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भगवंत मान ने कहा कि जब सीबीआई ने उनके कैंप ऑफिस पर छापा मारा तो ‘बीजेपी में हड़कंप’ मच गया.

चंडीगढ़:

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केंद्रीय जांच ब्यूरो ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कैंप कार्यालय की तलाशी ली है. यह कदम तबादलों, पोस्टिंग और सरकारी कामकाज में कथित हस्तक्षेप से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले उठाया गया है। यह तलाशी कथित भ्रष्टाचार के मामलों से जुड़े आठ स्थानों पर छापेमारी की श्रृंखला का हिस्सा थी। चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में छापेमारी की गई। एजेंसी ने लैपटॉप, सेलफोन और दस्तावेज़ जब्त कर लिए हैं, जिनकी वर्तमान में रिश्वतखोरी और कथित अनुचितता से संबंधित सबूतों के लिए जांच की जा रही है।

भगवंत मान ने आरोप लगाया है कि भाजपा उनसे और उनकी सरकार से मिले प्यार से आहत होकर राज्य विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, “बीजेपी ने पंजाब चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है…सीबीआई ने मेरे कैंप ऑफिस पर छापा मारा…अब पंजाब में ईडी और सीबीआई का दुरुपयोग किया जाएगा…पंजाब सरकार और मुझे बदनाम करने के लिए…बीजेपी लोगों से मिल रहे प्यार से परेशान है।”

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आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने एक पोस्ट में कहा, “चुनाव से दो महीने पहले पंजाब के मुख्यमंत्री के कार्यालय पर सीबीआई की छापेमारी बीजेपी की हताशा का नतीजा है। जब से बीजेपी सरकार केंद्र में आई है, उसने हमेशा पंजाबियों को धक्का दिया है – चाहे वह किसान आंदोलन हो, पंजाब का पानी का मुद्दा हो या पंजाब यूनिवर्सिटी का मुद्दा हो” और अब वह अपने चुने हुए मुख्यमंत्री को भी घेर रही है।

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बीजेपी ने कहा कि सीबीआई छापेमारी का आदेश देना सरकार का अधिकार नहीं है. बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस नेता सुनील जाखड़ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

उन्होंने कहा, “दिखावा करना बंद करें। अदालत खुद जांच की निगरानी कर रही है। अगर आप सच्चे हैं, तो आपको डरने की क्या जरूरत है? आपको अपने अपराधों का जवाब देना होगा। पंजाब से लूटे गए एक-एक पैसे का हिसाब लिया जाएगा।”

इससे पहले, केंद्रीय एजेंसी ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के निर्देशों और प्रवर्तन निदेशालय की एक रिपोर्ट के बाद मान के ओएसडी राजबीर घुम्मन और पांच अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोपों में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और प्रशासनिक निर्णयों में हेराफेरी शामिल है।

अधिवक्ता निखिल सराफ द्वारा दायर याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग के बाद उच्च न्यायालय ने घुम्मन के भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने का निर्देश सीबीआई को दिया था। एजेंसी को दो महीने के भीतर अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।


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