धर्म

दिवाली 2026: आस्था, प्रकाश और समृद्धि का महापर्व

भारत की सांस्कृतिक चेतना में दिवाली केवल दिये जलाने का त्यौहार नहीं है, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की विजय का महापर्व है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्यौहार देश-विदेश में उत्साह, भक्ति और उल्लास के साथ मनाया जाता है। घरों में दीपक जलाए जाते हैं, रंगोलियाँ सजाई जाती हैं, मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं और देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश से सुख, समृद्धि, ज्ञान और मंगलमय जीवन के लिए प्रार्थना की जाती है। दिवाली का संदेश सिर्फ घर को रोशन करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मन में ज्ञान, सद्भाव और सकारात्मकता की रोशनी फैलाना भी है।

दिवाली कब और क्यों मनाई जाती है?

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या को मनाई जाती है। यह आमतौर पर अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है। दिवाली पांच दिवसीय त्योहार का मुख्य दिन है, जिसमें धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज जैसे त्योहार शामिल हैं। क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार इनके रीति-रिवाजों में कुछ भिन्नताएं होती हैं।

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दिवाली का सबसे प्रसिद्ध पौराणिक संबंध भगवान श्री राम की अयोध्या वापसी से है। ऐसा माना जाता है कि जब भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण चौदह वर्ष का वनवास पूरा करके और रावण का वध करके अयोध्या लौटे थे, तो नगरवासियों ने उनके स्वागत में दीपक जलाए थे। इस परंपरा को रोशनी के त्योहार के तौर पर देखा जाता है. यह कहानी संदेश देती है कि कठिनाइयों और संघर्षों के बाद सत्य, धर्म और न्याय की जीत होती है।

देवी लक्ष्मी के प्रकट होने की कथा

दिवाली का संबंध समुद्र मंथन से भी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब देवताओं और राक्षसों द्वारा दूध के सागर का मंथन किया गया था, तो देवी लक्ष्मी कई दिव्य रत्नों के साथ प्रकट हुईं। उन्होंने भगवान विष्णु को अपना पति मान लिया। इसी कारण से कार्तिक अमावस्या की रात को देवी लक्ष्मी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।

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एक अन्य प्रचलित मान्यता के अनुसार, दिवाली की रात को साफ, उज्ज्वल और व्यवस्थित घर में देवी लक्ष्मी का स्वागत किया जाता है। इसीलिए लोग घरों की सफाई करते हैं, दीपक जलाते हैं और यहां तक ​​कि अपने कार्यस्थलों पर पूजा भी करते हैं। धार्मिक दृष्टि से लक्ष्मी न केवल धन का प्रतीक हैं, बल्कि ऐश्वर्य, सौभाग्य और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी भी हैं।

दिवाली पूजन विधि

दिवाली के दिन सुबह स्नान करके घर और पूजा स्थल को साफ किया जाता है। शाम के समय शुभ समय के दौरान, देवी लक्ष्मी, भगवान गणेश और अन्य पूजनीय देवताओं की मूर्तियाँ या चित्र स्थापित किए जाते हैं। पूजा में रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीप, फल, मिठाई, नैवेद्य और जल चढ़ाया जाता है। कई परिवारों में बहीखातों, तिजोरियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों की भी पूजा की जाती है।

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भगवान गणेश की पूजा सबसे पहले की जाती है, क्योंकि उन्हें विघ्नहर्ता और शुरुआत का देवता माना जाता है। इसके बाद देवी लक्ष्मी को दीपक, फूल और प्रसाद चढ़ाया जाता है। देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती के बाद घर के मुख्य द्वार, आंगन और पूजा स्थल पर दीपक जलाए जाते हैं। कुछ परिवारों में कुबेर पूजा और सरस्वती पूजा भी की जाती है।

देवी लक्ष्मी की पूजा के मंत्र

दिवाली पूजन के दौरान श्रद्धापूर्वक मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के ये सरल मंत्र प्रचलित हैं-
– मां लक्ष्मी मंत्र: ॐ श्री महालक्ष्म्यै नमः।
– भगवान गणेश मंत्र: ॐ गं गणपतये नमः।
– देवी लक्ष्मी का ध्यान मंत्र: नमस्तेस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते। शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मि नमोस्तुते।

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पूजा के दौरान अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार मंत्रों का जाप किया जा सकता है। इसके बाद देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की आरती की जाती है और परिवार की सुख, शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाती है।

दिवाली से जुड़ी अन्य धार्मिक मान्यताएँ

दिवाली के साथ कई क्षेत्रीय परंपराएं भी जुड़ी हुई हैं। पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य क्षेत्रों में इस दिन मां काली की पूजा की जाती है। जैन धर्म में दिवाली को भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में विशेष महत्व है, जबकि सिख परंपरा में इसे बंदी छोड़ दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस प्रकार दिवाली भारतीय समाज की विविध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को जोड़ने वाला त्यौहार है।

कुछ परिवार दिवाली के अवसर पर व्रत रखते हैं, लेकिन ऐसी कोई सार्वभौमिक व्रत कथा या व्रत अनुष्ठान नहीं है जो इस दिन सभी परंपराओं में अनिवार्य हो। पूजा और व्रत की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार भिन्न हो सकती है।

दिवाली का सामाजिक संदेश

दिवाली हमें सिखाती है कि असली समृद्धि केवल धन में नहीं बल्कि परिवार के प्यार, समाज के सहयोग, ईमानदारी और मन की शांति में भी निहित है। इस अवसर पर जरूरतमंदों की मदद करना, आपसी मतभेद भुलाकर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होना त्योहार की भावना को और अधिक सार्थक बनाता है। दिवाली वह त्योहार है जो हर साल हमें नए संकल्पों और नई आशाओं के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। दीपक की छोटी सी लौ भी गहन अंधकार को चुनौती देती है।

शुभा दुबे

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