राजस्थान

दुबई से जोधपुर श्रद्धालुओं की वापसी: ईरान-इज़राइल युद्ध के साये में अटकी सांसें, फिर हुआ चमत्कार!

दुबई से जोधपुर श्रद्धालुओं की वापसी: ईरान-इज़राइल युद्ध के साये में अटकी सांसें, फिर हुआ चमत्कार!

 

दुबई से जोधपुर श्रद्धालुओं की वापसी आज राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी और राहत भरी खबर बन गई है। ईरान और इज़राइल के बीच अचानक भड़के भीषण तनाव के कारण दुबई में फंसे करीब 120 भारतीय श्रद्धालु और दो संत सुरक्षित वतन लौट आए हैं। यह वापसी किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि युद्ध के मुहाने पर खड़े मध्य पूर्व (Middle East) के अस्थिर माहौल में सैकड़ों जिंदगियां अनिश्चितता के भंवर में फंसी हुई थीं। श्रद्धालुओं के परिवारों के लिए यह पल “अंधेरे के बाद सवेरा” जैसा है।

धार्मिक यात्रा से युद्ध के मैदान के बीच का सफर

जोधपुर के सूरसागर स्थित ऐतिहासिक बड़ा रामद्वारा से रामस्नेही सम्प्रदाय के 120 से अधिक भक्तों का यह जत्था गत 23 फरवरी 2026 को दुबई के लिए रवाना हुआ था। इस आध्यात्मिक सत्संग यात्रा का नेतृत्व सम्प्रदाय के आदरणीय संत अमृत राम महाराज और मनोहर दास महाराज कर रहे थे। दुबई में 28 फरवरी तक धार्मिक कथा और भक्ति कार्यक्रमों का भव्य आयोजन निर्धारित था।

यात्रा आध्यात्मिक रूप से अत्यंत उन्नतिदायक रही और सभी भक्त उत्साह से भरे हुए थे। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। जैसे ही कथा संपन्न हुई और भक्तों की वापसी का समय आया, ईरान और इज़राइल के बीच जारी तनाव चरम पर पहुंच गया। मिसाइल हमलों, धमाकों की गूंज और हवाई क्षेत्र (Airspace) में अस्थिरता के कारण दुबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन ठप हो गया।

जब यह जत्था दुबई एयरपोर्ट पहुंचा, तो उनकी उड़ान रद्द कर दी गई। सुरक्षा कारणों से उन्हें वापस भेज दिया गया। अचानक पैदा हुए इस संकट ने सभी को स्तब्ध कर दिया।

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संकट के समय में आस्था का संबल: श्रद्धालुओं ने बनाए रखा साहस

हवाई अड्डे से वापस लौटने के बाद, सभी श्रद्धालु मीना बाजार क्षेत्र के एक होटल में अस्थायी रूप से रुके। यहां दिन गुजरने के साथ ही चिंताएं भी बढ़ने लगीं। युद्ध की आहट, उड़ानों का कोई निश्चित समय न होना और होटल के बढ़ते खर्च ने भक्तों पर जबरदस्त मानसिक और वित्तीय दबाव बना दिया। कई दिनों तक अनिश्चितता का माहौल बना रहा।

लेकिन, इस कठिन परीक्षा की घड़ी में संत अमृत राम महाराज और मनोहर दास महाराज एक मजबूत ढाल बनकर खड़े हुए। उन्होंने भक्तों का मनोबल टूटने नहीं दिया। युद्ध के भय और धमाकों की गूंज के बीच, होटल के कमरों में ही भजन-कीर्तन, होली के गीत और ‘राम’ नाम का सामूहिक जप शुरू हो गया। सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आस्था ने भय पर जीत हासिल की।

जोधपुर से भी संत रामप्रसाद महाराज ने वीडियो कॉल के माध्यम से भक्तों को मजबूत रहने और भगवान पर भरोसा रखने का संदेश भेजा।

कूटनीतिक प्रयास और जोधपुर श्रद्धालुओं की सुरक्षित घर वापसी

जैसे ही जोधपुर में भक्तों के फंसने की खबर फैली, परिवारों में कोहराम मच गया। उन्होंने सोशल मीडिया और सरकार से मदद की गुहार लगाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित कई नेताओं ने विदेश मंत्रालय (MEA) से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की।

भारत सरकार के कूटनीतिक प्रयासों और हवाई क्षेत्र के धीरे-धीरे खुलने के बाद, अनिश्चितता के बादल छंटे। आख़िरकार, जब हालात नियंत्रण में हुए, तो सभी श्रद्धालु दुबई से सुरक्षित बाहर निकल पाए।

कोच्चि के रास्ते स्वदेश आगमन

देर रात, श्रद्धालुओं का पहला बड़ा जत्था दुबई से कोच्चि एयरपोर्ट पहुंचा। वहां से अलग-अलग कनेक्टिंग फ्लाइट्स के जरिए वे आगे बढ़े। संतों सहित करीब 20 लोग बेंगलुरु पहुंचे। जानकारी के अनुसार, अधिकांश श्रद्धालुओं के आज दोपहर 3.15 बजे तक जोधपुर पहुंचने की उम्मीद है।

जोधपुर में संत रामप्रसाद महाराज ने सभी की वापसी पर गहरी खुशी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भगवान की विशेष कृपा और भक्तों की सामूहिक प्रार्थना का ही फल है कि सभी सुरक्षित घर लौट आए हैं, जो पूरे सम्प्रदाय और जोधपुर के लिए सबसे बड़ी राहत की बात है। दुबई से जोधपुर श्रद्धालुओं की वापसी की यह कहानी कठिन समय में साहस, एकता और अटूट आस्था की एक मिसाल बन गई है।

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