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कामदा एकादशी 2026: कामदा एकादशी व्रत 29 मार्च को रखा जाएगा

कामदा एकादशी 2026: कामदा एकादशी व्रत 29 मार्च को रखा जाएगा
सनातन धर्म में कामदा एकादशी का विशेष महत्व है। यह त्यौहार हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। साथ ही एकादशी के दिन फलाहार व्रत भी रखा जाता है। इस व्रत को करने से साधक को मनचाहा वरदान मिलता है। साथ ही पिछले जन्मों में किए गए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर, जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि इस बार यह एकादशी व्रत 29 मार्च को पड़ रहा है। जिस कामना से कामदा एकादशी का व्रत किया जाता है। यह पूर्ण हो गया है। पारिवारिक जीवन की परेशानियां भी खत्म हो जाती हैं। कामदा एकादशी का उल्लेख विष्णु पुराण में मिलता है। रामनवमी के बाद यह पहली एकादशी है। कामदा एकादशी को सांसारिक इच्छाओं की पूर्ति करने वाला व्रत माना जाता है। इसलिए इस व्रत को बहुत खास माना जाता है. कामदा एकादशी को फलदा एकादशी भी कहा जाता है।

कामदा एकादशी

ज्योतिषाचार्य डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 मार्च को सुबह 08:45 बजे शुरू होगी. वहीं इसका समापन 29 मार्च को सुबह 07:46 बजे होगा. ऐसे में उदयातिथि के अनुसार 29 मार्च को कामदा एकादशी मनाई जाएगी. इस दिन भगवान विष्णु का व्रत और पूजन भी किया जाएगा।

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पूजा विधि

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार इस एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। व्रत से एक दिन पहले एक समय भोजन करके भगवान को याद किया जाता है। कामदा एकादशी व्रत के दिन स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनने चाहिए और व्रत का संकल्प लेना चाहिए। व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा में फल, फूल, दूध, तिल और पंचामृत आदि का प्रयोग करना चाहिए। एकादशी व्रत की कथा सुनने का भी विशेष महत्व है। द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए।

कामदा एकादशी का महत्व

भविष्यवक्ता डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि धर्म शास्त्रों के अनुसार कामदा एकादशी व्रत के पुण्य से आत्मा को पापों से मुक्ति मिलती है। इस एकादशी को कामदा कहा जाता है क्योंकि यह कष्टों को दूर कर मनोवांछित फल देती है और मनोकामनाएं पूर्ण करती है। इस एकादशी की कथा और महत्व भगवान श्री कृष्ण ने पांडु पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर को बताया था। पहले यह महत्व वशिष्ठ मुनि ने राजा दिलीप को बताया था। भारतीय नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह में होने के कारण यह एकादशी अन्य महीनों की तुलना में अधिक विशेष महत्व रखती है। शास्त्रों के अनुसार जो व्यक्ति कामदा एकादशी का व्रत करता है उसे प्रेत योनि से मुक्ति मिल जाती है।

दशमी से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं

कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि कामदा एकादशी व्रत से एक दिन पहले यानी दशमी की दोपहर में एक समय जौ, गेहूं और मूंग आदि का भोजन करके भगवान की पूजा की जाती है। दूसरे दिन यानी एकादशी को सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद व्रत और दान करने का संकल्प लिया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद कथा सुनकर श्रद्धानुसार दान किया जाता है। इस व्रत में नमक का सेवन नहीं किया जाता है. सात्विक दिनचर्या के साथ नियमों का पालन करते हुए व्रत पूरा किया जाता है। इसके बाद रात्रि में भजन-कीर्तन के साथ जागरण होता है।

क्या करें

भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। तुलसी, फल, फूल, धूप, दीप और प्रसाद चढ़ाकर भगवान विष्णु की पूजा करें। इस दिन निराहार (बिना कुछ खाए) या फलाहार व्रत रखने की परंपरा है। भगवत गीता और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें, क्योंकि इस दिन श्रीहरि की भक्ति में लीन होना शुभ माना जाता है। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करना बहुत पुण्यकारी होता है। इस दिन भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन के साथ जागरण करना विशेष लाभकारी होता है। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद स्वयं सात्विक भोजन करें।
क्या नहीं करें
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास ने बताया कि इस दिन चावल, गेहूं, दाल, प्याज-लहसुन और मांसाहारी भोजन से परहेज करें। व्रत के दौरान मन और वाणी की पवित्रता बनाए रखें। इस दिन सच बोलना और अच्छे आचरण का पालन करना जरूरी है। वाणी पर नियंत्रण रखना ही एकादशी व्रत का मुख्य नियम है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन शरीर का कोई भी अंग काटना वर्जित है। खाना बर्बाद न करें और सम्मानपूर्वक खाएं।

ज्योतिषाचार्य और कुण्डली विश्ल़ेषक डॉ. अनीष व्यास से जानिए कामदा एकादशी पर राशि के अनुसार इन चीजों का दान करें।

मेष- कामदा एकादशी के दिन लाल रंग की मिठाई और लाल रंग के मौसमी फल जैसे मसूर की दाल का दान करें.
वृषभ- चावल, गेहूं, चीनी, दूध आदि चीजों का दान करें।
मिथुन- गाय को भोजन एवं सेवा करें। साथ ही जरूरतमंद लोगों को हरी सब्जियां भी दान करें।
कर्क- मक्खन, मिश्री, लस्सी, छाछ आदि वस्तुओं का दान करें।
सिंह- कामदा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद राह चलते लोगों में लाल रंग के फल और शर्बत बांटें।
कन्या- विवाहित महिलाओं को हरी चूड़ियाँ दान करें।
तुला- भगवान विष्णु की पूजा करने के बाद जरूरतमंदों में सफेद वस्त्र दान करें।
वृश्चिक – मसूर दाल, लाल मिर्च, लाल रंग के फल आदि चीजें दान करें।
धनु- राहगीरों में केसर मिश्रित दूध बांटें। आप पीले रंग के फल और अन्य खाद्य पदार्थ भी दान कर सकते हैं।
मकर- भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ-साथ गरीबों में धन का दान करें।
कुंभ- कामदा एकादशी पर चमड़े के जूते, चप्पल, छाता और काले कपड़े का दान करें।
मीन – केला, चने की दाल, बेसन, पीले रंग के वस्त्र का दान करें।
– डॉ. अनिश व्यास
भविष्यवक्ता और कुंडली विश्लेषक
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