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ईरानी युद्धपोत का खौफनाक अंत: अमेरिका ने श्रीलंका पर नाविकों को न लौटाने का बनाया भारी दबाव

प्रकाशित – 07 मार्च, 2026 | प्रातः 07:22 IST

ईरानी युद्धपोत ‘आईआरआईएस देना’ (IRIS Dena) के श्रीलंका के समुद्री क्षेत्र के पास डूबने के बाद एक बड़ा कूटनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक लीक हुए आंतरिक अमेरिकी विदेश विभाग के केबल (राजनयिक संदेश) के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका अब श्रीलंकाई सरकार पर इस बात का भारी दबाव डाल रहा है कि वह इस सप्ताह डूबे ईरानी युद्धपोत के जीवित बचे लोगों को तेहरान वापस न भेजे। इसके साथ ही, श्रीलंका की हिरासत में मौजूद एक अन्य ईरानी जहाज के चालक दल को भी रोकने की मांग की गई है।

बुधवार को, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के दक्षिणी बंदरगाह शहर गॉल (Galle) से लगभग 19 समुद्री मील दूर हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस देना पर टॉरपीडो से हमला कर उसे डुबो दिया था। इस हमले में दर्जनों ईरानी नाविक मारे गए। इस घटना के बाद श्रीलंका ने एक अन्य ईरानी नौसैनिक सहायता पोत ‘आईआरआईएस बुशहर’ (IRIS Bushehr) से 208 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाला, जो श्रीलंका के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में फंसा हुआ था।

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ईरानी युद्धपोत पर हमले के बाद श्रीलंका का मानवीय रुख

श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इस बचाव अभियान को सही ठहराते हुए कहा कि संकट में फंसे चालक दल को सुरक्षित निकालना उनके द्वीप राष्ट्र की “मानवीय जिम्मेदारी” थी। हालांकि, वाशिंगटन का रुख इसके बिल्कुल विपरीत है।

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ईरानी युद्धपोत ‘देना’ पर टॉरपीडो हमला: “शांत मौत”

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ईरानी युद्धपोत डेना पर हुए टॉरपीडो हमले को “शांत मौत” (Silent Death) करार दिया। यह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा किसी दुश्मन के जहाज को डुबोने की पहली ऐसी सीधी सैन्य कार्रवाई है। एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि हमलावर पनडुब्बी ने हमले से पहले कोई चेतावनी नहीं दी थी, क्योंकि डेना भारी हथियारों से लैस था।

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“श्रीलंकाई अधिकारियों को बंदियों को प्रचार के लिए इस्तेमाल करने की ईरानी कोशिशों को विफल करना चाहिए। चालक दल को ईरान वापस लौटाया नहीं जाना चाहिए।” – अमेरिकी दूतावास केबल का अंश

ईरानी युद्धपोत के बचे नाविकों के लिए आगे क्या?

6 मार्च की तारीख वाले इस गोपनीय केबल में कोलंबो में अमेरिकी दूतावास की प्रभारी (Chargé d’Affaires) जेन हॉवेल ने श्रीलंकाई सरकार से स्पष्ट कहा है कि न तो बुशहर के 208 चालक दल और न ही ईरानी युद्धपोत देना के 32 जीवित बचे लोगों को वापस भेजा जाए।

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  • इजरायल की भूमिका: केबल से यह भी पता चलता है कि इजरायली राजदूत ने हॉवेल से पूछा था कि क्या ईरानी नाविकों को “दलबदल” (Defection) के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  • ईरान की मांग: श्रीलंका के उप मंत्री हंस्का विजेमुनि ने बताया कि तेहरान ने मारे गए नाविकों के शवों को वापस लाने के लिए कोलंबो से मदद मांगी है।
  • वर्तमान स्थिति: श्रीलंकाई अधिकारी बुशहर जहाज को खींचकर एक बंदरगाह पर ले जा रहे हैं और इसके अधिकांश चालक दल को कोलंबो के पास एक सुरक्षित नौसैनिक शिविर में रखा गया है।

यह घटनाक्रम दर्शाता है कि ईरानी युद्धपोत के डूबने से ईरान और अमेरिका के बीच का यह संघर्ष अब हिंद महासागर तक फैल गया है, जिससे दक्षिण एशिया की क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

 

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