पंजाब

गगनदीप रंधावा सुसाइड केस: चौंकाने वाला पंजाब कांग्रेस विवाद, CBI जांच पर उठे गंभीर सवाल

गगनदीप रंधावा सुसाइड केस (Gagandeep Randhawa Suicide Case) ने पंजाब की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। पंजाब वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक गगनदीप रंधावा की आत्महत्या के मामले में संभावित सीबीआई (CBI) जांच को लेकर उठे विवाद ने एक बार फिर पंजाब कांग्रेस के भीतर की गुटबाजी और वैचारिक उलझन को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। एकजुट राजनीतिक लाइन पेश करने में कांग्रेस का यह निरंतर संघर्ष अब सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए एक बड़ा राजनीतिक फायदा साबित हो रहा है।

गगनदीप रंधावा सुसाइड केस: कैसे कांग्रेस ने AAP को बैकफुट पर धकेला था?

20 मार्च को हुई इस दुखद आत्महत्या के तुरंत बाद, कांग्रेस ने इस मुद्दे को आक्रामकता से उठाया था। शुरुआती दौर में, गगनदीप रंधावा सुसाइड केस ने सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) को पूरी तरह से रक्षात्मक मुद्रा (Defensive mode) में ला दिया था। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के साथ मिलकर सरकार पर इतना भारी दबाव बनाया कि अंततः पंजाब सरकार को कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर के खिलाफ नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज करनी पड़ी।

यह कांग्रेस के लिए एक बड़ी राजनीतिक जीत थी, लेकिन यह जीत ज्यादा समय तक कायम नहीं रह सकी।

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गगनदीप रंधावा सुसाइड केस में सांसदों और प्रदेश अध्यक्ष के बीच तीखा विरोधाभास

मामले ने तब एक नया मोड़ ले लिया जब कांग्रेस सांसदों ने राष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ाना शुरू किया। पार्टी के चार प्रमुख सांसदों ने सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर गगनदीप रंधावा सुसाइड केस की पारदर्शी सीबीआई जांच की मांग की। इतना ही नहीं, सांसद गुरजीत सिंह औजला ने लोकसभा के पटल पर बोलते हुए एनआईए (NIA) जांच की वकालत की, जिस पर गृह मंत्री ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन भी दिया।

यह छवि एआई द्वारा बनाई गई है।

लेकिन चंडीगढ़ में विपक्ष के संयुक्त विरोध प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक हवा का रुख बदल गया। भाजपा और अकाली दल ने अपना सीधा हमला कांग्रेस की ओर मोड़ दिया। उन्होंने तीखा सवाल उठाया कि पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वारिंग सक्रिय रूप से सीबीआई जांच की मांग से पीछे क्यों हट रहे हैं?

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इस हमले ने कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया। हालांकि विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा और राजा वारिंग ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया, लेकिन कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं की रहस्यमयी चुप्पी ने इस ‘फूट’ की धारणा को और मजबूत कर दिया।

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गगनदीप रंधावा सुसाइड केस: कांग्रेस की पुरानी वैचारिक दुविधा बनी गले की फांस

इस पूरे घटनाक्रम ने केंद्रीय एजेंसियों को लेकर कांग्रेस की सबसे बड़ी वैचारिक दुविधा को उजागर कर दिया है। गगनदीप रंधावा सुसाइड केस में पार्टी फंसी हुई नजर आ रही है क्योंकि:

  1. राष्ट्रीय स्टैंड: राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी और अन्य शीर्ष कांग्रेस नेता लगातार भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर राजनीतिक बदले के लिए सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) जैसी एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहे हैं।

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  2. पंजाब का इतिहास: पंजाब में कैप्टन अमरिन्दर सिंह के नेतृत्व वाली पूर्व कांग्रेस सरकार ने 2015 के बेअदबी मामलों के कड़वे अनुभवों का हवाला देते हुए, साल 2020 में सीबीआई से जांच की ‘सामान्य सहमति’ (General Consent) वापस ले ली थी।

इस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में, सीबीआई की निष्पक्षता पर राजा वारिंग का सार्वजनिक संदेह भले ही पार्टी की राष्ट्रीय विचारधारा के अनुरूप हो, लेकिन पंजाब की स्थानीय राजनीति में एक स्पष्ट और एकीकृत मांग की अनुपस्थिति ने कांग्रेस के हाथ से एक बड़ा मुद्दा छीन लिया है।

निष्कर्ष:

आज स्थिति यह है कि बाजवा और वारिंग अपने स्टैंड को सही ठहराने के लिए स्पष्टीकरण दे रहे हैं, लेकिन तब तक कांग्रेस अपना राजनीतिक आधार खो चुकी है। गगनदीप रंधावा सुसाइड केस से आप सरकार पर जो दबाव बना था, वह अब खुद कांग्रेस की रणनीतिक विफलताओं पर सवाल खड़े करने में बदल गया है। कांग्रेस ने उस मुद्दे पर अपनी बढ़त गंवा दी है, जहां से उसने शुरुआत में भारी जनसमर्थन और मीडिया का ध्यान आकर्षित किया था।

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