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अक्षय तृतीया 2026: अक्षय तृतीया पर किया गया दान अधिक फल देता है

अक्षय तृतीया को आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है। भारत में अक्षय तृतीया सनातन धर्म का बहुत ही पवित्र, शुभ और पुण्यदायी पर्व है और इस दिन को अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, तो आइए हम आपको अक्षय तृतीया के महत्व और पूजा विधि के बारे में बताते हैं।

जानिए अक्षय तृतीया के बारे में

सनातन परंपरा में अक्षय तृतीया उन त्योहारों में से एक है जो जीवन दर्शन का जीवंत संदेश देता है। अक्षय तृतीया को आखा तीज या अक्ती तीज के नाम से जाना जाता है। इस पर्व में अक्षय शब्द का अर्थ है जिसका कभी क्षय नहीं होता अर्थात जो सदैव रहता है, जो अनंत है। इसलिए इस दिन किया गया जप, तप, दान, सेवा, हवन या कोई भी शुभ कार्य अनंत फल प्रदान करने वाला माना जाता है। अक्षय तृतीया को हिंदू धर्म में बहुत ही शुभ और मंगलकारी त्योहार माना जाता है। पंडितों के अनुसार इस दिन किया गया दान, जप, तप और खरीदारी कभी व्यर्थ नहीं जाती, बल्कि उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को अक्षय तृतीया कहा जाता है। इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कभी समाप्त नहीं होता। यही कारण है कि इसे अत्यंत शुभ और मंगलकारी मुहुर्त माना जाता है। अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है क्योंकि सोना धन, समृद्धि और स्थायी संपत्ति का प्रतीक माना जाता है। पंडितों के अनुसार इस दिन खरीदा गया सोना परिवार में सुख-समृद्धि और आर्थिक मजबूती लाता है।

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अक्षय तृतीया का विशेष पौराणिक महत्व भी है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन कई दैवीय घटनाओं से जुड़ा है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु ने परशुराम के रूप में अवतार लिया था, इसलिए इसे परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। त्रेतायुग का आरंभ भी इसी तिथि से माना जाता है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। इसी दिन चारधाम धामों में से एक श्री बद्रीनाथ के कपाट भी खुलते हैं। अक्षय शब्द का अर्थ है जिसका कभी अंत न हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए दान, जप, तप और पुण्य कर्मों का फल कभी खत्म नहीं होता, बल्कि लगातार बढ़ता रहता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। विशेषकर जल, सत्तू, वस्त्र और अन्न का दान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। इस दिन पितरों के लिए किए गए कर्म भी अक्षय फल प्रदान करते हैं।

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अक्षय तृतीया पर ऐसे करें पूजा, मिलेगा लाभ

पंडितों के अनुसार अक्षय तृतीया का दिन बहुत खास होता है इसलिए इस दिन पुण्य कर्म करें। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर समुद्र, गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही स्नान करके शांत मन से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करनी चाहिए। इस दिन लक्ष्मी-नारायण की पूजा सफेद या पीले कमल या गुलाब के फूलों से करना शुभ माना जाता है। नैवेद्य में गेहूं, जौ, चने का सत्तू, मिश्री, नीम के पत्ते, ककड़ी और भीगी हुई चने की दाल चढ़ाई जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सत्तू का सेवन अवश्य करना चाहिए, क्योंकि यह शरीर को ठंडक प्रदान करता है और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद होता है।

जानिए अक्षय तृतीया का शुभ मुहूर्त

पंडितों के मुताबिक, तृतीया तिथि 19 अप्रैल को सुबह 10:49 बजे से शुरू होगी और 20 अप्रैल को सुबह 07:27 बजे तक रहेगी. चूंकि 20 अप्रैल को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि मौजूद है, इसलिए इस दिन व्रत, दान और पूजा करना अधिक शुभ रहेगा.

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पूजा और खरीदारी के लिए शुभ समय का भी ध्यान रखें

अक्षय तृतीया पर खरीदारी के लिए ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:10 बजे से 04:54 बजे तक और पूजा मुहूर्त सुबह 05:25 बजे से 07:27 बजे तक है। सोना खरीदने के लिए सूर्योदय से सुबह 07:27 बजे तक का समय विशेष रूप से शुभ है, हालांकि अक्षय तृतीया का पूरा दिन शुभ कार्यों के लिए अनुकूल रहेगा।

अक्षय तृतीया पर दान का विशेष महत्व है।

अक्षय तृतीया के दिन गंगा स्नान, जप, तप, हवन और दान का विशेष महत्व है। बिहार में सत्तू, गुड़, मिट्टी का बर्तन, पंखा और फल दान करने की परंपरा है. मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन किया गया दान व्यक्ति के संचित पापों को नष्ट कर देता है।

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अक्षय तृतीयां दानं, पुण्यं च न क्षीयते।

अर्थात अक्षय तृतीया के दिन किया गया दान और अर्जित पुण्य कभी समाप्त नहीं होता। सनातन परंपरा में माना जाता है कि इस दिन दान करने से धन की हानि नहीं होती बल्कि दान करने से धन में वृद्धि होती है।

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अक्षय तृतीया पर अन्न दान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों में अन्नदानं परम दानम् अर्थात भोजन को परब्रह्म कहा गया है। अक्षय तृतीया के दिन किसी भूखे व्यक्ति को भोजन कराना नारायण की सेवा करने के समान है। गर्मी का मौसम शुरू होने के कारण इस दिन सत्तू, गुड़ और ठंडे जल के दान का विशेष महत्व है। इस दिन जल दान करने का भी विशेष महत्व है। प्यासे को पानी पिलाना मानवता का सबसे बड़ा कार्य है। इस दिन मिट्टी के घड़े में जल भरकर दान करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है।

दान में अन्य वस्तुओं का भी विशेष महत्व है

पंडितों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन गरीबों को तन ढकने के लिए वस्त्र दान करें। आध्यात्मिक उन्नति के लिए ब्राह्मणों को गाय का दान करना सर्वोत्तम माना जाता है। इस चिलचिलाती गर्मी में राहगीरों को जूते या चप्पल का दान करना बेहद पुण्यकारी होता है। साक्षय तृतीया पर दान करना सिर्फ किसी वस्तु का त्याग नहीं है, बल्कि अहंकार का विसर्जन है। यह आत्मा को शुद्ध कर कर्मों की शृंखला में ऐसे बीज बोता है, जिनका फल जन्म-जन्मान्तर तक अक्षय रहता है।

अक्षय तृतीया की पौराणिक उत्पत्ति भी दिलचस्प है

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह तिथि कालचक्र परिवर्तन की साक्षी है। पौराणिक कथाओं और इतिहास के अनुसार आज ही के दिन ये घटनाएं घटी थीं.

युगादि तिथि: हिन्दू काल गणना के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन सत्ययुग का अंत हुआ और त्रेतायुग का प्रारम्भ हुआ।

परशुराम जयंती: भगवान विष्णु के छठे अवतार, शस्त्र एवं शास्त्र के विशेषज्ञ भगवान परशुराम का अवतरण इसी तिथि को हुआ था।

गंगा अवतरण: भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर इसी दिन माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं, जिससे सभी प्राणियों का उद्धार संभव हुआ।

अक्षय पात्र की प्राप्ति: महाभारत काल में पांडवों के वनवास के दौरान सूर्यदेव ने उन्हें अक्षय पात्र प्रदान किया था, जिससे उन्हें कभी भोजन की कमी नहीं हुई।

सुदामा और कृष्ण का मिलन: इसी तिथि पर द्वारकाधीश श्रीकृष्ण ने अपने परम मित्र सुदामा की दरिद्रता का नाश किया था।

अक्षय तृतीया पर करें ये उपाय, लाभ होगा

पंडितों के अनुसार इस पवित्र दिन पर विशेष रूप से ये धार्मिक कार्य किए जाते हैं, इन कार्यों को करने से भक्तों को बहुत लाभ मिलता है।

इस दिन श्री लक्ष्मीनारायण की विधिपूर्वक पूजा करें।

धन के देवता कुबेर की पूजा करें।

गंगा या अन्य पवित्र तीर्थस्थानों पर स्नान करें।

हवन करें और वेदों का स्वाध्याय करें।

सोना, आभूषण या सिक्के खरीदें।

विवाह, गृहप्रवेश आदि शुभ कार्य करें।

ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को दान दें।

-प्रज्ञा पांडे

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