धर्म

गुजराती नए साल की शुरुआत बेस्टु वरस पर नए खाते और नमक खरीदने की परंपरा से करते हैं।

देशभर में दिवाली का त्योहार बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है. एक तरफ जहां देश के बाकी हिस्सों में दिवाली का त्योहार और गोवर्धन पूजा की धूम है. इसलिए गुजराती समुदाय में इसे नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। गुजराती नववर्ष दिवाली के अगले दिन यानि कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इसे स्थानीय भाषा में बेस्टु वरास कहा जाता है।

दुनिया भर में गुजराती समुदाय के लोग इसे बड़े उत्साह और धूमधाम से मनाते हैं। इस दिन लोग पुराने गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे को नए साल की शुभकामनाएं देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गुजरातियों का नया साल दिवाली के अगले दिन ही क्यों शुरू होता है। तो आइए जानते हैं इसके पीछे का कारण और पौराणिक कथा…

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जानिए पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यता के अनुसार, गोकुलवासी हर वर्ष राजा इंद्र की पूजा करते थे। लेकिन श्रीकृष्ण के समझाने पर ब्रजवासी इंद्र देव की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने लगे। जो उनके पशुओं को चारा और आजीविका प्रदान करता है। इससे देवराज इंद्र क्रोधित हो गए और उन्होंने ब्रज पर भारी वर्षा शुरू कर दी। वहीं श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाकर संपूर्ण ब्रजवासियों की रक्षा की थी।

सात दिनों तक लगातार बारिश होने के बाद देवराज इंद्र का घमंड टूट गया और बारिश रुक गई। इसलिए ब्रज के लोग कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन गोवर्धन पर्वत की पूजा करते थे और उत्सव मनाते थे। इस खास दिन के बाद से गुजराती समुदाय के लोग इसे नए साल के रूप में मनाने लगे। आइए हम आपको बताते हैं

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सात दिन बाद जब इंद्र देव का अभिमान टूटा और वर्षा रुकी तो कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन लोगों ने गोवर्धन पर्वत की पूजा की और उत्सव मनाया। इस खास दिन के बाद से गुजराती समुदाय के लोग इसे नए साल के रूप में मनाने लगे। गुजराती कैलेंडर यानी विक्रम संवत के अनुसार इसी दिन से नया साल शुरू होता है।

नए कारोबारी साल की शुरुआत

गुजरात को हमेशा से ही व्यापार और उद्योग का गढ़ माना जाता रहा है। बिजनेस क्लास के लोगों के लिए दिवाली पुराने वित्तीय वर्ष का आखिरी दिन होता है, जिसे चोपड़ा पूजा कहा जाता है। इसके बाद वह अपने पुराने खाते बंद कर देता है और अगले दिन बेस्टु वरस से नया कारोबारी साल शुरू हो जाता है। नया खाता शुरू करने से पहले उस पर सौभाग्य के लिए स्वस्तिक लिखा जाता है। ताकि आने वाले साल में कारोबार में खुशहाली आए.

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इस तरह से बेस्टु वरास मनाया जाता है

गुजरात में नया साल बहुत धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर पूजा करते हैं और भगवान को नए कपड़े पहनाकर उनका श्रृंगार करते हैं। इस दिन लोगों के घरों में तरह-तरह की स्वादिष्ट मिठाइयां, गुजराती व्यंजन, ढोकला, मठरी और सुहाली बनाई जाती हैं।

सब्र खरीदने की परंपरा क्या है?

बेस्टु वरस के दिन नमक यानी ‘सबरस’ खरीदने की परंपरा है। गुजरात में नमक को सबरस कहा जाता है, जिसका अर्थ है ‘सभी स्वादों का राजा।’ धार्मिक मान्यता है कि साल के पहले दिन घर में नया नमक लाने से पूरे साल घर में धन-धान्य की कमी नहीं रहती है और मां लक्ष्मी की कृपा भी बनी रहती है। इस दिन नए साल का जश्न मनाने के अलावा गुजराती लोग अपने आपसी मतभेद भी पूरी तरह खत्म कर देते हैं। वे एक-दूसरे को गले लगाते हैं और ‘हैप्पी न्यू ईयर’ कहते हैं और एक नई शुरुआत करते हैं।

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