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मोक्षदा एकादशी 2025: मोक्षदा एकादशी पर गंगा स्नान करने से परम मोक्ष की प्राप्ति होती है।

मोक्षदा एकादशी 2025: मोक्षदा एकादशी पर गंगा स्नान करने से परम मोक्ष की प्राप्ति होती है।
मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोक्षदा एकादशी कहा जाता है। इस दिन गीता जयंती भी मनाई जाती है। मोक्षदा एकादशी एकमात्र ऐसा त्योहार है जो विष्णु के परमधाम तक जाने का मार्ग प्रशस्त करता है। इसी दिन गीता जयंती भी पड़ने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। चूँकि एकादशी के दिन गंगा में स्नान करने से सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है, इसलिए कई भक्त इस दिन गंगा जल में डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना करते हैं।
इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरूक्षेत्र की रणभूमि में अपने कर्तव्य से विमुख हुए अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। गीता को संजीवनी विद्या कहा गया है। गीता के जीवन दर्शन के अनुसार- मनुष्य महान है, अमर है, अनन्त शक्ति का भण्डार है। कुरूक्षेत्र की रणभूमि में अर्जुन ने श्रीकृष्ण से कहा था, ”मैं युद्ध नहीं करूंगा।” मैं अपने रिश्तेदारों और गुरुओं को मारकर राजसी सुख नहीं भोगना चाहता।

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इसी अर्जुन ने कुछ क्षण पहले कौरवों की पूरी सेना को नष्ट करने का संकल्प लिया था। लेकिन अब वह अधीर हो रहा था और अपने काम से विमुख हो रहा था। ऐसे में भगवान श्रीकृष्ण ने कर्त्तव्य से विमुख अर्जुन को जो उपदेश दिया, वही गीता है।
गीता की गिनती विश्व के महान ग्रंथों में होती है। गीता अमृत है. इस अमृत को पीने से व्यक्ति अमर हो जाता है। गीता धर्म से प्रारंभ होती है और कर्म पर समाप्त होती है। गीता मनुष्य को प्रेरणा देती है। इसी आधार पर अर्जुन ने स्वीकार किया था, “हे प्रभु, मेरा मोह नष्ट हो गया है। मैंने अज्ञान से ज्ञान प्राप्त कर लिया है। मैं आपकी आज्ञा का पालन करने के लिए प्रतिबद्ध हूँ।”
गीता में कुल अठारह अध्याय हैं। महाभारत का युद्ध भी केवल अठारह दिनों तक ही चला था। गीता के श्लोकों की कुल संख्या सात सौ है। भगवत गीता में भक्ति और कर्म योग का सुंदर समन्वय है। इसमें ज्ञान को सर्वोच्च स्थान दिया गया है। मनुष्य की शंकाओं का वास्तविक समाधान ज्ञान प्राप्ति के बाद ही होता है। इसीलिए गीता सार्वभौमिक है। योगिराज श्रीकृष्ण का सभी मनुष्यों को संदेश है- कर्म करो। आपका कर्तव्य है अपना काम करना. परिणाम की आशा न करें. परिणाम को ध्यान में रखकर भी कोई कार्य न करें। अपना काम करो, लेकिन निःस्वार्थ भाव से। फल की इच्छा से कार्य करने वाला व्यक्ति असफल होने पर दुखी हो जाता है। इसलिए लक्ष्य की ओर प्रयास करते रहना ही अच्छी बात है.
इस दिन श्री गीताजी, श्रीकृष्ण, व्यासजी आदि का भक्तिपूर्वक पूजन करके गीता जयंती मनानी चाहिए। गीता पाठ एवं गीता प्रवचन आदि का आयोजन करना चाहिए। यह सदैव शुभ फल देता है। यह अर्जुन के मोह के नाश की तरह सभी भक्तों के मोह और पापों को नष्ट कर देता है, इसलिए यह मोक्ष है।
– शुभा दुबे

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