धर्म

चैत्र नवरात्रि 2026: 19 मार्च को पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि का आरंभ होता है। इस साल चैत्र नवरात्रि 9 अप्रैल 2024 से शुरू हो रही है, जो 17 अप्रैल को समाप्त होगी। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर, जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि नया हिंदू वर्ष चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है। इस बार चैत्र नवरात्रि में पूरे नौ दिनों की नवरात्रि होगी. हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे शुरू होगी और तिथि 20 मार्च को सुबह 4:52 बजे समाप्त होगी। इसलिए, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च को घटस्थापना के साथ शुरू होगी। उदया तिथि के अनुसार इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से प्रारंभ होकर 27 मार्च को समाप्त होगी। इस बार माता रानी पालकी पर सवार होकर आ रही हैं। इससे संकेत मिलता है कि इस बार उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा. मान्यताओं के अनुसार, माता रानी के पालकी पर आने का मतलब है कि देश और दुनिया महामारी और बीमारियों की चपेट में आ सकती है। साथ ही यह व्यापार, अर्थव्यवस्था और राजनीति के लिए भी शुभ नहीं माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हर बार नवरात्रि के दौरान देवी अलग-अलग वाहन पर आती हैं और उस वाहन के अनुसार अगले छह महीनों की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। इस बार मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी. देवी भागवत में माता के पालकी में आगमन का फल “धोलायां मरणं धुवम्” बताया गया है जो जनहानि और रक्तपात का संकेत देता है। अर्थात पालकी (डोली) पर माता का आगमन शुभता का संकेत नहीं है। डोली पर माता का आगमन सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल और महामारी का संकेत माना जाता है। वर्ष भर में चार नवरात्रि आती हैं, जिनमें से आश्विन और चैत्र माह की नवरात्रि समाज में सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। कहा जाता है कि चैत्र नवरात्रि सत्ययुग में सबसे प्रसिद्ध और प्रचलित थी, इसी दिन से युग का आरंभ भी माना जाता है। अत: संवत का प्रारंभ चैत्र नवरात्रि से होता है।

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देवी माँ दुर्गा के वाहन का प्रभाव

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि सिंह राशि को मां दुर्गा का वाहन माना जाता है। लेकिन हर साल नवरात्रि के समय और तिथि के अनुसार देवी मां अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर पृथ्वी पर आती हैं। यानि माता भी शेर की बजाय दूसरे वाहन पर सवार होकर धरती पर आती हैं। माता दुर्गा वाहन से आती हैं और वाहन से ही जाती हैं। देवी भागवत पुराण में उल्लेख है कि शशि सूर्य गजरूढ़ा शनिभौमै तुरंगमे। गुरुशुक्रेच दोलायं बुधे नौकाप्रकीर्तिता॥ इस श्लोक में सप्ताह के सात दिनों के अनुसार देवी के आगमन के लिए अलग-अलग वाहनों का उल्लेख किया गया है। यदि नवरात्रि सोमवार या रविवार को शुरू होती है, तो इसका मतलब है कि देवी मां हाथी पर आएंगी। शनिवार और मंगलवार को देवी मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं। जब गुरुवार या शुक्रवार को नवरात्रि शुरू होती है तो माता डोली पर सवार होकर आती हैं। बुधवार के दिन जब नवरात्रि पूजा प्रारंभ होती है तो माता नाव पर सवार होकर आती हैं। विशेष नक्षत्रों और योगों के साथ नवरात्रि का आगमन मानव जीवन पर विशेष प्रभाव डालता है। इसी प्रकार कलश स्थापना के दिन देवी जिस वाहन पर सवार होकर पृथ्वी की ओर आ रही हैं उसका भी मानव जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है।

मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी

कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हर बार नवरात्रि के दौरान देवी अलग-अलग वाहन पर आती हैं और उस वाहन के अनुसार अगले छह महीनों की स्थिति का अनुमान लगाया जाता है। इस बार मां दुर्गा पालकी पर सवार होकर आएंगी. देवी भागवत में माता के पालकी में आगमन का फल “धोलायां मरणं धुवम्” बताया गया है जो जनहानि और रक्तपात का संकेत देता है। अर्थात पालकी (डोली) पर माता का आगमन शुभता का संकेत नहीं है। डोली पर माता का आगमन सामाजिक-राजनीतिक उथल-पुथल और महामारी का संकेत माना जाता है। पालकी (डोली) पर माता का आगमन आर्थिक संकट, मानसिक अशांति, प्राकृतिक आपदा या बढ़ती महामारी का संकेत देता है।

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तारीख

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू कैलेंडर के अनुसार, चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6:52 बजे शुरू होगी और तिथि 20 मार्च को सुबह 4:52 बजे समाप्त होगी। इसलिए इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च को घटस्थापना के साथ शुरू होगी। उदया तिथि के अनुसार, इस वर्ष चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होगी और 27 मार्च को समाप्त होगी। नया हिंदू वर्ष चैत्र नवरात्रि प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है।

नक्षत्र एवं शुभ योग

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि नवरात्रि के पहले दिन उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और शुक्ल योग का संयोग रहेगा। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना और घटस्थापना की जाती है।

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घट स्थापना का समय

द्विस्वभाव मीनलग्न प्रातः 06:54 से प्रातः 07:50 तक

मिथुन लग्न प्रातः 11:24 से अपराह्न 01:38 तक

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शुभ चौघड़िया प्रातः 06:54 से प्रातः 08:05 तक,

चर-लाभ-अमृत का चौघड़िया प्रातः 84 बजे से दोपहर 03:32 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:59 बजे तक रहेगा।

– डॉ. अनिश व्यास

भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक

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