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माधुरी दीक्षित जन्मदिन: फ्लॉप से शुरुआत कर बनीं ‘धक-धक गर्ल’, जानें उनका शानदार और अविश्वसनीय सफर!

माधुरी दीक्षित जन्मदिन आज 15 मई को पूरे बॉलीवुड और उनके करोड़ों प्रशंसकों द्वारा बेहद उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। 58वां जन्मदिन मना रहीं माधुरी उद्योग की शीर्ष और सबसे सफल अभिनेत्रियों में से एक हैं, जिन्होंने अपनी कातिलाना मुस्कान, बेहतरीन अभिनय और बेजोड़ नृत्य (Dance) से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई है। करोड़ों दिलों पर राज करने वाली इस ‘धक-धक गर्ल’ ने अपनी शुरुआत राजश्री प्रोडक्शन की फिल्म ‘अबोध’ से की थी। हालांकि, उनकी सफलता की यात्रा रातों-रात तय नहीं हुई थी। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के बल पर इंडस्ट्री में अपना यह विशेष मुकाम हासिल किया है।

माधुरी दीक्षित जन्मदिन: जन्म, परिवार और शुरुआती जीवन

माधुरी दीक्षित का जन्म 15 मई 1967 को मुंबई के एक साधारण मध्यमवर्गीय मराठी परिवार में हुआ था। बचपन से ही कला के प्रति उनका गहरा रुझान था। उन्होंने महज 8 साल की उम्र में कथक सीखना शुरू कर दिया था और बाद में एक पेशेवर शास्त्रीय नृत्यांगना (Classical Dancer) बन गईं। पढ़ाई में भी वह काफी होशियार थीं और उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय से माइक्रोबायोलॉजी (Microbiology) विषय में बीएससी की डिग्री हासिल की है।

माधुरी दीक्षित जन्मदिन विशेष: ‘अबोध’ से लेकर लगातार फ्लॉप फिल्मों का संघर्ष

माधुरी के लिए फिल्मों की दुनिया में कदम रखना और टिके रहना बिल्कुल भी आसान नहीं था। जब वह 12वीं कक्षा में पढ़ रही थीं, तब उनकी बड़ी बहन की एक दोस्त राजश्री प्रोडक्शंस में काम करती थीं। उन्हें पता चला कि एक नई फिल्म के लिए एक फ्रेश चेहरे की तलाश की जा रही है। 12वीं की परीक्षा देने के बाद माधुरी ने ऑडिशन दिया और उन्हें चुन लिया गया।
शुरुआत में माधुरी का परिवार फिल्मों में काम करने के सख्त खिलाफ था। हालांकि, प्रोडक्शन टीम के समझाने पर परिवार वाले मान गए और इस तरह माधुरी ने अपनी पहली फिल्म साइन की।

पहली फिल्म रही फ्लॉप, फिर भी नहीं मानी हार

1984 में रिलीज हुई उनकी पहली फिल्म ‘अबोध’ बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई। इसके बावजूद उनके चेहरे की मासूमियत ने निर्देशकों का ध्यान खींचा। उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर फिल्मों में करियर बनाने का फैसला किया।
1985 में उन्हें फिल्म ‘आवारा बाप’ मिली, जिसमें वह साइड रोल में थीं। इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात दिग्गज निर्देशक सुभाष घई से हुई। दुर्भाग्य से ‘आवारा बाप’ भी फ्लॉप रही। दो फ्लॉप फिल्मों के बावजूद, 1986 में उन्हें पहली बार प्रसिद्ध ‘फिल्मफेयर’ पत्रिका के कवर पेज पर जगह मिली, जिससे इंडस्ट्री में उनकी चर्चा होने लगी।

‘तेजाब’ ने कैसे बदली किस्मत? माधुरी दीक्षित जन्मदिन पर जानें टर्निंग पॉइंट

लगातार असफलता का दौर यहीं नहीं रुका। अभिनेत्री ने ‘स्वाति’, ‘हिफाजत’, ‘मानव हत्या’ और ‘उत्तर दक्षिण’ जैसी कई फिल्मों में काम किया, लेकिन ये सभी बॉक्स ऑफिस पर औंधे मुंह गिर गईं। लगातार 6-7 फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद फिल्म गलियारों में यह चर्चा होने लगी थी कि माधुरी में “हीरोइन मटेरियल” नहीं है।
लेकिन अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने 1988 में एन. चंद्रा की फिल्म ‘तेजाब’ (Tezaab) साइन की। इस फिल्म में अनिल कपूर के साथ उनकी जोड़ी और ‘एक दो तीन’ गाने पर उनके आइकॉनिक डांस ने पूरे देश में तहलका मचा दिया। ‘तेजाब’ माधुरी दीक्षित जन्मदिन और उनके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इसी फिल्म ने उनके करियर को वह ऐतिहासिक गति दी, जिसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और बॉलीवुड की निर्विवाद रानी बन गईं।

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