पंजाब

चंडीगढ़ दूषित जल संकट: गंदे पानी ने मचाया हड़कंप, लोकसभा में सरकार का बड़ा खुलासा

चंडीगढ़ दूषित जल संकट इन दिनों शहर के निवासियों, विशेषकर पुनर्वास कॉलोनियों में रहने वाले लोगों के लिए एक गंभीर परेशानी का सबब बन गया है। हाल ही में लोकसभा में एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में केंद्र सरकार ने इस बात को आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया है कि शहर के कुछ हिस्सों से पीने के पानी में गंदगी और प्रदूषण की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। हालांकि, सरकार ने इसके पीछे पुराने बुनियादी ढांचे और चल रहे मरम्मत कार्यों को मुख्य कारण बताया है।

चंडीगढ़ दूषित जल संकट: मौली जागरण और हल्लो माजरा सबसे ज्यादा प्रभावित

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए स्पष्ट किया कि मौली जागरण, दरिया और हल्लो माजरा जैसे क्षेत्रों में जल आपूर्ति को लेकर शिकायतें दर्ज की गई हैं। मंत्री ने बताया कि यह चंडीगढ़ दूषित जल संकट मुख्य रूप से वितरण प्रणाली के भीतर परिचालन समस्याओं और पुरानी लाइनों पर हो रहे मरम्मत कार्यों का नतीजा है।

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इसके अतिरिक्त, मंत्रालय ने यह भी खुलासा किया कि पानी की आपूर्ति न होने वाले घंटों (Non-supply hours) के दौरान कई निवासी सीधे मुख्य लाइन से निजी पंप जोड़ लेते हैं। इस कारण पाइप के जोड़ों पर दबाव पड़ता है और कीचड़ आपूर्ति लाइनों में प्रवेश कर जाता है, जिससे पानी गंदा हो जाता है।

चंडीगढ़ दूषित जल संकट और पानी की गुणवत्ता का परीक्षण

जल गुणवत्ता की चिंताओं को दूर करने के लिए, मंत्रालय ने जानकारी दी कि पिछले तीन महीनों में शहर भर से पानी के 1,995 नमूने एकत्र किए गए। इन सभी नमूनों का परीक्षण NABL (राष्ट्रीय परीक्षण और अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड) द्वारा मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षण के परिणाम संतोषजनक पाए गए हैं और प्रशासन पीने योग्य पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से फ्लशिंग और क्लोरीनीकरण कर रहा है।

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चंडीगढ़ दूषित जल संकट के समाधान के लिए ‘अमृत 2.0’ के तहत उठाए गए कदम

इस चंडीगढ़ दूषित जल संकट के दीर्घकालिक समाधान के लिए केंद्र सरकार ने अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन 2.0 (AMRUT 2.0) के तहत 166.39 करोड़ रुपये की सात नई परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनमें 43.77 करोड़ रुपये की दो जल आपूर्ति परियोजनाएं और 122.62 करोड़ रुपये की पांच सीवर और सेप्टेज प्रबंधन परियोजनाएं शामिल हैं। इसके तहत शहर में 10.5 किलोमीटर नया जल आपूर्ति नेटवर्क और लगभग 240 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बिछाया जा रहा है।

सांसद मनीष तिवारी का पलटवार: सीवेज लाइनों के तत्काल ऑडिट की मांग

हालांकि सरकार के इस जवाब से चंडीगढ़ के सांसद मनीष तिवारी संतुष्ट नहीं दिखे। उन्होंने सरकार पर जमीनी हकीकत को छुपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुनर्वास कॉलोनियों में स्थिति बेहद गंभीर है। तिवारी ने कहा, “सरकार सच्चाई छिपा रही है। वास्तविकता यह है कि अधिकांश पुनर्वास कॉलोनियों में पीने के पानी और सीवेज की लाइनें जर्जर हो चुकी हैं। चूंकि वे एक-दूसरे के बेहद करीब हैं, इसलिए सीवेज का पानी पीने के पानी में मिल रहा है, जो बीमारियों का बड़ा कारण बन सकता है।”

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सांसद ने भविष्य में किसी भी बड़ी स्वास्थ्य आपदा से बचने के लिए सभी राहत और पुनर्वास कॉलोनियों में पीने के पानी और सीवेज लाइनों के तत्काल ऑडिट की सख्त मांग की है, ताकि लीकेज का पता लगाकर उसे तुरंत ठीक किया जा सके। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि पाइपलाइनों का रखरखाव अंततः शहरी स्थानीय निकायों (ULB) की जिम्मेदारी है, जबकि सरकार केवल वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क | स्थान: चंडीगढ़
प्रकाशित: 13 मार्च 2026

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