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लेबनान में भारतीय शांति सैनिक: खतरनाक युद्ध के बीच हिजबुल्लाह की कड़ी निंदा, भारत का सख्त कदम

लेबनान में भारतीय शांति सैनिक: खतरनाक युद्ध के बीच हिजबुल्लाह की कड़ी निंदा, भारत का सख्त कदम
लेबनान में भारतीय शांति सैनिक (Indian peacekeepers in Lebanon) वर्तमान में एक अभूतपूर्व और खतरनाक स्थिति का सामना कर रहे हैं। बुधवार, 11 मार्च 2026 को भारत ने संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) में सैन्य योगदान देने वाले 30 अन्य देशों के साथ मिलकर एक बड़ा और सख्त कदम उठाया। इन राष्ट्रों ने लेबनान में बढ़ती शत्रुता पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए, इज़राइल के खिलाफ हालिया ईरानी हमलों में शामिल होने के लिए हिजबुल्लाह के “लापरवाह फैसले” की कड़ी निंदा की है।भारत उन 50 प्रमुख देशों में से एक है जो लेबनान में शांति बनाए रखने के लिए अपने बहादुर सैनिकों का योगदान देता है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में, वैश्विक मंच पर भारत की यह प्रतिक्रिया उसके जवानों की सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है.

लेबनान में भारतीय शांति सैनिक और UNIFIL का बढ़ता महत्व

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पार्वथनेनी हरीश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक कड़ा और स्पष्ट संदेश साझा किया। उन्होंने कहा, “आज मैं #UNIFIL में शांति सैनिकों के रूप में तैनात बहादुर महिलाओं और पुरुषों के प्रति अपना पूर्ण समर्थन प्रदर्शित करने के लिए हमारे वैश्विक सहयोगियों के साथ खड़ा हूं, क्योंकि वे लगातार बढ़ते खतरों और चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।”

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उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लेबनान में भारतीय शांति सैनिक UNIFIL के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता निभा रहे हैं। इस भयानक और चुनौतीपूर्ण समय के बावजूद, हमारे सैनिक न केवल अपने अनिवार्य कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय लेबनानी आबादी को आवश्यक सहायता भी प्रदान कर रहे हैं।

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शांति सैनिकों पर हमला बर्दाश्त नहीं: UNSC प्रस्ताव 2589

राजदूत हरीश ने स्पष्ट किया, “हम संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर किसी भी प्रकार के हमले के सख्त खिलाफ हैं। ऐसे किसी भी हमले का कोई औचित्य नहीं हो सकता।” उन्होंने अगस्त 2021 में भारत की अध्यक्षता के दौरान पारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्ताव 2589 का भी हवाला दिया। यह ऐतिहासिक प्रस्ताव शांति सैनिकों के खिलाफ हिंसा के लिए जवाबदेही तय करने और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने का आह्वान करता है।

“आज मैं शांतिरक्षकों के रूप में तैनात बहादुर महिलाओं और पुरुषों के प्रति अपना समर्थन दिखाने में अपने सहयोगियों के साथ शामिल हूं। #UNIFIL के प्रति दीर्घकालिक प्रतिबद्धता वाले भारतीय शांतिरक्षक अपने अधिदेश को लागू करना जारी रख रहे हैं।” – पार्वथनेनी हरीश (11 मार्च 2026)

लेबनान में भारतीय शांति सैनिक: 30 देशों के संयुक्त बयान के मुख्य बिंदु

संयुक्त राष्ट्र में फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत जेरोम बोनाफोंट ने भारत, इटली, स्पेन, जर्मनी, दक्षिण कोरिया सहित 30 देशों की ओर से एक संयुक्त बयान पढ़ा। इस बयान में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बातों पर जोर दिया गया:

  • तत्काल संघर्ष विराम की अपील: सभी पक्षों से शत्रुता के समाधान पर तुरंत लौटने का आग्रह किया गया।
  • लेबनान की संप्रभुता का समर्थन: युद्ध की इस स्थिति में लेबनान और उसके नागरिकों का समर्थन करने की प्रतिबद्धता जताई गई।
  • हिजबुल्लाह की निंदा: 2 मार्च, 2026 से इज़राइल के खिलाफ हमलों में शामिल होने के हिजबुल्लाह के फैसले की कड़ी निंदा की गई, जिसने लेबनान को एक अनचाहे युद्ध में धकेल दिया है।
  • नागरिक सुरक्षा: इज़राइल और अन्य पक्षों से नागरिक बुनियादी ढांचे और घनी आबादी वाले क्षेत्रों पर हमलों से बचने की सख्त अपील की गई।

UNIFIL पर हमलों की निंदा और मानवीय संकट

इस खतरनाक संघर्ष के कारण, इज़रायली निकासी आदेश के बाद लेबनान में लगभग दस लाख नागरिक अपने घर छोड़कर भागने को मजबूर हुए हैं। संयुक्त बयान में विस्थापित आबादी की मदद के लिए लेबनान सरकार और अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के प्रयासों का भी समर्थन किया गया।

इसके साथ ही, पिछले सप्ताह दक्षिण-पश्चिम लेबनान स्थित बेस पर UNIFIL के घाना दल पर हुए हमले की कड़ी निंदा की गई। बयान में साफ कहा गया कि लेबनान में भारतीय शांति सैनिक सहित सभी UNIFIL कर्मियों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सुनिश्चित की जानी चाहिए। शांति सैनिकों को कभी भी युद्ध का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।

📊 UNIFIL में भारत का योगदान (फरवरी 2026 तक के आंकड़े)

वर्तमान में UNIFIL बल में 48 सैन्य योगदान देने वाले देशों के कुल 7,538 शांति सैनिक शामिल हैं। इनमें भारत के 642 कर्मी तैनात हैं, जो इटली (784), इंडोनेशिया (756) और स्पेन (660) के बाद इस शांति मिशन में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा दल है। यह आंकड़े वैश्विक शांति में भारत की अग्रणी भूमिका को प्रमाणित करते हैं।

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