धर्म

चातुर्मास 2026: जुलाई में कब से शुरू हो रहा है चातुर्मास, जानिए क्यों बंद हो जाएंगे सभी शुभ कार्य और क्या है इसका आध्यात्मिक महत्व?

हिंदू धर्म में चातुर्मास का महीना बहुत खास और पवित्र माना जाता है। यह आषाढ़ शुक्ल पक्ष की देवशयनी एकादशी से प्रारंभ होकर कार्तिक मास की देवप्रबोधिनी एकादशी तक चलता है। चातुर्मास को आध्यात्मिक साधना, आत्मशुद्धि और अनुशासित जीवन के लिए बहुत पवित्र अवधि माना जाता है।

‘चातुर्मास’ शब्द का अर्थ है चार महीने की अवधि। यह अवधि न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि जीवनशैली और स्वास्थ्य के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।

चातुर्मास में क्या होता है?

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों की अवधि के दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में शेषनाग की शय्या पर योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस समय को देवताओं का विश्राम काल कहा जाता है। इस दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव के हाथों में होता है। क्योंकि इन चार महीनों के दौरान श्री विष्णु निद्रा अवस्था में रहते हैं। मान्यता के अनुसार इस समय विवाह, गृहप्रवेश और अन्य शुभ कार्य बिल्कुल भी नहीं किए जाते हैं। इस दौरान पूजा-पाठ, व्रत और तप के लिए यह समय सर्वोत्तम माना जाता है।

चातुर्मास 2026 कब प्रारंभ होगा?

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इस बार चातुर्मास 25 जुलाई से शुरू होकर 20 नवंबर तक चलेगा. इन चार महीनों के दौरान व्यक्ति को संयमित जीवन अपनाने, अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखने और भगवान की भक्ति में लीन रहने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इस समय किए गए जप, तप और दान का फल कई गुना मिलता है। वहीं, सावन में शिव पूजा और भाद्रपद में श्रीकृष्ण और गणेश की पूजा को विशेष महत्व दिया गया है।

चातुर्मास में क्या करें और क्या न करें

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वैज्ञानिक दृष्टि से इस दौरान वर्षा ऋतु होती है, जब वातावरण में नमी बढ़ जाती है और पाचन शक्ति कमजोर हो सकती है। संक्रमण और बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। इस समय संक्रमण और बीमारियों का खतरा अधिक रहता है। इसलिए इस दौरान जितना हो सके सात्विक भोजन करें और व्रत रखें। जिससे शरीर स्वस्थ और संतुलित रहता है।

किन चीजों से बचना चाहिए

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– चातुर्मास के दौरान खान-पान और जीवनशैली में कुछ विशेष नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है।

– मांस, शराब, प्याज और लहसुन जैसे तामसिक भोजन से दूर रहें।

ध्यान देने वाली बात यह है कि सावन में पत्तेदार सब्जियों का सेवन नहीं करना चाहिए, भाद्रपद में दही का त्याग करना चाहिए, आश्विन में दूध का सेवन कम करना चाहिए और कार्तिक में कुछ दालों का सेवन नहीं करना चाहिए।

क्या करना अनिवार्य है?

इस दौरान जमीन पर सोना, ब्रह्मचर्य का पालन करना, सत्य बोलना और मौन रहना सबसे महत्वपूर्ण है।

– चातुर्मास के दौरान विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नया व्यवसाय शुरू करने जैसे कार्य वर्जित होते हैं। इस दौरान भूलकर भी ऐसा न करें।

– इस दौरान व्यक्ति को अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग अपनाना चाहिए।

चातुर्मास के नियम

– चातुर्मास में भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है।

– इन चार महीनों के दौरान नियमित रूप से विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

– इस दौरान जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और धन आदि का दान करना शुभ माना जाता है।

-चातुर्मास के दौरान नियमित रूप से सुबह-शाम तुलसी का घी का दीपक जलाने का प्रयास करें।

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