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पाकिस्तान सऊदी रक्षा समझौता: ईरान युद्ध के भयंकर संकट में फंसा पाकिस्तान, क्या होगा विनाशकारी अंजाम?

पाकिस्तान सऊदी रक्षा समझौता: ईरान युद्ध के भयंकर संकट में फंसा पाकिस्तान, क्या होगा विनाशकारी अंजाम?

पाकिस्तान सऊदी रक्षा समझौता (Strategic Mutual Defense Agreement – SMDA) जब पिछले साल सितंबर में हस्ताक्षरित हुआ था, तब इस्लामाबाद के सैन्य-प्रभुत्व वाले शासन ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह कदम उनके गले की हड्डी बन जाएगा। पाकिस्तानी जनरलों और राजनेताओं ने अपनी अवाम को यह कहकर गुमराह किया था कि इस सौदे के बदले सउदी अरब उन पर पेट्रो-डॉलर की बारिश करेगा। इसके बदले में पाकिस्तान मध्य पूर्व में सऊदी अरब की सुरक्षा की गारंटी लेगा। शुरुआत में इस सौदे को इज़राइल के खिलाफ एक ढाल के रूप में प्रचारित किया गया था, लेकिन भू-राजनीति के खेल ने अब पाकिस्तान को एक भयंकर कूटनीतिक और सैन्य जाल में फंसा दिया है।

पाकिस्तान सऊदी रक्षा समझौता: ईरान के खिलाफ एक अनपेक्षित मोर्चा

पाकिस्तानी रणनीतिकारों की सबसे बड़ी भूल यह थी कि उन्होंने कभी यह कल्पना नहीं की थी कि उनकी ‘किराए की सुरक्षा सेवाओं’ (Mercenary Security Services) का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ किया जाएगा। एक तरफ अमेरिका और इज़राइल का ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ चल रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान का ‘ऑपरेशन फतेह खैबर’। ईरान द्वारा सऊदी अरब के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। ऐसे में पाकिस्तान सऊदी रक्षा समझौता के तहत रियाद अब इस्लामाबाद से अपने वादे निभाने और ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की उम्मीद कर रहा है।

हालाँकि, पाकिस्तान की कूटनीतिक ‘आधी-अधूरी समझ’ ने उसे एक विनाशकारी स्थिति में धकेल दिया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय का दावा था कि उनकी चेतावनियों के कारण ईरान ने सऊदी अरब पर सीधे बड़े हमले करने से परहेज किया है, लेकिन अब ज़मीनी हकीकत बदल चुकी है।

पाकिस्तान के आंतरिक संकट: एक और युद्ध लड़ने की स्थिति नहीं

पाकिस्तान इस समय खुद बारूद के ढेर पर बैठा है। बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वा में पूर्ण विद्रोह भड़का हुआ है। पाकिस्तानी सेना अफ़ग़ानिस्तान के इस्लामी अमीरात के खिलाफ एक अघोषित युद्ध लड़ रही है। इसके अलावा, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या के बाद पाकिस्तान की शिया आबादी में व्यापक नागरिक अशांति फैल गई है। पाकिस्तान सऊदी रक्षा समझौता के तहत किसी बाहरी देश के खिलाफ, वह भी एक मुस्लिम पड़ोसी (ईरान) के खिलाफ युद्ध में कूदना, पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था और टूटे हुए राजनीतिक ढांचे के लिए आत्महत्या के समान होगा।

सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस द्वारा पाकिस्तानी पीएम को अल्टीमेटम दिया गया है। पाकिस्तान के लिए ईरान के खिलाफ दूसरा मोर्चा खोलने का मतलब है अपने ही घर में आग लगाना।

कूटनीतिक ढाल: चीन और रूस के पीछे छिपता पाकिस्तान

ईरान के खिलाफ बहरीन द्वारा पेश किए गए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के हालिया प्रस्ताव का पाकिस्तान ने समर्थन किया। पाकिस्तानी सैन्य प्रचार तंत्र (Propaganda Machine) इसे सही ठहराने के लिए रूस और चीन के पीछे छिप रहा है। उनका तर्क है कि जब मॉस्को और बीजिंग ने इस प्रस्ताव को वीटो नहीं किया, तो पाकिस्तान कैसे ईरान का पक्ष ले सकता है? हालांकि, यह प्रस्ताव ईरान के बढ़ते वैश्विक अलगाव का संकेत है।

शहबाज़ शरीफ पर सऊदी का दबाव और संभावित विनाशकारी अंजाम

क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के तत्काल बुलावे पर प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ रियाद पहुँचे हैं। कूटनीतिक हलकों में चर्चा है कि पाकिस्तान सऊदी रक्षा समझौता को लेकर शहबाज़ को अल्टीमेटम दिया गया है। इसमें जमीनी सैनिकों की तैनाती की मांग भी शामिल हो सकती है। अपुष्ट रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने ईरानी सीमा पर कुछ हलचल भी शुरू कर दी है।

अगर पाकिस्तान सऊदी अरब के आदेशों के आगे झुकता है, तो उसे कुछ वित्तीय राहत (Bailout) तो मिल सकती है, जिससे उसकी दिवालिया अर्थव्यवस्था को जीवनदान मिले। लेकिन ईरान के खिलाफ एक नया सैन्य मोर्चा खोलने के सुरक्षा और राजनीतिक परिणाम उस ‘भाड़े की रकम’ से कहीं अधिक महंगे और विनाशकारी साबित होंगे।

प्रकाशित – 13 मार्च, 2026 | अंतर्राष्ट्रीय और रक्षा डेस्क

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