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Women Health: पीरियड्स का रुकना ही नहीं, महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े ये हैं मेनोपॉज के असली लक्षण

रजोनिवृत्ति किसी भी महिला के जीवन में एक ऐसा चरण होता है जब शरीर में कई बदलाव होते हैं। इस अवधि के दौरान, अंडाशय धीरे-धीरे अंडे छोड़ना बंद कर देते हैं। साथ ही पीरियड्स आना भी बंद हो जाता है। मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर कम होने लगता है। जिसका असर महिलाओं के पूरे शरीर पर पड़ता है। हालांकि कई महिलाएं सोचती हैं कि मेनोपॉज का संबंध सिर्फ प्रजनन क्षमता और पीरियड्स से है, लेकिन ऐसा नहीं है। मेनोपॉज के कारण शरीर के कई कार्य प्रभावित होते हैं। यहां तक ​​कि इसका असर महिलाओं की हड्डियों के स्वास्थ्य और हृदय पर भी पड़ता है।

रजोनिवृत्ति के दौरान अनिद्रा, रात में पसीना आना, योनि में सूखापन और मूड में बदलाव जैसे कई लक्षण दिखाई देते हैं। ये मेनोपॉज के सामान्य लक्षण हैं, जिनके बारे में ज्यादातर महिलाएं जानती हैं। रजोनिवृत्ति से पहले पेरीमेनोपॉज का चरण आता है। जब एस्ट्रोजन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। पेरीमेनोपॉज़ में भी ऐसे कई लक्षण होते हैं। जिससे ज्यादातर महिलाएं अनजान हैं। ऐसे में आज इस लेख के जरिए हम आपको पेरिमेनोपॉज के लक्षणों के बारे में बताएंगे।

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पेरिमेनोपॉज़ के लक्षण

कई महिलाओं को पेरिमेनोपॉज़ के दौरान कानों में खुजली का अनुभव होता है। दरअसल, हार्मोनल उतार-चढ़ाव का असर आपकी त्वचा पर पड़ता है। एस्ट्रोजन के स्तर में गिरावट के कारण कानों में खुजली हो सकती है।

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एस्ट्रोजन के स्तर में कमी से परिसंचरण और तंत्रिकाओं पर भी असर पड़ता है। इसके कारण आपको कानों में सनसनाहट या कोई अन्य तेज आवाज सुनाई दे सकती है।

हार्मोनल असंतुलन के कारण पैनिक अटैक और चिंता हो सकती है। अगर आपको पहले पैनिक अटैक या चिंता जैसी समस्या नहीं हुई है तो इस दौरान आपके साथ ऐसा हो सकता है।

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एस्ट्रोजेन में कमी के कारण आंतरिक कान की कार्यप्रणाली भी प्रभावित होती है। जिसके कारण कुछ महिलाओं को चक्कर आने लगते हैं।

कई महिलाओं को लगता है कि पेरिमेनोपॉज़ के दौरान उनका दिल बहुत तेज़ी से धड़क रहा है। एस्ट्रोजन में उतार-चढ़ाव हमारे हृदय की लय को प्रभावित करता है।

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इस समय हार्मोनल असंतुलन के कारण मूड स्विंग होने लगता है। कई बार छोटी-छोटी बातों पर बहुत गुस्सा और चिड़चिड़ापन महसूस हो सकता है।

एस्ट्रोजन की कमी से सूजन, जकड़न और जोड़ों में दर्द हो सकता है।

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विशेषज्ञों के मुताबिक, पेरिमेनोपॉज के दौरान महिलाओं को अपना खास ख्याल रखना चाहिए। इस दौरान खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दिए गए सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन युक्तियों और सूचनाओं को किसी डॉक्टर या चिकित्सा पेशेवर की सलाह के रूप में न लें। किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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