धर्म

बुद्ध पूर्णिमा 2026: 1 मई को मनाई जाएगी बुद्ध पूर्णिमा, इस दिन जरूरतमंदों को कपड़े दान करें

हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बहुत शुभ माना जाता है। वैशाख मास की पूर्णिमा तिथि को बुद्ध पूर्णिमा और बुद्ध जयंती के नाम से जाना जाता है। इस बार बुद्ध पूर्णिमा का त्योहार 1 मई को मनाया जाएगा. यह त्यौहार हिंदू और बौद्ध दोनों धर्मों के अनुयायियों द्वारा मनाया जाता है। बुद्ध पूर्णिमा को बुद्ध के जन्म, ज्ञान की प्राप्ति के दिन के रूप में देखा जाता है और उनका महानिर्वाण भी इसी दिन हुआ था। हिंदू मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने बुद्ध के रूप में अपना 9वां अवतार लिया था. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर, जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हर माह शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के अगले दिन पूर्णिमा मनाई जाती है। इस प्रकार वैशाख पूर्णिमा 1 मई को है। इसे बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है। शास्त्रों में निहित है कि भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसलिए हर साल वैशाख पूर्णिमा तिथि को बुद्ध जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान बुद्ध की पूजा की जाती है। बुद्ध पूर्णिमा के दिन रवि योग है.

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि वैशाख पूर्णिमा का हिंदुओं में बहुत महत्व है। वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन लोग सत्यनारायण कथा चंद्रमा को अर्घ्य देते हैं और देवी लक्ष्मी की पूजा करते हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो लोग इस पवित्र दिन पर व्रत रखते हैं उन्हें दैवीय शक्तियां प्राप्त होती हैं और देवी लक्ष्मी उनके घर में हमेशा के लिए निवास करती हैं। शास्त्रों में निहित है कि भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इसी दिन ज्ञान की प्राप्ति और अंतिम निर्वाण हुआ था। इसलिए हर साल वैशाख पूर्णिमा तिथि को बुद्ध जयंती मनाई जाती है। इस दिन भगवान बुद्ध की पूजा की जाती है। इस मौके पर लोग गंगा समेत पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाते हैं. पूजा-पाठ कर दान-पुण्य भी करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा को गौतम बुद्ध की जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह त्यौहार बौद्ध धर्म के लोगों के लिए खास माना जाता है। इस दिन गौतम बुद्ध की शिक्षाओं का पालन किया जाता है और उनकी विशेष पूजा की जाती है। बुद्ध पूर्णिमा का त्यौहार मुख्य रूप से पूर्वी एशिया और दक्षिण एशिया में मनाया जाता है। इसी शुभ तिथि पर गौतम बुद्ध का जन्म नेपाल के लुम्बिनी में हुआ था। गौतम बुद्ध को 35 वर्ष की आयु में निर्वाण प्राप्त हुआ।

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भगवान के तीन अवतार

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इन तीन दिनों में भगवान विष्णु के तीन अवतार अवतरित हुए हैं। त्रयोदशी को नरसिम्हा जयंती, चतुर्दशी को कूर्म जयंती और पूर्णिमा को बुद्ध जयंती (बुद्ध पूर्णिमा) के रूप में मनाया जाता है। इसलिए वैशाख के आखिरी दिनों में स्नान, दान और पूजा अवश्य करनी चाहिए। देवताओं ने कहा कि वैशाख की ये तीन शुभ तिथियां मनुष्यों के पापों का नाश करेंगी। इनके शुभ प्रभाव से ही इन्हें पुत्र, पौत्र और परिवार का सुख मिलेगा। इनके प्रभाव से समृद्धि बढ़ेगी। स्कंद पुराण में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति पूरे वैशाख में सुबह जल्दी तीर्थ स्नान नहीं कर पाता है, तो वह इन तिथियों पर सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों के जल में स्नान कर ले, तो उसे पूरे महीने का पुण्य फल मिलता है।

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क्या करें

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि वैशाख मास की अंतिम तीन तिथियों पर गीता का पाठ करने से अश्वमेघ यज्ञ का फल मिलता है। इन तीन दिनों में श्री विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने से अनंत गुना पुण्य फल मिलता है। जो व्यक्ति वैशाख पूर्णिमा को भगवान विष्णु का एक हजार नामों से दूध और जल से अभिषेक करता है उसे वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। वैशाख के आखिरी तीन दिनों में श्रीमद्भागवत का श्रवण करने से जाने-अनजाने में हुए सभी प्रकार के पाप समाप्त हो जाते हैं।

चंद्रमा को जल चढ़ाने की परंपरा है

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन दुनिया भर से बौद्ध धर्म के अनुयायी बोधगया आते हैं और बोधि वृक्ष की पूजा करते हैं। वैशाख पूर्णिमा पर पवित्र नदी के जल से स्नान करने के बाद घर पर ही भगवान सत्यनारायण की पूजा करने और रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा है। ऐसा माना जाता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है।

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वैशाख पूर्णिमा

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि यह पर्व वैशाख शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इसके बाद पूर्णिमा तिथि 30 अप्रैल 2026 को रात 9:13 बजे शुरू होगी. इसका समापन 1 मई को रात 10:53 बजे होगा. ऐसे में उदया तिथि के प्रभाव से वैशाख पूर्णिमा 1 मई 2026, शुक्रवार को मनाई जाएगी।

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि वैशाख मास की पूर्णिमा को वैशाखी पूर्णिमा, पीपल पूर्णिमा या बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। शास्त्रों के अनुसार वैशाख पूर्णिमा को सभी पूर्णिमाओं में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। प्रत्येक माह की पूर्णिमा जगत के पालनकर्ता भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है। भगवान बुद्ध को भगवान विष्णु का नौवां अवतार माना जाता है। जिन्हें इसी शुभ तिथि पर बिहार के पवित्र तीर्थस्थल बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। वैशाख माह को पवित्र माह माना जाता है। इसके चलते हजारों श्रद्धालु पवित्र तीर्थ स्थलों पर स्नान और दान कर पुण्य कमाते हैं। पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का विशेष महत्व माना जाता है।

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वैशाख पूर्णिमा पूजा अनुष्ठान

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि आज सुबह जल्दी उठकर गंगा स्नान करें। जो लोग गंगा स्नान के लिए नहीं जा सकते उन्हें घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल मिला लेना चाहिए। कुछ लोग इस दिन गंगा नदी में पवित्र स्नान के लिए हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य प्रमुख स्थानों पर भी जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि गंगा जल शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करता है। इस दिन लोग भगवान चंद्र को अर्घ्य देते हैं और उनके वैदिक मंत्रों का जाप करते हैं। यह खास दिन दान-पुण्य के लिए भी फलदायी माना जाता है। पूर्णिमा के दिन ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्र दान करना चाहिए। इस दिन भक्त सत्यनारायण व्रत रखते हैं और उनकी पूजा करते हैं। पूर्णिमा का दिन बहुत खास माना जाता है, क्योंकि चंद्रमा की रोशनी सीधी धरती पर पड़ती है, जिससे घर में समृद्धि और खुशहाली आती है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना चाहिए और वस्त्रों का दान करना चाहिए।

– डॉ. अनिश व्यास

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भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक

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