राजस्थान

सीकर प्याज की खेती का शानदार परिणाम: बंपर पैदावार से मंडियों में मची लूट, जानें ताजा भाव

सीकर प्याज की खेती का शानदार परिणाम: बंपर पैदावार से मंडियों में मची लूट, जानें ताजा भाव

 

स्थान: सीकर, राजस्थान | आखरी अपडेट: 07 मार्च, 2026 | 08:08 IST

प्रतीकात्मक चित्र: मंडियों में प्याज की बंपर आवक

सीकर प्याज की खेती (Sikar Onion Farming) इस बार राजस्थान के किसानों के लिए एक बेहतरीन सौगात लेकर आई है। अनुकूल मौसम और किसानों की कड़ी मेहनत के चलते इस साल सीकर जिले में लाल प्याज का शानदार उत्पादन हुआ है। फसल की खुदाई जोरों पर है और मंडियों में लाल प्याज की बंपर आवक से रौनक लौट आई है। सीकर कृषि उपज मंडी में इन दिनों न केवल स्थानीय सीकर और रसीदपुरा से, बल्कि अलवर और नासिक जैसे अन्य प्रमुख क्षेत्रों से भी प्याज ट्रकों में भरकर पहुंच रहा है।

गर्मी की शुरुआत के साथ ही किसानों ने गुणवत्ता बनाए रखने के लिए सुबह और शाम के ठंडे समय में प्याज की खुदाई तेज कर दी है। सीकर का प्याज पूरे भारत में अपने अनूठे स्वाद के लिए जाना जाता है, यही कारण है कि बाहरी राज्यों के व्यापारी भी बड़ी संख्या में यहां डेरा डाले हुए हैं।

सीकर प्याज की खेती: अनोखी मिठास और स्वाद का क्या है राज?

सीकर प्याज की खेती को जो चीज देश के बाकी हिस्सों से अलग बनाती है, वह है यहां की विशिष्ट जलवायु और मिट्टी। कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ के अनुसार, सीकर की भू-जलवायु परिस्थितियां और उन्नत किस्म के बीजों का उपयोग इस प्याज को विशेष बनाता है। इस प्याज में पानी की मात्रा अधिक होती है और तीखापन कम होता है, जिसके कारण इसमें एक प्राकृतिक मिठास पैदा होती है।

यही वजह है कि सीकर का प्याज सलाद के रूप में देश के बड़े-बड़े पांच सितारा होटलों से लेकर आम घरों की रसोई तक की पहली पसंद है। वर्तमान में सीकर जिले में 50,000 से अधिक किसान प्रत्यक्ष रूप से प्याज की खेती से जुड़े हैं। इस सीजन में जिले में लगभग 20,000 हेक्टेयर में प्याज बोया गया था, जिसमें रसीदपुरा क्षेत्र उत्पादन में सबसे आगे है।

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सीकर प्याज की खेती के बाद मंडी दरें: किसानों की चिंता और राहत

नई फसल की बंपर आवक के कारण फिलहाल सीकर मंडी में दाम स्थिर बने हुए हैं। सीकर प्याज की खेती करने वाले किसानों को अभी थोक बाजार में 5 रुपये से लेकर 8 रुपये प्रति किलो तक का भाव मिल रहा है। आम उपभोक्ताओं के लिए यह एक बड़ी राहत है क्योंकि प्रचुर उपलब्धता के कारण रसोई का बजट बिगड़ने से बच गया है।

हालांकि, किसानों के लिए यह कीमत थोड़ी चिंताजनक है। शुरुआती कीमतें खेती की कुल लागत के मुकाबले कम आंकी जा रही हैं, जिससे किसानों का मुनाफा सीमित हो गया है। बाजार विश्लेषकों और व्यापारियों का अनुमान है कि आने वाले हफ्तों में गर्मी बढ़ने के साथ ही प्याज की मांग (Demand) में उछाल आएगा, जिससे कीमतों में सुधार होने की प्रबल संभावना है।

अन्य राज्यों के व्यापारियों को भी लुभा रही है सीकर प्याज की खेती

सीकर प्याज की खेती की ख्याति इतनी व्यापक है कि हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के थोक व्यापारी सीधे सीकर का रुख कर रहे हैं। इस प्याज की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘लंबी शेल्फ लाइफ’ (भंडारण क्षमता) है। इसे लंबे समय तक बिना खराब हुए स्टोर किया जा सकता है।

  • अगस्त की बुआई: अगस्त के महीने में बोई जाने वाली इस फसल का पूरे देश में बेसब्री से इंतजार रहता है।
  • भविष्य की उम्मीद: भले ही इस बार कुछ इलाकों में बुआई का रकबा मामूली रूप से कम रहा हो, लेकिन प्रति हेक्टेयर उच्च उपज (Yield per Hectare) ने इसकी भरपाई कर दी है।

किसानों को पूरी उम्मीद है कि जैसे-जैसे बाहरी राज्यों में आपूर्ति बढ़ेगी, उन्हें अपनी मेहनत का और भी बेहतर आर्थिक लाभ मिलेगा।

 

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