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इराक के पास विमान हमले में मुंबई के इंजीनियर की मौत, बेटी ने किया आखिरी कॉल

इराक तेल टैंकर हमले ने एक हंसते-खेलते भारतीय परिवार को हमेशा के लिए तबाह कर दिया है। इराक के बसरा इलाके में समुद्र के बीच एक वाणिज्यिक पोत पर हुए इस जानलेवा हमले में मुंबई के एक 56 वर्षीय अनुभवी भारतीय समुद्री इंजीनियर की दर्दनाक मौत हो गई। इस त्रासदी ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, और पीड़ित का परिवार अब भारत सरकार से जवाब और न्याय की गुहार लगा रहा है।

इराक तेल टैंकर हमले की खौफनाक रात: बसरा के खोर अल जुबैर बंदरगाह के पास क्या हुआ?

यह दुखद घटना बुधवार को तब हुई जब तेल टैंकर ‘एमटी सेफ्टी विष्णु’ (MT Safety Vishnu) इराक के बसरा के पास खोर अल जुबैर बंदरगाह (Khor Al Zubair Port) के करीब खड़ा था। मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच हुए इस अचानक हमले में अतिरिक्त मुख्य अभियंता (अधीक्षक) के रूप में कार्यरत देव नंदन प्रसाद सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और अंततः उनकी मृत्यु हो गई।

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मूल रूप से बिहार के रहने वाले श्री सिंह 2019 में बेहतर भविष्य की तलाश में अपने परिवार के साथ मुंबई के कांदिवली पूर्व स्थित रहेजा इटरनिटी सोसाइटी में शिफ्ट हो गए थे। उनके परिवार में उनकी 50 वर्षीय पत्नी कुमकुम सिंह, 21 वर्षीय बेटी कोमल सिंह (जो मेडिकल की छात्रा है) और एक 27 वर्षीय बेटा है, जो वर्तमान में अमेरिका में मैनेजमेंट की पढ़ाई कर रहा है।

इराक तेल टैंकर हमले के बाद: बेटी की दर्दभरी दास्तान और शिपिंग कंपनी की लापरवाही

नागपुर मेडिकल कॉलेज में तीसरे वर्ष की छात्रा कोमल सिंह ने अपने पिता के साथ हुई आखिरी बातचीत को याद करते हुए एक दहला देने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि परिवार ने 11 मार्च की शाम को उनसे बात की थी, तब उन्होंने आश्वासन दिया था कि जहाज पर सब कुछ ठीक है।

“लगभग 2:36 बजे उन्होंने फिर से फोन किया और हमें घबराहट में बताया कि जहाज में आग लग गई है। उसके बाद हम उन्हें लगातार फोन करते रहे, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।” – कोमल सिंह (पीड़ित की बेटी)

जब परिवार ने शिपिंग कंपनी से संपर्क साधा, तो शुरुआत में उन्हें सुबह तक इंतजार करने को कहा गया। कंपनी ने बाद में झूठा दावा किया कि सभी को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन देव नंदन ने बहुत सारा समुद्री पानी निगल लिया था जिसके कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। जब परिवार मुंबई में कंपनी के कार्यालय पहुंचा, तब जाकर उन्हें आधिकारिक तौर पर उनकी मृत्यु की सूचना दी गई।

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इराक तेल टैंकर हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच और मुआवजे की मांग

परिवार का आरोप है कि उन्हें इस भयानक हादसे की सूचना कंपनी या सरकार से नहीं, बल्कि मीडिया रिपोर्टों के जरिए मिली। देव नंदन की पत्नी कुमकुम सिंह ने रोते हुए कहा, “उन्होंने कंपनी से इस्तीफा भी दे दिया था, लेकिन बेटी की कॉलेज की बकाया फीस भरने और कुछ अतिरिक्त पैसे कमाने के लिए वे इस यात्रा पर गए थे। मैंने अपने पति को जीवित भेजा था; मैं उन्हें उसी तरह वापस चाहती हूं।”

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पीड़ित का बेटा, जो हाल ही में एक प्रोजेक्ट के सिलसिले में जापान गया था, इस हृदयविदारक त्रासदी की खबर सुनकर तुरंत भारत लौट रहा है। परिवार ने अब इराक तेल टैंकर हमले की एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच, बच्चों के लिए उचित मुआवजे और देव नंदन के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द भारत लाने की पुरजोर मांग की है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय समुद्री एजेंसियों और स्थानीय अधिकारियों को घटना के बारे में सूचित कर दिया गया है और जांच अभी जारी है।

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