने इस व्रत को पूरी श्रद्धा से किया, जिससे उसके सभी पाप नष्ट हो गए और अंततः उसे विष्णु लोक में स्थान प्राप्त हुआ। इस दिन भगवान विष्णु ने समुद्र मंथन के दौरान राक्षसों से अमृत बचाने के लिए मोहिनी रूप धारण किया था, इसलिए भी इसका विशेष महत्व है।

मोहिनी एकादशी व्रत के दौरान तुलसी मंजरी से करें ये उपाय, लाभ होगा।

पंडितों के अनुसार मोहिनी एकादशी की सुबह स्नान करने के बाद तुलसी के सूखे पत्ते लें। इसे लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या उस स्थान पर रखें जहां आप पैसे रखते हैं। ऐसा करते समय देवी लक्ष्मी का ध्यान करें, इससे रुका हुआ पैसा वापस मिलने और आर्थिक स्थिरता बढ़ने में मदद मिलती है।

कर्ज से मुक्ति के लिए मोहिनी एकादशी पर विष्णु अभिषेक करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अगर आप कर्ज या आर्थिक दबाव से परेशान हैं तो शाम के समय दूध में तुलसी मंजरी मिलाकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें। इस उपाय से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आय के नए रास्ते खुलने की संभावना बनती है।

घर से नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने के लिए करें ये उपाय

शास्त्रों के अनुसार तांबे के लोटे में गंगाजल लें और उसमें तुलसी मंजरी डालें। कुछ देर बाद इस जल को पूरे घर में छिड़कें। इससे वातावरण शुद्ध होता है और घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

मोहिनी एकादशी पर इन बातों का रखें विशेष ध्यान

पंडितों के अनुसार इस दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए और न ही पौधे को जल देना चाहिए। चावल और तामसिक भोजन से परहेज करें। साथ ही झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचारों से भी दूर रहना जरूरी है।

जानिए मोहिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

मोहिनी एकादशी का महत्व स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। शास्त्रों के अनुसार इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति को कई यज्ञों के समान पुण्य फल मिलता है। जीवन के दुख और कष्ट दूर हो जाते हैं। मन की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं। पापों से मुक्ति मिलती है। परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आती है। मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है।
धार्मिक मान्यता यह भी है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से एक हजार गाय दान करने के बराबर पुण्य फल मिलता है।
 

मोहिनी एकादशी पर ऐसे करें पूजा

पंडितों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की पूजा पूरी श्रद्धा और पवित्रता से करनी चाहिए। सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें। स्नान करें और साफ पीले या हल्के रंग के कपड़े पहनें।
व्रत का संकल्प लें और एक लकड़ी के पाट पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं। उस पर भगवान विष्णु या श्री हरि नारायण की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें और पंचामृत से उसका अभिषेक करें। धूप, दीप और कपूर जलाएं और भगवान को तुलसी के पत्ते चढ़ाएं। पीले फूल, फल और मिठाइयाँ चढ़ाएँ और ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जाप करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें। पूजा के बाद भगवान को प्रणाम करें और परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली के लिए प्रार्थना करें।
 

मोहिनी एकादशी पर दान का विशेष महत्व है

सनातन धर्म में दान को धर्म का सर्वोत्तम अंग माना गया है। विशेषकर एकादशी के दिन किया गया दान कई गुना अधिक फलदायी माना जाता है। शास्त्रों में कहा गया है कि दान न केवल पापों का नाश करता है बल्कि व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और दैवीय कृपा का संचार भी करता है।
-प्रज्ञा पांडे

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