राजस्थान

गेंदे की खेती के अचूक उपाय: शानदार मुनाफे के लिए कीटों और मुरझाते फूलों से कैसे बचाएं फसल

आखरी अपडेट: 07 मार्च, 2026 | 08:43 IST

गेंदे की खेती (Marigold Farming) किसानों के लिए एक बेहतरीन और नकदी फसल का विकल्प है, लेकिन अक्सर इसमें फूल जल्दी मुरझाने और कीटों के हमले की समस्या किसानों की परेशानी का कारण बन जाती है। राजस्थान के सिरोही जिले के प्रगतिशील किसान मोहनलाल परमार, जो पिछले 5 वर्षों से सफलतापूर्वक फूलों की खेती कर रहे हैं, का मानना है कि यदि कुछ पारंपरिक और वैज्ञानिक देसी तरीकों को अपनाया जाए, तो इन समस्याओं से आसानी से छुटकारा पाया जा सकता है।

नियमित सिंचाई, संतुलित जैविक खाद (जैसे गोबर की खाद और जीवामृत) का उपयोग पौधों की जड़ों को मजबूती प्रदान करता है। इससे न केवल फूल लंबे समय तक ताजे रहते हैं, बल्कि मंडी में उनकी चमक के कारण बेहतर दाम भी मिलते हैं।

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गेंदे की खेती में कीट प्रबंधन: एफिड्स और सफेद मक्खी का खात्मा

हालांकि गेंदा खुद एक प्राकृतिक कीट-विकर्षक (pest-repellent) माना जाता है, फिर भी गेंदे की खेती में कुछ विशिष्ट कीटों, जैसे- एफिड्स (चेपा), सफेद मक्खी (Whiteflies) और मकड़ी के कण (Spider Mites) का खतरा हमेशा बना रहता है। ये कीट पौधों का जीवनरस चूस लेते हैं, जिससे फूलों का आकार छोटा रह जाता है और वे जल्दी मुरझा जाते हैं।

बचाव के उपाय:

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  • नीम का स्प्रे: समय-समय पर नीम के तेल (Neem Oil) का जैविक घोल बनाकर छिड़काव करने से इन रस चूसक कीटों को दूर रखा जा सकता है।
  • पीले चिपचिपे जाल: पत्तियों के नीचे छोटे सफेद कीड़े और चिपचिपा स्राव सफेद मक्खी के लक्षण हैं। इसके नियंत्रण के लिए खेत में ‘येलो स्टिकी ट्रैप’ (पीले चिपचिपे जाल) लगाना बेहद कारगर है। प्रति एकड़ 6 से 8 जाल लगाने से वयस्क कीट इसमें चिपक कर मर जाते हैं।

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गेंदे की खेती में जड़ सड़न (Root Rot) रोग की पहचान और समाधान

यदि आप देख रहे हैं कि पर्याप्त सिंचाई के बाद भी पौधे मुरझा रहे हैं और उनकी जड़ें भूरी व गूदेदार हो गई हैं, तो यह खतरनाक ‘जड़ सड़न’ फफूंदी के लक्षण हैं। गेंदे की खेती में यह रोग मुख्य रूप से जलभराव और खेतों में पानी की खराब निकासी के कारण होता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस रोग से बचाव के लिए खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था होनी चाहिए। यदि रोग फैल चुका है, तो प्रति एकड़ मिट्टी में लगभग 500 ग्राम उचित फफूंदनाशक (Fungicide) का प्रयोग करने से इस फफूंद को नष्ट किया जा सकता है। हमेशा खेती के लिए रोग-प्रतिरोधी उन्नत किस्मों का ही चयन करें।

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गेंदे की खेती: कटाई (तुड़ाई) का सही समय और तरीका

फसल को बीमारियों से बचाने के साथ-साथ उसकी सही समय पर कटाई भी गेंदे की खेती में मुनाफे का अहम हिस्सा है। आमतौर पर बीज बुवाई के 60 से 70 दिन बाद गेंदे के फूल तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं।

फूलों की सर्वोत्तम गुणवत्ता और लंबी शेल्फ-लाइफ के लिए इन्हें हमेशा सुबह के समय (जब ओस सूख जाए लेकिन धूप तेज न हो) तोड़ना चाहिए। नियमित रूप से तैयार फूलों की तुड़ाई करने से पौधे में नई शाखाएं फूटती हैं और उत्पादन चक्र लंबा चलता है।

 

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