धर्म

वराह जयंती पर श्रीहरि का पंचामृत से करें अभिषेक, 13 सितंबर को बन रहा है पूजा का शुभ संयोग

भगवान विष्णु को सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में पूजा जाता है। जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और सृष्टि का संतुलन बिगड़ता है, तब-तब भगवान विष्णु धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए विभिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। भगवान विष्णु के इन्हीं अवतारों में से एक है वराह अवतार। भगवान विष्णु ने समुद्र में डूबी पृथ्वी को बाहर निकालने और राक्षस हिरण्याक्ष का वध करने के लिए वराह अवतार लिया था। इस बार वराह जयंती 13 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है. भगवान श्रीहरि के इस रूप में साहस, शक्ति और सुरक्षा का संगम देखने को मिलता है. तो आइए जानते हैं वराह जयंती की तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और पौराणिक कथा के बारे में…

तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 13 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे हो रहा है. यह तिथि अगले दिन यानी 14 सितंबर 2026 को सुबह 07:08 बजे समाप्त होगी. उदयातिथि के आधार पर वराह जयंती 13 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है.

पूजा विधि

इस दिन सुबह जल्दी स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें और फिर व्रत और पूजा का संकल्प लें। अब सूर्य देव को अर्घ्य दें और पूजा स्थल पर भगवान विष्णु के वराह रूप की मूर्ति स्थापित करें। इसके बाद जल से भरा कलश रखें और भगवान श्रीहरि के वराह रूप का पंचामृत से अभिषेक करें। भगवान वराह को पीले फूल, फल और पीले वस्त्र आदि अर्पित करें। फिर धूप-दीप जलाकर श्रीहरि की आरती करें। पूजा के दौरान ‘ओम वराहाय नम:’ मंत्र का जाप करें। पूजा के अंत में श्री हरि विष्णु से परिवार की सुख, शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

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पौराणिक कथा

धर्म ग्रंथों के अनुसार हिरण्याक्ष नामक शक्तिशाली राक्षस ने तीनों लोकों में आतंक मचाना शुरू कर दिया। उसके अत्याचारों से देवता, ऋषि-मुनि और अन्य प्राणी त्रस्त थे। वहीं हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र के गहरे पानी में ले जाकर छुपा दिया। पृथ्वी के जल में डूब जाने के कारण ब्रह्माण्ड का संतुलन बिगड़ने लगा और चारों ओर समस्याएँ उत्पन्न होने लगीं। तब पृथ्वी की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने वराह अवतार लिया और गहरे समुद्र में उतर गये। भगवान वराह ने पृथ्वी को अपने दाँतों पर उठाकर जल से बाहर निकाला।

तब भगवान विष्णु और हिरण्याक्ष के बीच भयंकर युद्ध हुआ। अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध कर पृथ्वी को उसके आतंक से मुक्त कराया। इसी कारण से भगवान विष्णु के वराह अवतार की गणना उन रूपों में की जाती है, जिन्होंने सृष्टि की रक्षा की और अधर्म का नाश किया।

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धार्मिक महत्व

वराह जयंती एक ऐसा त्योहार है जो हमें श्री हरि विष्णु की शक्ति और उनके सुरक्षात्मक स्वभाव की याद दिलाता है। इस दिन जो भी व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से भगवान वराह की पूजा करता है, उसके जीवन के सभी दोष और परेशानियां दूर हो जाती हैं और व्यक्ति को भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

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