टेक्नोलॉजी

दूरसंचार क्षेत्र में बड़ा बदलाव: ट्राई (TRAI) ने की नई स्पेक्ट्रम नीलामी की सिफारिश, जानें 5G विस्तार और नए खिलाड़ियों के लिए क्या हैं अहम प्रस्ताव

ट्राई ने पूरे स्पेक्ट्रम की नीलामी की सिफारिश की, प्रवेश बाधाओं को कम करने और 35% सीमा का प्रस्ताव दिया

नई दिल्ली: भारत में 5G नेटवर्क के विस्तार और डिजिटल कनेक्टिविटी को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने मंगलवार को आगामी स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए अपनी व्यापक सिफारिशें जारी की हैं। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य दूरसंचार क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बनाए रखना, नए खिलाड़ियों (New Entrants) के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करना और देश के दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क पहुंचाना है।

हालांकि ट्राई ने आधिकारिक तौर पर पूरे स्पेक्ट्रम के संयुक्त आधार मूल्य (Base Price) का खुलासा नहीं किया है, लेकिन उद्योग जगत के अनुमानों के अनुसार, यदि सभी बैंड (600 मेगाहर्ट्ज को छोड़कर) में उपलब्ध पूरा स्पेक्ट्रम बिक जाता है, तो आरक्षित मूल्य पर सरकार को लगभग 81,000 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो सकता है।


सिफारिशों के मुख्य अंश और उद्योग पर उनका प्रभाव

1. नए खिलाड़ियों के लिए आसान प्रवेश (Lower Entry Barriers)

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दूरसंचार क्षेत्र में एकाधिकार को रोकने और नए ऑपरेटरों को प्रोत्साहित करने के लिए ट्राई ने वित्तीय शर्तों में बड़ी राहत देने का प्रस्ताव रखा है:

2. स्पेक्ट्रम की कीमत, वैधता और 35% कैपिंग (Pricing & Spectrum Cap)

  • रिजर्व प्राइस का निर्धारण: अधिकांश सेवा क्षेत्रों और बैंड संयोजनों के लिए आरक्षित कीमतें 2022 की नीलामी के स्तर से कम रखी गई हैं। पिछले दौर में बिना बिके रह गए स्पेक्ट्रम के लिए आरक्षित मूल्य अंतिम बार खोजी गई कीमत का 60 प्रतिशत तय किया गया है।

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  • 20 साल की वैधता: अंतर्राष्ट्रीय मोबाइल दूरसंचार (IMT) के लिए पहचाने गए स्पेक्ट्रम की नीलामी टेलीकॉम सर्कल/मेट्रो क्षेत्र के आधार पर 20 साल की वैधता अवधि के साथ की जाएगी।

  • एक समान 35% स्पेक्ट्रम कैप: निम्न, मध्य और उच्च-आवृत्ति बैंड (600 MHz से लेकर 37-40 GHz तक) में 35 प्रतिशत की एक समान स्पेक्ट्रम सीमा (Cap) की सिफारिश की गई है। यदि किसी ऑपरेटर के पास पहले से ही इस सीमा से अधिक स्पेक्ट्रम है, तो उसे अपना मौजूदा स्पेक्ट्रम सरेंडर करने की आवश्यकता नहीं होगी।

3. 600 मेगाहर्ट्ज और 6 गीगाहर्ट्ज बैंड के लिए विशेष प्रावधान

  • 600 MHz बैंड में अतिरिक्त राहत: इस बैंड की बिक्री को आकर्षक बनाने के लिए ट्राई ने इसकी वैधता 20 के बजाय 24 साल तक बढ़ाने का सुझाव दिया है। साथ ही, भुगतान और नेटवर्क रोलआउट दायित्वों (Rollout Obligations) में चार साल की मोहलत (Moratorium) का प्रस्ताव भी रखा गया है।

  • अपर 6 GHz बैंड की अभी नीलामी नहीं: 6425-7125 मेगाहर्ट्ज बैंड को IMT (मोबाइल सेवाओं) के लिए आरक्षित तो किया गया है, लेकिन उपग्रह अपलिंक स्टेशनों के साथ किसी भी तरह के तकनीकी हस्तक्षेप को रोकने के लिए इसकी तत्काल नीलामी नहीं होगी। दूरसंचार विभाग पहले इसका तकनीकी परीक्षण करेगा।


डिजिटल डिवाइड खत्म करने की अनूठी पहल: ‘कवरेज-फॉर-डिस्काउंट’ योजना

भारत के ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में डिजिटल डिवाइड को पाटने के लिए ट्राई ने एक बेहद इनोवेटिव “कवरेज-फॉर-डिस्काउंट” योजना का प्रस्ताव दिया है। यह योजना दूरसंचार कंपनियों को उन क्षेत्रों में जाने के लिए प्रेरित करेगी जहां अभी तक नेटवर्क नहीं पहुंचा है।

  • 10% तक की भारी छूट: इस योजना के तहत सफल बोलीदाता अपनी स्पेक्ट्रम नीलामी लागत का 10 प्रतिशत तक वापस पा सकते हैं (भरपाई कर सकते हैं)।

  • शर्त: इसके लिए उन्हें सरकार द्वारा पहचाने गए ‘कवरेज अंतराल’ (Coverage Holes) वाले क्षेत्रों में एक वर्ष के भीतर 4G या 5G बेस स्टेशन स्थापित करके सेवाएं शुरू करनी होंगी।

  • इन्फ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग: इस योजना के तहत बनाए गए मोबाइल टावरों को प्रतिस्पर्धी ऑपरेटरों के साथ उचित मूल्य पर साझा करना अनिवार्य होगा, ताकि ग्राहकों को एक से अधिक नेटवर्क का विकल्प मिल सके।

प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए अन्य रणनीतिक कदम

बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए ट्राई ने हर तीन साल में एक नए स्पेक्ट्रम मूल्यांकन अभ्यास की सिफारिश की है। इसके अतिरिक्त, एक अलग ‘थोक एक्सेस नेटवर्क प्रदाता प्राधिकरण’ पर विचार करने और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (ISP) व कैप्टिव नेटवर्क के लिए कुछ विशिष्ट TDD स्पेक्ट्रम अलग रखने का भी सुझाव दिया गया है।

कुल मिलाकर, ट्राई की ये सिफारिशें अगली बड़ी स्पेक्ट्रम बिक्री का मार्ग प्रशस्त करती हैं, जो भारत को वैश्विक 5G परिदृश्य में एक मजबूत स्थिति में ला खड़ा करेंगी।

 

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