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चीन का नया अल्पसंख्यक कानून: क्या यह 55 जातीय समूहों की पहचान के लिए एक खतरनाक और कड़ा कदम है?

चीन का नया अल्पसंख्यक कानून गुरुवार, 13 मार्च को आधिकारिक रूप से पारित कर दिया गया है। देश के 55 मान्यता प्राप्त जातीय अल्पसंख्यक समूहों के बीच एक “साझा” राष्ट्रीय पहचान स्थापित करने के उद्देश्य से लाए गए इस कानून ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी है। चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) इसे ‘जातीय एकता और प्रगति’ का नाम दे रही है, लेकिन मानवाधिकार आलोचकों का मानना है कि यह कदम गैर-हान (Non-Han) आबादी की स्वतंत्र सांस्कृतिक पहचान को हमेशा के लिए मिटा सकता है।नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (NPC) के वार्षिक समापन सत्र में इस मसौदे को भारी बहुमत (2,756 मतों) से मंजूरी मिली। इसके विरोध में केवल तीन वोट पड़े, जबकि तीन सदस्य अनुपस्थित रहे। यह आँकड़ा स्पष्ट करता है कि चीनी नेतृत्व अपनी ‘एक राष्ट्र, एक संस्कृति’ की नीति पर कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

चीन का नया अल्पसंख्यक कानून: हान बहुसंख्यक और अल्पसंख्यकों के बीच का संघर्ष

चीन की 1.4 अरब आबादी में 91% से अधिक हिस्सा ‘हान चीनी’ समुदाय का है। बाकी 9% में 55 अल्पसंख्यक समूह शामिल हैं, जिनमें उइगर, तिब्बती, मंगोल, हुई और मंचू प्रमुख हैं। ये समूह मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में रहते हैं जो चीन के कुल भूभाग का लगभग आधा हिस्सा है और प्राकृतिक संसाधनों से बेहद समृद्ध है।

नए कानून के तहत शिक्षा, प्रवासन, संस्कृति, रोजगार और आवास के माध्यम से इन अल्पसंख्यकों को मुख्यधारा के साथ एकीकृत करने की योजना है। हालांकि, आलोचक इसे एकीकरण (Integration) के बजाय जबरन आत्मसात (Forced Assimilation) की प्रक्रिया मान रहे हैं।

भाषा और धर्म पर चीन का नया अल्पसंख्यक कानून का प्रभाव

इस कानून के सबसे विवादास्पद पहलुओं में से एक भाषा और धर्म पर लगाया गया सख्त नियंत्रण है। मसौदे के अनुसार:

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  • मंदारिन की प्रधानता: स्कूलों, सरकारी कार्यालयों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में मंदारिन (Mandarin) को प्राथमिक भाषा बना दिया गया है। सार्वजनिक स्थानों पर मंदारिन को अल्पसंख्यक भाषाओं की तुलना में अधिक प्रमुखता दी जाएगी।
  • धर्म का ‘चीनीकरण’ (Sinicization): धार्मिक संस्थानों, मदरसों और पूजा स्थलों को चीन की समाजवादी विचारधारा के अनुरूप काम करना होगा।
  • अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा: कानून स्पष्ट रूप से जाति या धर्म के आधार पर विवाह में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को रोकता है, जिसे विशेषज्ञ हान और अन्य समूहों के बीच विवाह (Intermarriage) को बढ़ावा देने की रणनीति मानते हैं।

क्या कहता है बीजिंग और क्या है विशेषज्ञों की राय?

कॉर्नेल विश्वविद्यालय में चीनी विदेश नीति के विशेषज्ञ एलन कार्लसन के अनुसार, चीन का नया अल्पसंख्यक कानून स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति शी जिनपिंग के उस दृष्टिकोण को लागू करता है जिसमें गैर-हान लोगों को हान बहुमत के साथ एकीकृत होना होगा और बीजिंग के प्रति अपनी पूर्ण वफादारी साबित करनी होगी।

दूसरी ओर, चीनी सरकार और उसके मुखपत्र इसे अलग नजरिए से पेश कर रहे हैं। सरकारी अखबार चाइना डेली ने अपने संपादकीय में इस बात का खंडन किया है कि यह कानून अल्पसंख्यकों की संस्कृति को नष्ट करेगा। उनके अनुसार, यह कानून आर्थिक विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के बीच एक सही संतुलन स्थापित करने के लिए कठोर विधायी प्रक्रिया के बाद लाया गया है।

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अलगाववाद पर प्रहार: कठोर सजा का प्रावधान

इस कानून के लागू होने के बाद, ‘जातीय एकता’ को चुनौती देने वाले किसी भी कृत्य को अब कानूनी रूप से ‘अलगाववाद’ माना जाएगा। मसौदे में सख्त चेतावनी दी गई है कि देश के अंदर या बाहर काम करने वाले जो भी संगठन या व्यक्ति ‘जातीय एकता को कमजोर करने’ की कोशिश करेंगे, उन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह प्रावधान सीमा सुरक्षा और सामाजिक स्थिरता के नाम पर असहमति की हर आवाज़ को दबाने का एक शक्तिशाली हथियार बन सकता है।

कुल मिलाकर, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक मानवाधिकार संगठन और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस नए कानून पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर करोड़ों लोगों की जीवनशैली और मौलिक अधिकारों पर पड़ने वाला है।

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प्रकाशित: 13 मार्च, 2026 | श्रेणी: अंतर्राष्ट्रीय समाचार

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