उत्तर प्रदेश

लखनऊ में एलपीजी की कमी: कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन का सख्त एक्शन!

लखनऊ में एक गैस एजेंसी के बाहर लोग। (दीपक गुप्ता/एचटी)
लखनऊ में एक गैस एजेंसी के बाहर लोग। (दीपक गुप्ता/एचटी)

लखनऊ में एलपीजी की कमी, कम वजन वाले सिलेंडरों की आपूर्ति और कालाबाजारी की बढ़ती शिकायतों ने आम जनता की परेशानी बढ़ा दी है। इस संकट को देखते हुए, लखनऊ जिला प्रशासन अब पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। गैस एजेंसियों में चल रही कथित हेराफेरी पर नकेल कसने और आपूर्ति की अनियमितताओं को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर औचक निरीक्षण शुरू कर दिए गए हैं।

लखनऊ में एलपीजी की कमी और एजेंसियों की निगरानी

स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए जिला प्रशासन की तीन विशेष टीमों का गठन किया गया है। इसके अलावा, प्रमुख तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HP)—की तीन अन्य टीमें भी पूरे जिले में एलपीजी एजेंसियों के स्टॉक का सघन सर्वेक्षण कर रही हैं। वरिष्ठ अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि इस कवायद का मुख्य उद्देश्य पर्याप्त गैस आपूर्ति सुनिश्चित करना और सिलेंडरों की किसी भी प्रकार की कालाबाजारी पर सख्त रोक लगाना है।

इसी क्रम में, लखनऊ के जिलाधिकारी विशाख जी ने हाल ही में ममता गैस एजेंसी (भारत पेट्रोलियम) का दौरा किया। उन्होंने उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर मिलने की प्रक्रिया, दैनिक आपूर्ति स्तर और वितरण तंत्र का बारीकी से आकलन किया।

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डीएम का ग्राहकों को आश्वासन: घबराने की जरूरत नहीं

एजेंसी प्रबंधकों ने जिलाधिकारी को जानकारी दी कि वर्तमान में उन्हें प्रतिदिन लगभग 700 से 800 एलपीजी बुकिंग प्राप्त हो रही हैं, जिन्हें तय शेड्यूल के तहत डिलीवर किया जा रहा है। डीएम ने डिलीवरी बुक की जांच करने के साथ-साथ वहां मौजूद ग्राहकों से भी सीधा संवाद किया। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति श्रृंखला सुचारू रूप से चल रही है और मौजूदा मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है, इसलिए पैनिक बाइंग (घबराकर खरीदारी) करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (नागरिक आपूर्ति) ज्योति गौतम ने भी चेतावनी दी है कि “एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

लखनऊ में एलपीजी की कमी का छोटे कारोबारियों पर प्रभाव

घरेलू के साथ-साथ वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कमी ने शहर के छोटे रेस्तरां और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। शहर के प्रसिद्ध ‘चटोरी गली’ फूड हब में ईंधन की कमी के चलते लगभग 50% स्टॉल अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। जो विक्रेता काम कर रहे हैं, उन्होंने गैस बचाने के लिए अपने मेनू आइटम कम कर दिए हैं।

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‘गैस कटिंग’ और डिलीवरी में देरी की शिकायतें

शहर के कई निवासियों ने डिलीवरी में देरी को लेकर रोष व्यक्त किया है। डालीगंज के निवासियों का कहना है कि बुकिंग के कई दिनों बाद भी उन्हें सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। इसके अलावा, संकट के बीच “गैस कटिंग” रैकेट के सक्रिय होने के गंभीर आरोप भी लगे हैं। उपभोक्ताओं का दावा है कि डिलीवरी बॉय घरों तक पहुंचने से पहले ही विशेष उपकरणों के माध्यम से सिलेंडरों से 2-3 किलो गैस निकालकर खाली सिलेंडरों में भर लेते हैं और उसे बाजार में महंगे दामों पर बेचते हैं।

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आपूर्ति में हो रहा है सुधार

लगातार शिकायतों के बीच, ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (यूपी चैप्टर) के अध्यक्ष जगदीश राज ने दावा किया है कि पिछले सप्ताह की तुलना में अब हालात बेहतर हैं। तेल कंपनियों ने कमी को दूर करने के लिए जिले में लगभग 41,000 घरेलू सिलेंडरों की अतिरिक्त आपूर्ति की है, और पेंडिंग बुकिंग्स को तेज़ी से क्लियर किया जा रहा है।

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