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केंद्रीय बजट 2024 का विश्लेषण: बुनियादी ढांचे पर जोर और सामाजिक क्षेत्र का चौंकाने वाला सच

केंद्रीय बजट 2024 का विश्लेषण करते हुए, यह स्पष्ट हो जाता है कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया गया नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला बजट कई मायनों में ऐतिहासिक और दिशा-निर्धारक है। मंगलवार को पेश किए गए इस बजट के आंकड़ों की गहराई में जाने पर एक मिश्रित तस्वीर सामने आती है—जहाँ एक तरफ बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च में भारी वृद्धि देखी गई है, वहीं दूसरी तरफ शिक्षा, पेंशन और स्वास्थ्य जैसी प्रमुख सामाजिक योजनाओं का बजट या तो स्थिर हो गया है या उसमें गिरावट दर्ज की गई है।

केंद्रीय बजट 2024 का विश्लेषण: ब्याज भुगतान और आर्थिक आवंटन

बजट दस्तावेजों के अनुसार, इस साल भी सरकारी खजाने का सबसे बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान में जा रहा है। कुल बजट में ब्याज भुगतान के लिए 11,62,940 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

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  • ब्याज का बोझ: वित्त वर्ष 25BE (Budget Estimates) के कुल बजट के हिस्से के रूप में यह 24.12% है, जो पिछले वित्त वर्ष (FY24RE) की तुलना में 0.62 प्रतिशत अधिक है।
  • परिवहन क्षेत्र का दबदबा: ब्याज के बाद, परिवहन क्षेत्र ने 11.29% के साथ व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा प्राप्त किया है। हालाँकि, यह पिछले वर्ष की तुलना में 0.4% कम है, फिर भी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MORTH) का आवंटन लगातार उच्च बना हुआ है।

केंद्रीय बजट 2024 का विश्लेषण: कृषि और रक्षा क्षेत्र के लिए निराशाजनक संकेत

इस बजट में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय कृषि और रक्षा क्षेत्र का आवंटन रहा है। विशेषज्ञ इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देख रहे हैं:

  • कृषि क्षेत्र की स्थिति: कृषि के लिए आवंटन कुल बजट के लगभग 3.1% पर स्थिर हो गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) जैसी अहम योजनाओं के आवंटन में कुल बजट के हिस्से के रूप में कमी आई है।
  • रक्षा बजट में कटौती: कुल बजट में रक्षा व्यय का हिस्सा घटकर 9.43% रह गया है। यह आंकड़ा पिछले कम से कम नौ वर्षों में सबसे कम है। निरपेक्ष रूप से भी इस बार रक्षा व्यय में कमी दर्ज की गई है, जो सामरिक दृष्टिकोण से एक चौंकाने वाला कदम है।

केंद्रीय बजट 2024 का विश्लेषण: सामाजिक क्षेत्र और कल्याणकारी योजनाएं

अगर हम सामाजिक विकास की बात करें, तो केंद्रीय बजट 2024 का विश्लेषण एक चिंताजनक पैटर्न दिखाता है। कुल बजट के हिस्से के रूप में स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और शिक्षा के लिए आवंटन कम हुआ है।

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मनरेगा (MGNREGA), समग्र शिक्षा, आयुष्मान भारत, वृद्धावस्था पेंशन और विधवा पेंशन जैसी अहम योजनाओं के आवंटन में कटौती या ठहराव देखा गया है। वित्त वर्ष 23 में भारी वृद्धि देखने के बाद, आयुष्मान भारत का बजट इस बार कमोबेश स्थिर रहा है। हालाँकि, सामाजिक कल्याण (Social Welfare) एकमात्र ऐसा क्षेत्र रहा, जिसका हिस्सा बढ़कर 1.17% हो गया है।

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केंद्रीय बजट 2024 का विश्लेषण: रेलवे, दूरसंचार और बुनियादी ढांचे में निवेश

सरकार का मुख्य फोकस देश के आधुनिकीकरण पर है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में आवास परियोजनाओं (Housing) के लिए परिव्यय में मामूली सुधार हुआ है, हालांकि स्मार्ट सिटी मिशन का आवंटन गिरा है।

  • रेल मंत्रालय: वित्त वर्ष 25BE में रेल मंत्रालय का हिस्सा कुल बजट के 5% से अधिक रहा। सबसे सकारात्मक खबर यह है कि ‘कवच’ (स्वचालित ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली) और सिग्नलिंग कार्यों के लिए आवंटन बढ़ाया गया है, जिससे रेल सुरक्षा मजबूत होगी।
  • विज्ञान और अंतरिक्ष: अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए योजनाएं स्थिर हैं, लेकिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय का हिस्सा थोड़ा सुधरकर 0.17% हो गया है। विमानन मंत्रालय के बजट में मामूली गिरावट दर्ज की गई है।

निष्कर्ष के तौर पर, यह बजट ‘पूंजीगत व्यय’ (Capital Expenditure) के जरिए विकास को गति देने की सरकार की मंशा को दर्शाता है, लेकिन आम आदमी से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं पर कम ध्यान देना अर्थशास्त्रियों के बीच बहस का विषय बन गया है।

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