धर्म

हरतालिका तीज 2026: महिलाएं अखंड सौभाग्य के लिए हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं।

विशेषकर सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए शिव-गौरी का पूजन करने से पति, पुत्र, संतान और पौत्र-पौत्रादि के सुख में वृद्धि होती है। व्रत-त्योहारों को श्रद्धापूर्वक और नियमित रूप से करने वाली परिवार की महिलाओं के शुभ आचरण और संकल्प से परिवार की उन्नति होती है। हरतालिका तीज के व्रत से शुभ ग्रह जागृत होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है। हरतालिका तीज का व्रत नियमित रूप से करने से सौभाग्य और ग्रहों की अनुकूलता जागृत होती है।

जानिए हरितालिका तीज व्रत के बारे में

हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा को समर्पित हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है। यह त्यौहार हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। महिलाएं यह व्रत वैवाहिक सुख, समर्पित पति और पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं। इतना ही नहीं, अविवाहित महिलाएं भी भगवान शिव जैसा समर्पित और नेक पति पाने के लिए यह व्रत रखती हैं। एक महिला का दृढ़ संकल्प उसके पति के भाग्य पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है। विशेषकर सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए शिव-गौरी का पूजन करने से पति, पुत्र, संतान और पौत्र-पौत्रादि के सुख में वृद्धि होती है। जिस परिवार की महिलाएं व्रत-त्योहारों को श्रद्धापूर्वक और नियमित रूप से करती हैं, उनके शुभ आचरण और संकल्प से परिवार की उन्नति होती है। हरतालिका तीज के व्रत से शुभ ग्रह जागृत होते हैं और घर में सुख-समृद्धि आती है।
इस साल विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य के लिए 14 सितंबर 2026 दिन सोमवार को हरतालिका तीज व्रत रखेंगी। वहीं कुंवारी लड़कियां सुयोग्य और मनचाहा वर पाने के लिए इस व्रत को विधि-विधान से करती हैं। हरतालिका तीज को कुछ स्थानों पर तीजा व्रत भी कहा जाता है। यह व्रत हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। भारतीय परंपरा में इस व्रत को कुछ कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित इस व्रत में 24 घंटे का निर्जला व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं।

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हरतालिका तीज पर पूजा का समय

पंडितों के अनुसार हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दिन पूजा के दौरान व्रत कथा पढ़ना या सुनना भी बहुत शुभ और लाभकारी माना जाता है। हरतालिका तीज के दिन प्रातः पूजा का समय प्रातः 06:05 बजे से प्रातः 07:06 बजे तक रहेगा. हिंदू धर्म में प्रदोष काल को भगवान शिव की पूजा के लिए सर्वोत्तम समय माना जाता है। इस दिन प्रदोष काल शाम 05:43 बजे से शाम 07:13 बजे तक रहेगा.

हरतालिका तीज व्रत खोलने का शुभ समय

हरतालिका तीज व्रत को अगले दिन सूर्योदय के बाद खोलना सर्वोत्तम माना जाता है। हालांकि तीज व्रत खोलने के दिन भी भद्रा मौजूद रहेगी. इसलिए व्रत तोड़ने के लिए भद्रा खत्म होने का इंतजार करना होगा. तीज व्रत का पारण 15 सितंबर 2026 को सुबह 07:44 बजे के बाद किया जा सकता है.

हरतालिका तीज व्रत से जुड़ी कथा भी रोचक है

हरतालिका तीज व्रत से संबंधित शास्त्रों में एक कथा प्रचलित है। इस कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा, ‘हे प्रभु! ‘ऐसा कौन सा व्रत है जो स्त्री को शीघ्र फल देता है और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति कराता है?’ तब भगवान शिव ने कहा, ‘हे पार्वती! मेरे पहले जन्म में आपने मेरे लिए जो व्रत हरितालिका तीज व्रत किया था, वह सर्वोत्तम है. तुम इसे पुनः करो तथा अन्य स्त्रियों को भी इसका उपदेश करो, क्योंकि यह व्रत स्वयं आदिशक्ति ने प्रतिपादित किया है तथा मेरे द्वारा अनुमोदित है।’ हरतालिका व्रत करने से स्त्री को अनगिनत जन्मों के पापों से मुक्ति मिल जाती है। हरितालिका तीज शुभ होने के साथ-साथ महिलाओं की कुंडली में वर्णित वैवाहिक समस्याओं का भी नाश करती है और संतान सुख प्रदान करती है। महिलाओं का सम्मान करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है।

इसलिए हरतालिका तीज मनाई जाती है

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाना चाहती थीं। इसके लिए उन्होंने हिमालय पर हजारों वर्षों तक बिना भोजन और पानी के कठोर तपस्या की। माता पार्वती के पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। जब यह बात माता पार्वती को पता चली तो उनकी सहेलियों ने उनका अपहरण कर लिया और उन्हें जंगल में छिपा दिया। संस्कृत में हरत का मतलब अपहरण करना और आलिका का मतलब दोस्त होता है। सखियों द्वारा हरण के कारण ही इस पर्व का नाम हरतालिका तीज पड़ा।

हरितालिका तीज व्रत से दैवीय शक्तियां जागृत होती हैं

शास्त्रों के अनुसार यह व्रत स्त्री की आध्यात्मिक शक्ति को जागृत करता है और घर में सुख, शांति और समृद्धि का आधार बनता है। जिस घर की महिलाएं धर्म-कर्म में मर्यादित आचरण करती हैं, उस घर में बहुत खुशहाली रहती है। इस दिन महिलाएं व्रत आदि के माध्यम से अपने अंदर की दैवीय शक्ति को जागृत करती हैं। जब एक महिला अपने मन में कोई अच्छा संकल्प लेती है तो उसकी शक्ति के आगे ब्रह्मांड भी झुक जाता है। नारी की संकल्प शक्ति में अपार शक्ति होती है, वह यमराज से भी अपने पति के प्राणों की रक्षा करने में सक्षम होती है, बस इस कलिकाल में उस शक्ति को जागृत करने की आवश्यकता है।

हरितालिका तीज व्रत के दिन प्रदोष काल में पूजा करें।

पंडितों के मुताबिक व्रती महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रखेंगी और शाम को प्रदोष काल में पूजा करेंगी. इस दौरान मिट्टी से बनी उमा-महेश्वर और भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर षोडशोपचार विधि से पूजा की जाएगी। व्रती माता पार्वती और भगवान शिव से परिवार की सुख, शांति और सौभाग्य की प्रार्थना करेंगी।

जानिए हरितालिका तीज व्रत पर्व पर पारण का शुभ समय

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महिलाएं हरितालिका तीज की व्रत कथा सुनने के बाद रात्रि जागरण करेंगी। इसके बाद अगले दिन 15 सितंबर की सुबह विधिवत व्रत खोला जाएगा.
-प्रज्ञा पांडे

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