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आज का सुविचार: चार्ल्स डिकेंस और मौन प्रेम की गहराई

आज का सुविचार: चार्ल्स डिकेंस और मौन प्रेम की गहराई

चार्ल्स डिकेंस का उस दिन का उद्धरण: ‘वे प्यार में और भी गहरे डूबते चले गए…’

19वीं सदी के अंग्रेजी साहित्य के सबसे चमकते सितारों में से एक, चार्ल्स डिकेंस, न केवल अपनी कहानियों के लिए जाने जाते हैं, बल्कि अपने समय की सामाजिक और आर्थिक विषमताओं पर तीखा प्रहार करने के लिए भी प्रसिद्ध हैं। आज हम उनकी एक कालजयी रचना और उसके मर्म को समझने का प्रयास करेंगे।

अनमोल वचन

“वे प्रेम की गहराई में और भी गहरे उतरते चले गए, फिर भी होंठ सिले रहे। हर एक ने संकोच और लज्जा में यही माना कि यह प्रेम दुनिया का सबसे गहरा रहस्य था।”

चार्ल्स डिकेंस (उपन्यास: ब्लि‍क हाउस)


इस उद्धरण का मर्म

यह मार्मिक पंक्ति डिकेंस के प्रसिद्ध उपन्यास ‘ब्लि‍क हाउस’ (Bleak House) से ली गई है। यह उपन्यास के दो मुख्य पात्रों—एस्थर समरसन और डॉ. एलन वुडकोर्ट—के बीच पनपते हुए मूक प्रेम का वर्णन करती है।

यहाँ डिकेंस प्रेम की उस नाज़ुक अवस्था को दर्शाते हैं जहाँ दो दिल एक-दूसरे के लिए धड़कते तो हैं, लेकिन खामोश रहते हैं। वे अपनी भावनाओं को एक-दूसरे से छिपाते हैं, यह सोचते हुए कि शायद सामने वाला इस बात से अनजान है। यह ‘रहस्य’ उनके प्रेम को और भी पवित्र और गहरा बना देता है।


उपन्यास: ‘ब्लि‍क हाउस’ (Bleak House) एक नज़र में

  • प्रकाशन: यह उपन्यास पहली बार मार्च 1852 से सितंबर 1853 के बीच 20 किस्तों (Serialised) में प्रकाशित हुआ था।

  • कहानी की शैली: यह उपन्यास अपनी अनूठी कथा शैली के लिए जाना जाता है। इसका आधा हिस्सा नायिका ‘एस्थर समरसन’ की नज़र से और बाकी हिस्सा एक ‘सर्वज्ञ कथावाचक’ (Omniscient narrator) द्वारा सुनाया गया है।

  • मुख्य विषय: कहानी के केंद्र में ‘जार्नडाइस बनाम जार्नडाइस’ (Jarndyce and Jarndyce) का एक लंबा और पेचीदा कानूनी मुकदमा है। यह मामला एक वसीयत को लेकर है जो पीढ़ियों से अदालत में लटका हुआ है।

  • सामाजिक व्यंग्य: इस कहानी के माध्यम से डिकेंस ने तत्कालीन ‘चांसरी कोर्ट’ (Chancery Court) प्रणाली की धज्जियाँ उड़ाई थीं। उन्होंने दिखाया कि कैसे न्याय में देरी और कानूनी दांव-पेच आम आदमी के जीवन को बर्बाद कर देते हैं।


लेखक परिचय: चार्ल्स डिकेंस कौन थे?

चार्ल्स जॉन हफम डिकेंस एक महान अंग्रेजी उपन्यासकार होने के साथ-साथ एक सजग पत्रकार और सामाजिक आलोचक भी थे। उनके काल्पनिक पात्र आज भी साहित्य की दुनिया में अमर हैं।

  • संघर्षपूर्ण बचपन: डिकेंस का जीवन आसान नहीं था। जब वे मात्र 12 वर्ष के थे, उनके पिता को कर्ज न चुका पाने के कारण जेल जाना पड़ा। परिवार का पेट भरने के लिए नन्हे चार्ल्स को स्कूल छोड़कर एक बूट-पॉलिश फैक्ट्री में मजदूरी करनी पड़ी। इसी संघर्ष ने उन्हें गरीबों और मजदूरों के दर्द को समझने की दृष्टि दी।

  • करियर: बाद में उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और पत्रकारिता से अपने लेखन करियर की शुरुआत की। उन्होंने 20 वर्षों तक एक साप्ताहिक पत्रिका का संपादन किया।

  • साहित्यिक योगदान: अपने जीवनकाल में उन्होंने 15 उपन्यास, सैकड़ों लघुकथाएँ और कई लेख लिखे।

उनकी कुछ अमर रचनाएँ:

  • ओलिवर ट्विस्ट (Oliver Twist)

  • डेविड कॉपरफील्ड (David Copperfield)

  • ए क्रिसमस कैरोल (A Christmas Carol)

  • अ टेल ऑफ़ टू सिटीज़ (A Tale of Two Cities)

  • ग्रेट एक्सपेक्टेशंस (Great Expectations)

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