नई दिल्ली

तरणजीत सिंह संधू की ताजपोशी: दिल्ली के नए उपराज्यपाल बने, वीके सक्सेना की चौंकाने वाली विदाई!

तरणजीत सिंह संधू की ताजपोशी: दिल्ली के नए उपराज्यपाल बने, वीके सक्सेना की चौंकाने वाली विदाई!
पूर्व राजनयिक तरनजीत सिंह संधू. (पीटीआई)

तरणजीत सिंह संधू को गुरुवार को भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का नया उपराज्यपाल (LG) नियुक्त किया गया है। वह निवर्तमान एलजी विनय कुमार सक्सेना की जगह लेंगे, जिनका लद्दाख के उपराज्यपाल के रूप में तबादला कर दिया गया है। राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी की गई आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, यह हाई-प्रोफाइल नियुक्ति नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए एक बड़े और ऐतिहासिक प्रशासनिक फेरबदल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

तरणजीत सिंह संधू का शानदार कूटनीतिक सफर: जेएनयू से लेकर वाशिंगटन डीसी तक

तरणजीत सिंह संधू एक बेहद अनुभवी और कद्दावर पूर्व भारतीय राजनयिक हैं। दिल्ली के एलजी का सर्वोच्च पद संभालने से पहले, उन्होंने वैश्विक स्तर पर भारत का मजबूती से प्रतिनिधित्व किया है।

  • अंतरराष्ट्रीय अनुभव: उन्होंने संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) में भारत के राजदूत और श्रीलंका में उच्चायुक्त (जनवरी 2017 से जनवरी 2020 तक) के रूप में अपनी शानदार सेवाएं दी हैं। इसके अतिरिक्त, वह सितंबर 2011 से जुलाई 2013 तक फ्रैंकफर्ट में महावाणिज्य दूत भी रहे।

  • शैक्षिक पृष्ठभूमि: श्री संधू ने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से इतिहास (ऑनर्स) की डिग्री हासिल की है और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relations) में स्नातकोत्तर किया है।

  • राजनीतिक पारी: कूटनीति से सेवानिवृत्त होने के बाद, उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा और 2024 के लोकसभा चुनावों में अमृतसर सीट से पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ा था।

यह भी पढ़ें: राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी किए गए अन्य राज्यों के राज्यपालों के फेरबदल की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति यहाँ देखें

वीके सक्सेना का दिल्ली में उथल-पुथल भरा कार्यकाल और तरणजीत सिंह संधू के लिए राह

वीके सक्सेना (विनय कुमार सक्सेना), जिनके पास कॉर्पोरेट और सामाजिक क्षेत्रों का तीन दशकों से अधिक का अनुभव था, ने अक्टूबर 2015 से खादी और ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के अध्यक्ष के रूप में कार्य करने के बाद एलजी का पद संभाला था। हालांकि, दिल्ली में उनका कार्यकाल तत्कालीन आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के साथ तीखे टकरावों के लिए जाना जाएगा।

सक्सेना अक्सर दिल्ली सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते थे और कई महत्वपूर्ण फाइलों को मंजूरी देने से इनकार कर देते थे। इसके जवाब में, तत्कालीन AAP सरकार ने उनके खिलाफ 10 से अधिक मामले दर्ज किए थे।

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सत्ता संघर्ष, अदालत की फटकार और तरणजीत सिंह संधू की नई भूमिका

एलजी और पूर्व सीएम के बीच यह सत्ता संघर्ष इतनी चरम सीमा तक पहुंच गया था कि अदालत को हस्तक्षेप करते हुए टिप्पणी करनी पड़ी कि दोनों पक्षों को न्यायिक समय बर्बाद करना बंद करना चाहिए। यह टकराव तब अपने ऐतिहासिक मोड़ पर आ गया जब संसद ने ‘राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (संशोधन) विधेयक, 2023’ पारित किया, जिसने नौकरशाही की पोस्टिंग और स्थानांतरण के अधिकार स्पष्ट रूप से एलजी को सौंप दिए।

मौजूदा दिल्ली सरकार के साथ समीकरण

फरवरी 2025 के विधानसभा चुनावों में दिल्ली में सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा ने जीत दर्ज कर रेखा गुप्ता के नेतृत्व में नई सरकार बनाई। तत्कालीन AAP सरकार द्वारा सक्सेना के खिलाफ दर्ज किए गए कई मामले इस नई सरकार के गठन के बाद वापस ले लिए गए थे।

पूर्ववर्ती सरकार के विपरीत, वीके सक्सेना के मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ संबंध बेहद सौहार्दपूर्ण रहे। हाल ही में सीएम रेखा गुप्ता ने सक्सेना और उनके परिवार के साथ होली समारोह की तस्वीरें भी साझा की थीं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि तरणजीत सिंह संधू अपने विशाल कूटनीतिक अनुभव के साथ दिल्ली के विकास और प्रशासनिक ढांचे को किस नई दिशा में ले जाते हैं।

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