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ट्रम्प व्यापार जांच: सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद टैरिफ पर एक भयंकर कदम

ट्रम्प व्यापार जांच: सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद टैरिफ पर एक भयंकर कदम
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा, “नीति वही रहती है – आप जानते हैं, अदालतों और अन्य चीजों के आधार पर उपकरण बदल सकते हैं।” फ़ाइल | फोटो साभार: रॉयटर्स

 

ट्रम्प व्यापार जांच ने वैश्विक बाजारों में एक बार फिर से हलचल मचा दी है। बुधवार (11 मार्च, 2026) को ट्रम्प प्रशासन ने विदेशी देशों की विनिर्माण नीतियों और सब्सिडी के खिलाफ एक सख्त और नई व्यापार जांच की आधिकारिक घोषणा की है। यह महत्वपूर्ण कदम तब उठाया गया है जब हाल ही में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा आर्थिक आपातकाल घोषित करके लगाए गए पुराने टैरिफ को असंवैधानिक ठहराते हुए पलट दिया था।सुप्रीम कोर्ट के फरवरी के फैसले के कारण अमेरिका को जो सैकड़ों अरबों डॉलर के राजस्व का नुकसान हुआ है, प्रशासन अब उसकी भरपाई के लिए विभिन्न कानूनी विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है।

ट्रम्प व्यापार जांच: धारा 301 के तहत नया दांव

इस नई रणनीति के केंद्र में 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 है। संयुक्त राज्य अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जैमीसन ग्रीर ने स्पष्ट किया है कि भले ही अदालत के फैसलों के कारण उपकरणों में बदलाव आया हो, लेकिन प्रशासन की मूल नीति और लक्ष्य वही है: अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करना

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श्री ग्रीर ने कहा कि वे इस नई ट्रम्प व्यापार जांच के अंतिम परिणामों पर अभी से कोई अटकल नहीं लगाना चाहते, लेकिन यह तय है कि इसके परिणामस्वरूप नए आयात कर (Import Taxes) लागू हो सकते हैं। यह कदम पिछले साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में आए उस व्यापारिक तनाव की वापसी का संकेत देता है जिसने अंतरराष्ट्रीय बाजारों को हिलाकर रख दिया था।

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जांच के मुख्य लक्ष्य और प्रभावित होने वाले 16 देश

यह नई जांच विशेष रूप से उन विदेशी कंपनियों और सरकारों पर केंद्रित होगी जो “अतिरिक्त औद्योगिक क्षमता” (Excess Industrial Capacity) और अनुचित सरकारी समर्थन के बल पर अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बना रही हैं।

इस जांच के दायरे में आने वाले प्रमुख देशों और क्षेत्रों की सूची में शामिल हैं:

  • एशिया: चीन, भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान, इंडोनेशिया, मलेशिया, कंबोडिया, थाईलैंड, वियतनाम, बांग्लादेश और सिंगापुर।
  • यूरोप और अन्य: यूरोपीय संघ (EU), स्विट्जरलैंड, नॉर्वे और मैक्सिको।

ईरान युद्ध और मध्यावधि चुनावों का दबाव

इस ट्रम्प व्यापार जांच का समय बेहद संवेदनशील है। यह ऐसे समय में लागू हो रही है जब एक तरफ ईरान में संघर्ष की स्थिति है और दूसरी तरफ अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (Midterm Elections) सिर पर हैं। डेमोक्रेट्स ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर ट्रम्प के रिपब्लिकन सहयोगियों पर भारी राजनीतिक दबाव बना दिया है। विपक्ष की मांग है कि जनता को अब उनके टैरिफ रिफंड का बकाया लौटाया जाना चाहिए।

भविष्य की संभावित जांचें: डिजिटल टैक्स से लेकर बेगार तक

सरकार केवल व्यापार अधिशेष (Trade Surplus) तक सीमित नहीं है। ट्रम्प प्रशासन निम्नलिखित मुद्दों पर भी धारा 301 का विस्तार करने पर विचार कर रहा है:

  • श्रमिकों के वेतन को दबाने वाली नीतियां और बेगार (Forced Labor) से बने सामान पर प्रतिबंध।
  • विदेशी डिजिटल सेवा कर (Digital Service Tax)।
  • फार्मास्युटिकल दवाओं का अनुचित मूल्य निर्धारण।
  • समुद्री प्रदूषण जैसे पर्यावरणीय मुद्दे।

इसके अतिरिक्त, वाणिज्य विभाग 1962 के व्यापार विस्तार अधिनियम की धारा 232 के तहत एक अलग जांच भी चला रहा है।

समयसीमा: 24 जुलाई का अल्टीमेटम

इस समय ट्रम्प प्रशासन पर समय-सीमा का भारी दबाव है। वर्तमान में, 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 के तहत विदेशी वस्तुओं पर 10% का टैरिफ लागू है। हालांकि, यह टैरिफ 150 दिनों की अवधि के बाद 24 जुलाई को समाप्त हो जाएगा।

राष्ट्रपति ट्रम्प ने आयात कर को बढ़ाकर 15% करने की योजना बनाई है। श्री ग्रीर ने पुष्टि की है कि उनका विभाग इस 150 दिन की समयसीमा से पहले राष्ट्रपति ट्रम्प के सामने “संभावित विकल्प” प्रस्तुत करने के लिए तेजी से काम कर रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि देश जो पहले से ही व्यापार समझौतों में बंधे हैं, वे धारा 301 की मांगों के खिलाफ कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।

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