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टेलीग्राम के संस्थापक पावेल ड्यूरोव के खिलाफ रूस में आपराधिक जांच शुरू: निजता और सरकारी नियंत्रण के बीच गहराता विवाद

टेलीग्राम प्रतिबंधों के बीच, रूस ने संस्थापक पावेल डुरोव पर आपराधिक जांच शुरू कर दी है

नई दिल्ली: लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप ‘टेलीग्राम’ (Telegram) के संस्थापक और सीईओ पावेल ड्यूरोव की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब उनके अपने ही मूल देश रूस ने उनके खिलाफ कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। मंगलवार को पावेल ड्यूरोव ने स्वयं खुलासा किया कि रूसी सरकार ने उन पर “आतंकवाद को सहायता” देने का गंभीर आरोप लगाते हुए आपराधिक जांच शुरू कर दी है।

रूस में जन्मे और वहीं से अपने तकनीकी करियर की शुरुआत करने वाले ड्यूरोव ने मॉस्को के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे टेलीग्राम तक आम रूसियों की पहुंच को रोकने का एक बहाना करार दिया है और सरकार पर “निजता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को कुचलने” का आरोप लगाया है।

“अपने ही लोगों से डरने वाले राज्य का दुखद तमाशा”

ड्यूरोव ने सोशल मीडिया पर रूसी सरकार के इस कदम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा, “यह अपने ही लोगों से डरने वाले राज्य का एक दुखद तमाशा है।” इस बयान से पहले, रूसी मीडिया में अपुष्ट खबरें सामने आई थीं कि रूस की संघीय सुरक्षा सेवा (FSB) ने ड्यूरोव के खिलाफ आधिकारिक तौर पर एक आपराधिक मामला दर्ज किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मात्र दो सप्ताह पहले ही रूस की संचार निगरानी संस्था ‘रोसकोम्नाडज़ोर’ (Roskomnadzor) ने टेलीग्राम को प्रतिबंधित करने की चेतावनी दी थी। संस्था ने कंपनी पर रूसी कानूनों का पालन करने से इनकार करने का आरोप लगाया था।

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टेलीग्राम प्रतिबंध पर सैन्य और सार्वजनिक आक्रोश

रूस में टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने की सुगबुगाहट ने एक दुर्लभ सार्वजनिक आक्रोश को जन्म दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इस कदम की आलोचना क्रेमलिन (रूसी सरकार) के समर्थक सैन्य ब्लॉगर्स भी कर रहे हैं।

  • सेना के लिए संचार का मुख्य साधन: सैन्य विशेषज्ञों और ब्लॉगर्स ने चेतावनी दी है कि यूक्रेन के मोर्चे पर लड़ रहे रूसी सैनिकों द्वारा संचार के लिए टेलीग्राम का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। सेवा को प्रतिबंधित करने से सैन्य संचार व्यवस्था बुरी तरह चरमरा सकती है।

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  • सरकार का तर्क: इसके विपरीत, रूसी अधिकारियों का दावा है कि टेलीग्राम सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। डिजिटल विकास मंत्री मकसूद शादायेव ने इंटरफैक्स समाचार एजेंसी को बताया कि विदेशी खुफिया एजेंसियां टेलीग्राम के माध्यम से अग्रिम पंक्ति के रूसी सैनिकों के संदेशों को आसानी से इंटरसेप्ट कर पढ़ सकती हैं।

क्रेमलिन का स्पष्टीकरण: “टेलीग्राम ने नहीं किया सहयोग”

विवाद के तूल पकड़ने पर क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने मंगलवार को सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि FSB ने टेलीग्राम द्वारा किए गए “बड़ी संख्या में उल्लंघनों” के पर्याप्त सबूत जुटाए हैं।

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पेसकोव ने कहा, “टेलीग्राम पर मौजूद कुछ सामग्री संभावित रूप से हमारे देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। कंपनी के अधिकारियों ने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके आधार पर अब उचित कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं।”

पुतिन शासन के तहत इंटरनेट पर व्यापक ‘क्रैकडाउन’

पावेल ड्यूरोव और टेलीग्राम पर हो रही यह कार्रवाई राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस व्यापक अभियान का हिस्सा है, जिसके तहत रूसी इंटरनेट (RuNet) पर सरकारी नियंत्रण कड़ा किया जा रहा है। पिछले कुछ समय में मॉस्को ने निम्नलिखित सख्त कदम उठाए हैं:

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  • कड़े प्रतिबंधात्मक कानूनों को लागू करना।

  • यूट्यूब (YouTube) जैसे बड़े प्लेटफार्मों की स्पीड धीमी करना या उन्हें लक्षित करना।

  • सिग्नल (Signal) और वाइबर (Viber) जैसी सुरक्षित मैसेजिंग सेवाओं को पूरी तरह ब्लॉक करना।

  • व्हाट्सएप (WhatsApp) और टेलीग्राम पर ऑनलाइन कॉलिंग सुविधा को प्रतिबंधित करना।

  • दिसंबर में फेसटाइम (FaceTime) पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था।

    हालांकि कई रूसी उपयोगकर्ता इन प्रतिबंधों से बचने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का सहारा ले रहे हैं, लेकिन सरकार अब वीपीएन सेवाओं को भी नियमित रूप से ब्लॉक कर रही है।

रूस का अपना ‘MAX’ ऐप: निगरानी का नया हथियार?

विदेशी ऐप्स पर नकेल कसने के साथ-साथ, रूस सक्रिय रूप से ‘MAX’ नामक एक स्वदेशी “राष्ट्रीय” मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को बढ़ावा दे रहा है। इसे मैसेजिंग, सरकारी सेवाओं और डिजिटल भुगतान के लिए ‘वन-स्टॉप समाधान’ के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।

हालांकि, डिजिटल सुरक्षा विशेषज्ञों और आलोचकों ने इस ऐप को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं:

  • ऐप की नीतियों में स्पष्ट रूप से लिखा है कि वह अनुरोध पर अधिकारियों के साथ उपयोगकर्ता का पूरा डेटा साझा करेगा।

  • इसमें ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन’ (End-to-End Encryption) जैसी बुनियादी सुरक्षा सुविधा का अभाव है, जिससे यह सरकारी निगरानी के लिए एक आदर्श उपकरण बन जाता है।

ड्यूरोव के लिए दोहरी चुनौती

पावेल ड्यूरोव की कानूनी परेशानियां केवल रूस तक ही सीमित नहीं हैं। वर्ष 2024 में, उन्हें पेरिस (फ्रांस) में भी गिरफ्तार किया गया था। उन पर आरोप था कि उनके प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नशीली दवाओं की तस्करी और बाल यौन शोषण से जुड़ी अवैध सामग्री के प्रसार के लिए किया जा रहा है और वे इसे रोकने में विफल रहे हैं।

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