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रसोई गैस सिलेंडर की कीमत: आम आदमी को बड़ा झटका, जानें 60 रुपये की बढ़ोतरी का असली कारण

 

 

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स्थान: नई दिल्ली | प्रकाशित: 07 मार्च 2026

 

रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में हाल ही में हुई 60 रुपये की बढ़ोतरी ने आम उपभोक्ताओं का बजट बिगाड़ दिया है। हालांकि, सरकारी सूत्रों ने इस मूल्य वृद्धि के पीछे का ठोस तर्क पेश किया है। देश में एलपीजी आयात के लिए प्राथमिक बेंचमार्क माने जाने वाले सऊदी अनुबंध मूल्य (Saudi Contract Price – CP) में पिछले कुछ महीनों में भारी उछाल आया है, जिसके कारण घरेलू बाजार में यह समायोजन करना आवश्यक हो गया था।

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रसोई गैस सिलेंडर की कीमत: 60 रुपये की वृद्धि पर सरकार का गणित

एनडीटीवी लाभ से बात करते हुए सरकारी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में गैस सिलेंडर के दामों में मात्र 110 रुपये का ही इजाफा हुआ है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “औसतन एक एलपीजी सिलेंडर एक परिवार के लिए लगभग तीन महीने तक चलता है। अगर हम इस 60 रुपये की बढ़ोतरी का गणित समझें, तो चार सदस्यों वाले परिवार के लिए यह खर्च प्रति व्यक्ति प्रतिदिन सिर्फ 20 पैसे बढ़ता है।” इस दृष्टिकोण से सरकार इसे एक मामूली वृद्धि मान रही है।

उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों पर रसोई गैस सिलेंडर की कीमत का कोई असर नहीं

राहत की बात यह है कि समाज के सबसे कमजोर वर्गों को इस महंगाई से पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। रसोई गैस सिलेंडर की कीमत में हुई इस 60 रुपये की वृद्धि का असर ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ (PMUY) के लाभार्थियों पर नहीं पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार, सरकार इन उपभोक्ताओं के लिए अतिरिक्त 60 रुपये का बोझ खुद उठाएगी। यहां तक कि गैर-उज्ज्वला उपभोक्ताओं को भी सिलेंडर खुले बाजार मूल्य से कम दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

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रसोई गैस सिलेंडर की कीमत के बाद क्या पेट्रोल-डीजल के दाम भी बढ़ेंगे?

अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार अस्थिर बनी हुई हैं। ऐसे में यह अटकलें तेज थीं कि रसोई गैस सिलेंडर की कीमत के साथ-साथ पेट्रोल और डीजल के दाम भी बढ़ाए जाएंगे। लेकिन, सरकारी सूत्रों ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसने आम जनता को राहत देने के लिए पेट्रोल और डीजल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में तीन बार कटौती की है। आज भी भारत में खुदरा ईंधन की कीमतें कई यूरोपीय और पड़ोसी देशों की तुलना में काफी सस्ती हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी आश्वस्त किया है कि आपूर्ति श्रृंखला (खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य) में व्यवधान के बावजूद भारत में ऊर्जा की कोई कमी नहीं है।

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रूस से तेल आयात पर भारत का स्पष्ट रुख

भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बार फिर स्वतंत्र रुख अपनाया है। हाल ही में अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की छूट देने की बात कही थी। इसके जवाब में केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सबसे किफायती स्रोत से कच्चा तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है और इसके लिए उसे किसी भी देश की “अनुमति” की आवश्यकता नहीं है।

सरकार ने कहा, “भारत कभी भी रूसी तेल खरीदने के लिए किसी की अनुमति पर निर्भर नहीं रहा है। फरवरी 2026 में भी हम रूस से तेल आयात कर रहे हैं, जो भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। साल 2022 से शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी हमने रियायती कीमतों पर तेल खरीदा है, जिससे देश को आर्थिक फायदा हुआ है।”

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