धर्म

जानकी स्तोत्र के चमत्कारी लाभ हैं, इसका पाठ करने से आपको जीवन में अपार सौभाग्य और सफलता मिलेगी।

माता सीता दयालुता की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। इसलिए सादगी से पूजा करके माता सीता को प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। माता सीता की पूजा में जानकी स्तोत्र और श्री जानकी स्तुति का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। यह माता सीता को समर्पित एक अत्यंत पवित्र और दिव्य स्त्रोत है, जिसका पाठ करने से आप माता सीता की असीम कृपा प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे में आज हम आपको इस लेख के माध्यम से श्री जानकी स्तोत्र और जानकी स्तुति के बारे में बताने जा रहे हैं।

जानकी स्तोत्र

नीलनीरज-दलयतेक्षणं लक्ष्मणाग्रज-भुजावलम्बिनीम्।
शुद्धमिद्धधेन प्रदित्सतिं भवाय मानसि रामवल्लभम्।

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रामपद-विनिवेशितेक्षणमंग-कान्तिपरिभूत-हात्काम।
तत्कारी-परुषोक्ति-विकलावन भवाय मानसि रामवल्लभम्।
कुन्तलकुल-कपोलमनानां, राहुवक्त्राग-सुधाकरद्युतिम्।
वस्सा पिधति हियाकुलं भावये मानसि रामवल्लभम्।
कायवनमानसंग अग्र व्याधं स्वप्नजागृतिषु राघवेतरम्।
तद्दहंगमिति पावकं यतिन भावये मानसि रामवल्लभम्।
इंद्ररुद्र-धनदम्बुपालकै: सद्विमना-गणमस्तैरदिवि।
पुष्पवर्षा-मनुसंस्तुतांगृकं भावये मानसि रामवल्लभम्।
संचयारदिविषादं विमानागिर्विषमयकुल-मनोऽभिविष्ठाम्।
तेजसा पिद्धति सदा दिशो भावये मानसि रामवल्लभम्।
इति जानकी स्तोत्रम् सम्पूर्णम्।

जानकी स्तोत्र के लाभ

यदि विवाहित महिलाएं इस स्तोत्र का पाठ करती हैं तो इसके पाठ से उन्हें अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है और उनके दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
जानकी स्तोत्र का पाठ करने से घर से दरिद्रता दूर होती है और माता सीता की कृपा से धन में वृद्धि होती है।
जानकी स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को अज्ञात भय से मुक्ति मिलती है और पापों का नाश होता है।
सीता नवमी के दिन जो कोई भी श्रद्धापूर्वक इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
यह स्त्रोत व्यक्ति को मानसिक शांति प्रदान करता है और आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद करता है।
माता जानकी की कृपा से व्यक्ति को अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

श्री जानकी की स्तुति

जानकी त्वां नामस्यामि सर्वपाप्रणाशिनिम्।
जानकी त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनिम्।।1।।
दरिद्र्यारणसंहर्त्रिं भक्तानाभिष्टदायिनीम्।
विदेहराजतनियां राघवानंदकारिणीम्।।2।।
भूमेर्दुहितरं विद्यां नमामि प्रकृतिं शिवम्।
पौलस्त्यैश्वर्यसंहत्रिं भक्ताभिष्टं सरस्वतीम्।।3।।
पतिव्रतधुरिणां त्वां नमामि जनकात्मजम्।
अनुग्राघपरमृद्धिमनघं हरिवल्लभम्।।4।।
आत्मविद्याम् त्रयीरूपमुमारूप नमाम्यहम्।
प्रसादाभिमुखिम लक्ष्मी क्षीरब्धितानायन शुभम्।।5।।
नमामि चन्द्रभगिनिन सीता सर्वांगसुन्दरिम।
नमामि धर्मनिलयं करुणां वेदमातरम्।।6।।
पद्मालयं पद्महस्तां विष्णुवक्षः स्थलालयम्।
नमामि चंद्रनिलयां सीतां चंद्रनिभन्नम।।7।।
अह्लाद्रोपिणी सिद्धिं शिवं शिवकारी सतीम।
नमामि विश्वजननि रामचन्द्रेष्टावल्लभम्।
सीता सर्वानवाद्यंगी भजामि सततं हृदा।।8।।

देवी सीता के मंत्र

सामान्य मंत्र

श्री जानकी रामाभ्यां नमः।

मूल मंत्र

श्री सीतायै नमः।

देवी सीता गायत्री मंत्र

ॐ जनकाय विद्महे राम प्रियाय धीमहि। तन्नो सीता प्रचोदयात्।

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