धर्म

महालक्ष्‍मी व्रत उद्यापन 2026: महालक्ष्‍मी व्रत के समापन पर करें कलश विसर्जन, दोपहर 12:35 बजे तक शुभ मुहुर्त

हिंदू धर्म में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व माना जाता है। महालक्ष्मी व्रत आज यानी 3 अक्टूबर को मनाया जा रहा है. यह व्रत 19 सितंबर से शुरू हुआ था. इस व्रत को करने से मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को रखने का बहुत महत्व है। इस व्रत के अंत में कलश विसर्जन का भी धार्मिक शास्त्रों में विशेष महत्व है।

महालक्ष्मी व्रत के उद्यापन की विधि

– सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें. इसके बाद घर के मंदिर या उत्तर-पूर्व कोने में एक चौकी रखें। चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं और उस पर मां महालक्ष्मी का चित्र या गज लक्ष्मी स्वरूप की मूर्ति रखें।

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– अब चौकी पर चावल की ढेरी बनाएं और उस पर जल से भरा कलश रखें. कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखें. इसके बाद मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करें। यदि आप पहले ही कलश स्थापना कर चुके हैं तो इस प्रक्रिया को दोबारा न दोहराएं।

– व्रत के पहले दिन 16 गांठों वाला पवित्र धागा भी देवी मां के सामने बांध कर रखें. रोली और अक्षत चढ़ाकर पूजा करें। फिर मां लक्ष्मी को लाल वस्त्र, कमल का फूल और 16 श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित करें। – अब खीर, पूड़ी और फलों का भोग लगाएं.

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– उद्यापन के दिन हवन करने की परंपरा है. हवन के दौरान ‘ओम महालक्ष्म्यै नम:’ मंत्र का जाप करते हुए 108 आहुतियां देने की परंपरा है। अंत में खीर और पूड़ी का भोग लगाएं.

– अब 16 घी के दीपक जलाएं और भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की आरती करें. पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल-चूक के लिए देवी मां से क्षमा मांगें।

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– उद्यापन के दिन 16 सुहागिन महिलाओं या 16 कन्याओं को भोजन कराएं. भोजन के बाद उन्हें वस्त्र, श्रृंगार सामग्री, फल और यथाशक्ति दक्षिणा देकर आदरपूर्वक विदा करें।

कलश विसर्जन का शुभ समय

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-सुबह का समय: सुबह 6:15 से 10:45 बजे तक
-अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:48 बजे से 12:35 बजे तक

कैसे करें कलश विसर्जन?

– व्रत के आखिरी दिन सबसे पहले देवी महालक्ष्मी की पूजा करें. जिसके बाद कलश पर हाथ रखकर वरुण देवता और पूजा के लिए आमंत्रित देवी-देवताओं को आदरपूर्वक विदा करें।

– कलश के जल को आम या अन्य पवित्र पत्तों से पूरे घर में छिड़क सकते हैं। बचा हुआ जल तुलसी या किसी पवित्र पौधे में डाल दें।

– कलश पर रखा नारियल परिवार के सदस्यों में प्रसाद के रूप में बांट दें और पूजन सामग्री का विसर्जन कर दें.

16 गांठों वाली डोरी का क्या करें?

– खासकर महालक्ष्मी व्रत में 16 गांठ वाले धागे को विशेष माना जाता है। जब पूजा पूरी हो जाए तो आप इसे फेंकने के बजाय पूजा स्थल या तिजोरी में सुरक्षित रख सकते हैं।

– यदि डोरा बहुत पुराना और टूट गया हो और रखने लायक न रहा हो तो आप उसे आदरपूर्वक किसी पवित्र स्थान पर रख दें या बहते जल में प्रवाहित कर दें।
 

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