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डेविस कप: नीदरलैंड को हराकर 15 साल बाद विश्व ग्रुप में भारत की ऐतिहासिक और जबरदस्त वापसी

नीदरलैंड के खिलाफ डेविस कप मुकाबला जीतने के बाद दक्षिणेश्वर सुरेश भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ा सितारा बन गए हैं। | फोटो साभार: के. मुरली कुमार

डेविस कप के इतिहास में 15 साल के लंबे और थकाऊ इंतज़ार के बाद, भारतीय टेनिस टीम ने एक बार फिर से वैश्विक स्तर पर अपनी बादशाहत साबित कर दी है। आखिरी बार साल 2011 में भारत डेविस कप में विश्व के शीर्ष 16 देशों (विश्व ग्रुप) में शामिल हुआ था। रविवार को बेंगलुरु के एसएम कृष्णा टेनिस स्टेडियम में खेले गए क्वालीफायर के पहले दौर में, भारतीय टीम ने नीदरलैंड को 3-2 से हराकर इस उच्च तालिका में अपनी गौरवपूर्ण वापसी दर्ज की है।

यह जीत सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि भारतीय टेनिस के लिए एक पुनर्जागरण है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही भारत अब सितंबर में होने वाले क्वालीफायर के दूसरे दौर के 14 देशों में शामिल हो गया है। वहां उसका सामना दक्षिण कोरिया से होने की प्रबल संभावना है। उस दौर की शीर्ष सात टीमें सीधे डेविस कप के ग्रैंड फिनाले में प्रवेश करेंगी, जिसकी मेजबानी इटली करेगा।

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डेविस कप में दक्षिणेश्वर सुरेश का जबरदस्त और अविश्वसनीय प्रदर्शन

अगर आज से पांच महीने पहले कोई यह भविष्यवाणी करता कि 25 वर्षीय युवा खिलाड़ी दक्षिणेश्वर सुरेश, जिन्होंने अभी तक शीर्ष स्तर पर अपनी पूरी पहचान नहीं बनाई थी, भारत को इस मुकाम तक ले जाएंगे, तो शायद लोग इसे मजाक समझते। लेकिन 6 फुट 5 इंच के इस गठीले खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से सभी आलोचकों को खामोश कर दिया।

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दक्षिणेश्वर इस पूरे मुकाबले के निर्विवाद नायक बनकर उभरे। उन्होंने न केवल पहले दिन एकल (Singles) मुकाबले में जीत दर्ज की, बल्कि अंतिम और निर्णायक दिन युगल (Doubles) तथा रिवर्स एकल दोनों में भारत को जीत दिलाई।

डेविस कप का स्वर्णिम इतिहास: लिएंडर पेस के 2004 के रिकॉर्ड की यादें हुईं ताजा

दक्षिणेश्वर का यह ‘ऑल-राउंड’ प्रदर्शन भारतीय टेनिस के महानतम खिलाड़ियों में से एक लिएंडर पेस की याद दिलाता है। पेस ने आखिरी बार साल 2004 में न्यूजीलैंड के खिलाफ इसी तरह एकल और युगल दोनों मुकाबलों में एक साथ सफलता हासिल कर देश को जीत दिलाई थी। इतने सालों बाद किसी भारतीय खिलाड़ी द्वारा एक ही टाई में इतना प्रभावशाली प्रदर्शन देखना दर्शकों के लिए एक अद्भुत अनुभव रहा।

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नीदरलैंड के खिलाफ डेविस कप मुकाबला जीतने के बाद जश्न मनाती भारतीय टीम।

नीदरलैंड के खिलाफ डेविस कप मुकाबला जीतने के बाद जश्न मनाती भारतीय टीम। | फोटो साभार: के. मुरली कुमार

 

डेविस कप: कप्तान रोहित राजपाल की अचूक रणनीति और युगल का रोमांच

इस ऐतिहासिक जीत का एक बड़ा श्रेय भारतीय टीम के कप्तान रोहित राजपाल और उनके ‘थिंक-टैंक’ को भी जाता है। उन्होंने अंतिम क्षणों में श्रीराम बालाजी की जगह युगल मुकाबले में दक्षिणेश्वर को उतारने का एक साहसिक फैसला लिया। यह फैसला दक्षिणेश्वर की शानदार सर्विस क्षमता और अमेरिकी कॉलेजिएट सर्किट में उनके युगल खेलने के अनुभव पर आधारित था।

युगल मुकाबले के मुख्य अंश:

  • दक्षिणेश्वर सुरेश और युकी भांबरी की जोड़ी ने नीदरलैंड के सैंडर अरेंड्स और डेविड पेल को 7-6(0), 3-6, 7-6(1) से एक बेहद रोमांचक मुकाबले में मात दी।

  • यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि डच जोड़ी के दोनों खिलाड़ी एटीपी (ATP) डबल्स रैंकिंग में शीर्ष-40 में शामिल हैं।

  • पहले सेट में डच जोड़ी को युकी की सर्विस पर छह ब्रेक-पॉइंट मिले, लेकिन भारतीय जोड़ी ने दबाव में अपना सर्वश्रेष्ठ खेल दिखाते हुए उन्हें कोई मौका नहीं दिया।

डेविस कप मुकाबले में डच खिलाड़ियों का संघर्ष और निर्णायक मोड़

दूसरे सेट में डच खिलाड़ियों ने शानदार वापसी की और बेहतरीन शॉट सिलेक्शन के दम पर बराबरी कर ली। लेकिन तीसरे और निर्णायक सेट में मैच का रुख तब बदला, जब 5-6 के स्कोर पर युकी भांबरी का एक बेहद तेज फोरहैंड शॉट डच खिलाड़ी अरेंड्स के बाएं हाथ पर जा लगा।

चोटिल होने के बाद 34 वर्षीय अरेंड्स को मेडिकल टाइम-आउट लेना पड़ा। हालांकि वह कोर्ट पर वापस लौटे, लेकिन उनकी सर्विस प्रभावित हो चुकी थी और उनके लिए बैकहैंड खेलना मुश्किल हो गया था। मैच टाई-ब्रेकर में गया, जहां भारतीय जोड़ी ने अपना दबदबा कायम रखते हुए सेट और मैच अपने नाम कर लिया।

डेविस कप: सुमित नागल की हार के बाद दक्षिणेश्वर ने कैसे बचाया मैच?

युगल मुकाबले के बाद, भारत के शीर्ष एकल खिलाड़ी सुमित नागल का सामना जेस्पर डी जोंग से हुआ। नागल इस अहम मुकाबले में 7-5, 1-6, 4-6 से हार गए, जिसने पूरी टाई को 2-2 की बराबरी पर लाकर खड़ा कर दिया।

अब सारा दारोमदार एक बार फिर दक्षिणेश्वर पर था। 5 घंटे के थका देने वाले खेल और भारी दबाव के बावजूद, दक्षिणेश्वर ने रिवर्स एकल मुकाबले में नीदरलैंड के गाइ डेन ओडेन को सीधे सेटों में 6-4, 7-6(4) से हराकर भारत को वह ऐतिहासिक जीत दिला दी, जिसका इंतज़ार पूरा देश कर रहा था।

भारतीय टेनिस के लिए यह जीत एक नए युग की शुरुआत का संकेत है। अब सभी की निगाहें सितंबर में होने वाले दूसरे दौर के मुकाबलों पर टिकी हैं।

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