धर्म

तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर के शिखर की छाया ज़मीन पर क्यों नहीं पड़ती?

भारत में कई प्राचीन मंदिर हैं जिनकी अपनी-अपनी कहानियां हैं। देश के लगभग सभी मंदिर गणित, विज्ञान और वास्तुकला के ऐसे अद्भुत नमूने हैं कि इंजीनियर और वैज्ञानिक भी इन्हें देखकर हैरान रह जाते हैं। ऐसा ही एक मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर शहर में है। भगवान शिव को समर्पित यह बृहदेश्वर मंदिर बेहद अद्भुत है। आमतौर पर अधिकांश मंदिरों के शिखर की छाया सूर्य की रोशनी के कारण जमीन पर दिखाई देती है। लेकिन बृहदेश्वर मंदिर के शिखर की छाया कभी भी जमीन पर नहीं पड़ती।

रहस्यमय बृहदेश्वर मंदिर

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय और यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची के अनुसार, बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण 11वीं शताब्दी में राजा राजराजा चोल ने कराया था। यह मंदिर मजबूत ग्रेनाइट पत्थरों से बना है। उस समय जब क्रेन जैसी आधुनिक मशीनें नहीं थीं, तब चोलकालीन कारीगरों की मदद से सैकड़ों फीट ऊपर तक पत्थर ले जाकर मंदिर का निर्माण किया गया था। 1000 साल पुराने और भव्य इस मंदिर की संरचना इतनी अद्भुत है कि इस मंदिर के शिखर यानी गुंबद की छाया कभी भी जमीन पर नहीं पड़ती। इस रहस्य को लेकर वैज्ञानिक आज भी हैरान हैं।

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मंदिर के शिखर की छाया से जुड़ा रहस्य

बृहदेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध है और इसका मुख्य रहस्य मंदिर के शिखर से जुड़ा है। इस मंदिर का शिखर लगभग 216 फीट ऊंचा है। इस शिखर के ऊपरी भाग पर 80 टन वजनी पत्थर से बना कलश रखा हुआ है। दिन के समय, जब सूर्य ठीक सिर पर होता है या सूर्यास्त होता है, तो इसके मुख्य शिखर की छाया मंदिर परिसर की जमीन पर नहीं पड़ती है।

जानिए क्या है वैज्ञानिकों और वास्तुकारों की राय

इसका वर्णन सिविल इंजीनियरिंग और ऐतिहासिक वास्तुकला में किया गया है। वैज्ञानिकों और वास्तुकारों के अनुसार, बृहदेश्वर मंदिर को विशेष गणितीय और ज्यामितीय कोणों के आधार पर डिजाइन किया गया है। मंदिर का मंच काफी चौड़ा है और शिखर की संरचना एक विशेष कोण पर बनी है। इस अलग और अद्भुत संरचना के कारण मंदिर के शिखर की छाया जमीन तक नहीं पहुंच पाती और मंदिर के आधार में ही समा जाती है।

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यह मंदिर बिना सीमेंट और केमिकल के बनाया गया है

बृहदेश्वर मंदिर के निर्माण में चूना, सीमेंट या किसी अन्य बंधन रसायन का उपयोग नहीं किया गया है। यहां पत्थरों को एक साथ जोड़ने के लिए पज़ल लॉक या इंटरलॉकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

मंदिर के बाहर प्रांगण में नंदी महाराज की प्रतिमा स्थापित है। इस प्रतिमा का निर्माण एक बड़े पत्थर को तराश कर किया गया है। यह भारत की दूसरी सबसे बड़ी नंदी प्रतिमा मानी जाती है। यह मंदिर ‘महान जीवित चोल मंदिरों’ का हिस्सा है और यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल है।

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ऐसे पहुंचें बृहदेश्वर मंदिर

बृहदेश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा तिरुचिरापल्ली अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है।

अगर रेलवे स्टेशन की बात करें तो निकटतम रेलवे स्टेशन तंजावुर जंक्शन होगा।

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