धर्म

शनि जयंती 2026: 16 मई को मनाएं शनि जयंती, ऐसे करें भगवान शनिदेव को प्रसन्न

हिंदू धर्म में शनि जयंती का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, शनि जयंती हर साल ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार इस साल शनि जयंती 16 मई को मनाई जाएगी. मान्यता है कि शनिदेव न्याय के देवता हैं और अगर शनि जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा कर व्रत रखा जाए तो भक्तों के कष्ट दूर हो जाते हैं. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर, जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि शनिदेव सभी भक्तों को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिदेव को प्रसन्न करने और किसी भी तरह के दुष्प्रभाव से बचने के लिए लोग कई तरह से उनकी पूजा करते हैं। धर्म और ज्योतिष की दृष्टि से सूर्य पुत्र शनिदेव का महत्वपूर्ण स्थान है। मान्यता है कि इस दिन शनिदेव की विधिवत पूजा करने से शनि जनित दोषों को कम किया जा सकता है। शनिदेव को कर्मों के अनुसार फल देने वाले न्यायप्रिय देवता कहा गया है। अच्छे कर्म करने वालों पर शनिदेव सदैव कृपा करते हैं और उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं शनिदेव बुरे कर्म करने वाले व्यक्ति को कड़ी सजा देते हैं। शनिदेव की कुदृष्टि के कारण व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि शनि जयंती के दिन कुछ उपाय करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और अपनी कृपा प्रदान करते हैं, वहीं कुछ ऐसे कार्य भी हैं जिन्हें करने से वे नाराज हो सकते हैं, ऐसे कार्य इस दिन भूलकर भी न करें। शनि भगवान सूर्य के पुत्र और मृत्यु के देवता यम के बड़े भाई हैं। शनिदेव को न्यायकारी ग्रह माना जाता है। लोग शनि की महादशा अंतर्दशा, साढ़ेसाती और ढैय्या को अशुभ मानते हैं, लेकिन यह हमेशा सच नहीं होता है। अनैतिक कार्य करने वाले व्यक्ति को शनि अपनी ढैय्या, साढ़ेसाती या महादशा में अत्यंत कष्ट देता है। इन्हें अचानक हानि, शारीरिक विकार, धन हानि और अपमान सहना पड़ता है, जबकि नैतिक कार्य करने वाले लोग शनि की महादशा के दौरान फर्श से अर्श तक पहुंचते देखे गए हैं। शनि मकर और कुंभ राशि का स्वामी है। तुला राशि में उच्च के होते हैं। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि अच्छी स्थिति में है तो शनि उसे जीवन में उन्नति की ओर ले जाएगा और यदि इसी कुंडली में शनि मेष या शत्रु राशि में है तो ऐसे व्यक्ति को कष्ट देता है। जो लोग गलत कार्य करते हैं वे शनि से डरते हैं। जैसे रिश्वत लेना, गरीबों को परेशान करना, माता-पिता की सेवा न करना, झूठी गवाही देना, अत्याचार करना आदि। शनि सभी के कर्मों का हिसाब रखते हैं।

शनि जयंती तिथि

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 16 मई को है और इसी तिथि पर शनि जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाएगा। ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 16 मई को सुबह 05:11 बजे से शुरू होगी और 17 मई को सुबह 01:30 बजे समाप्त होगी।

यह भी पढ़ें: बाबा वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग: जहां शिव के साथ शक्ति का वास है, दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर

शुभ योग

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग के अनुसार 16 मई को शनि जयंती के साथ शनिश्चरी अमावस्या का भी संयोग बन रहा है, जिससे यह दिन दोगुना फलदायी बन गया है। शनि अमावस्या पर व्रत रखने और शनिदेव की पूजा करने का विशेष महत्व है, इसलिए इस बार का संयोग भक्तों के लिए बहुत शुभ माना जा रहा है। इसके अलावा इस दिन सौभाग्य योग और शोभन योग भी बन रहा है। सौभाग्य योग 15 मई को दोपहर 2:21 बजे से 16 मई को सुबह 10:26 बजे तक रहेगा, इसके बाद शोभन योग शुरू हो जाएगा और 17 मई को सुबह 6:15 बजे तक प्रभावी रहेगा। ये दोनों योग शुभ कार्यों और पूजा-पाठ के लिए बेहद लाभकारी माने गए हैं। शनि जयंती के दिन सुबह से शाम 5:30 बजे तक भरणी नक्षत्र रहेगा, उसके बाद कृत्तिका नक्षत्र का प्रभाव शुरू हो जाएगा। भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र और देवता यमराज को माना जाता है, जबकि कृत्तिका नक्षत्र का स्वामी सूर्य और देवता अग्नि हैं। इन सभी संयोगों के कारण इस वर्ष शनि जयंती का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है।

शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय

कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिषीय दृष्टि से पीपल का संबंध शनि से माना जाता है। हर शनिवार को पीपल के पेड़ की जड़ में जल चढ़ाने और दीपक जलाने से कई तरह की परेशानियों से राहत मिलती है। शनि की साढ़े साती या ढैय्या के कारण पीपल के पेड़ की पूजा करने और उसकी परिक्रमा करने से शनि की पीड़ा नहीं झेलनी पड़ती। पीपल का पेड़ लगाने से शनि की कृपा प्राप्त होती है। जीवन में आने वाली परेशानियों को दूर करने के लिए शनि दोष से पीड़ित व्यक्ति को शनि जयंती से शुरू करके प्रत्येक शनिवार को शनि देव के मंत्र ‘ओम प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:’ का जाप करना चाहिए। शनिदेव के उपासक भगवान शिव हैं। इस दिन शनिदेव के साथ-साथ भगवान शिव पर भी काले तिल मिले जल से अभिषेक करना चाहिए। शनि दोष को शांत करने के लिए प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र या ‘ओम नम: शिवाय’ का जाप करना चाहिए और सुंदरकांड का पाठ करना चाहिए, इससे शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनिदेव की कृपा पाने के लिए व्यक्ति को शनिवार का व्रत रखना चाहिए और गरीब लोगों की मदद करनी चाहिए, ऐसा करने से व्यक्ति के कष्ट दूर होने लगते हैं। हनुमानजी की पूजा करने वालों पर शनिदेव सदैव प्रसन्न रहते हैं, इसलिए उनकी प्रसन्नता के लिए शनि पूजा के साथ-साथ हनुमान जी की भी पूजा करनी चाहिए।

जो नहीं करना है

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि शनि जयंती के दिन ध्यान रखें कि लोहे से बनी कोई भी वस्तु घर पर न लाएं। लोहे की चीजें खरीदने से शनिदेव नाराज हो जाते हैं और ऐसा करने से आपकी शारीरिक और आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं। शनि जयंती के दिन इस बात का ध्यान रखें कि आप शमी या पीपल के पेड़ को नुकसान न पहुंचाएं, ऐसा करने से आप शनि के प्रकोप में आ सकते हैं। शनि जयंती के दिन भूलकर भी सरसों का तेल, लकड़ी, जूते-चप्पल और काली उड़द न खरीदें, अन्यथा आपको शनिदेव की कुदृष्टि का सामना करना पड़ सकता है। अगर आप शनि जयंती पर शनि मंदिर में शनिदेव के दर्शन करने जाएं तो ध्यान रखें कि ऐसा माना जाता है कि भूलकर भी उनकी आंखों की ओर नहीं देखना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार इनकी आंखों में देखने से हानि होती है। इस दिन भूलकर भी बड़ों का अपमान न करें। जो लोग माता-पिता और बड़ों का अनादर करते हैं और उनसे झूठ बोलते हैं, उनसे शनिदेव क्रोधित होकर बुरे परिणाम देते हैं।

ऐसे करें शनिदेव की पूजा

कुंडली विश्लेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन सुबह उठकर दैनिक कर्म और स्नान आदि करने के बाद व्रत और पूजा का संकल्प लेना चाहिए। घर के पूजा स्थल पर शनिदेव की मूर्ति स्थापित करें। शनिदेव को तेल, फूल, माला आदि चढ़ाएं। शनिदेव को काली उड़द और तिल का तेल चढ़ाना बहुत शुभ होता है। शनिदेव को तेल का दीपक जलाएं और शनि चालीसा का पाठ करें। शनिदेव की आरती करने के बाद हाथ जोड़कर प्रणाम करें और बाद में प्रसाद बांट दें। शनि जयंती के दिन गरीब और जरूरतमंद लोगों को खाना खिलाएं और अपनी क्षमता के अनुसार दान करें।
– डॉ. अनिश व्यास
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक

यह भी पढ़ें: किचन वास्टू डोश: इन 5 चीजों को रसोई में डालकर गरीबी लाएगी, माँ लक्ष्मी भी गुस्से में बन जाएगी

यह भी पढ़ें: राजा संक्रांति 2025: राजस संक्रांति महिलाओं के सम्मान का प्रतीक है

यह भी पढ़ें: इन तारीखों में जन्में लोग करियर में बनाते हैं अनोखी पहचान, क्या ये है आपका मूलांक?

यह भी पढ़ें: राम नवमी 2025: भगवान श्री राम का जीवन जीवन की गरिमा है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Link Copied!