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ब्लड प्रेशर: बच्चे और युवा हैं हाई बीपी का नया निशाना, हार्ट अटैक से बचना है तो उम्र के हिसाब से जानें सही रीडिंग

अगर आप भी अपने शरीर को स्वस्थ रखना चाहते हैं तो जरूरी है कि आप ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर दोनों को नियंत्रण में रखें। क्योंकि ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर बढ़ने से कई समस्याएं हो सकती हैं। जिन लोगों को अक्सर हाई बीपी रहता है उन्हें नसों, आंखों और किडनी से जुड़ी समस्याएं होने का खतरा रहता है। साथ ही इससे हार्ट अटैक और हार्ट स्ट्रोक जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ हाई बीपी को ‘साइलेंट किलर’ भी कहते हैं। क्योंकि इसके लक्षण लंबे समय तक सामने नहीं आते हैं। यह शरीर के कई हिस्सों को अंदरूनी तौर पर नुकसान पहुंचाता है। गलत खान-पान, जीवनशैली में गड़बड़ी, शारीरिक गतिविधियों की कमी, तनाव और नींद की अनियमितता के कारण हाई बीपी की समस्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में आज इस लेख के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि बीपी की सामान्य सीमा क्या होनी चाहिए और आपको कब सावधान रहने की जरूरत है।

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उच्च रक्तचाप की समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बीपी वह दबाव है जो रक्त परिसंचरण के दौरान हमारी रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर पड़ता है। समस्या यह है कि ज्यादातर मामलों में व्यक्ति को तब तक समस्या का एहसास नहीं होता जब तक कोई गंभीर समस्या उत्पन्न न हो जाए।

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साथ ही समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना चाहिए और इस पर नियंत्रण के उपाय करने चाहिए। ताकि हृदय, मस्तिष्क, आंखों और किडनी को स्थायी नुकसान से बचाया जा सके।

नियमित अंतराल पर अपना बीपी जांचते रहें। ऐसे में आइए जानते हैं इसकी रीडिंग क्या होनी चाहिए।

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बीपी रीडिंग कितनी होनी चाहिए?

आपको बता दें कि 18 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए सामान्य बीपी 120/80 mmHg माना जाता है।

5 से 12 वर्ष की आयु के छोटे बच्चों का बीपी लगभग 90/60 से 110/70 mmHg होना चाहिए।

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बच्चों में बीपी लंबाई, उम्र और वजन पर निर्भर करता है।

इसी तरह, वयस्कों की शारीरिक स्थिति और वजन के अनुसार रक्तचाप की रीडिंग भिन्न हो सकती है।

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यदि इससे अधिक रीडिंग लंबे समय तक बनी रहती है, तो आपको निश्चित रूप से डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।

बच्चों का बीपी जांचना क्यों जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने एक अध्ययन में पाया कि बढ़ती उम्र के साथ दिल की बीमारियों की समस्या से बचने के लिए बच्चों का नियमित रूप से बीपी जांचना जरूरी है।

एक नए अध्ययन में पाया गया है कि 10 साल से कम उम्र के बच्चों में भी उच्च रक्तचाप के मामले बढ़ रहे हैं। 7 साल के बच्चों में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या थी. इनमें 50 वर्ष की आयु तक हृदय रोगों से मृत्यु का जोखिम 50% तक अधिक था। यानी अगर कम उम्र से ही ब्लड प्रेशर पर ध्यान दिया जाए तो यह भविष्य में दिल से जुड़े खतरों को कम करने में मददगार हो सकता है।

अस्वीकरण: इस लेख में दिए गए सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। इन युक्तियों और सूचनाओं को किसी डॉक्टर या चिकित्सा पेशेवर की सलाह के रूप में न लें। किसी भी बीमारी के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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