धर्म

मार्गशीर्ष दुर्गा अष्टमी: मार्गशीर्ष दुर्गा अष्टमी का व्रत करने से अधूरी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

आज मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत है, सनातन धर्म में इस पर्व का अपना ही महत्व है। साल के हर महीने में देवी आदिशक्ति दुर्गा की पूजा करने की भी परंपरा है। इस दिन देवी दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की जाती है, इस दौरान देवी दुर्गा पृथ्वी पर निवास करती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं, तो आइए हम आपको मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत के महत्व और पूजा विधि के बारे में बताते हैं।

जानिए मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी के बारे में

मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी का दिन देवी मां की विशेष पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है। इस बार मासिक दुर्गाष्टमी कई शुभ योगों के साथ पड़ रही है, जो साधकों के लिए वरदान साबित होने वाली है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से की गई दुर्गा पूजा से हर मनोकामना पूरी होती है और जीवन में सुख, शांति, सौभाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। इस बार मार्गशीर्ष मास की मासिक दुर्गाष्टमी पर हर्षण योग का बेहद शुभ संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हर्षण योग में की गई पूजा और उपाय साधक के जीवन में सुख और समृद्धि लाते हैं। ऐसे में मासिक दुर्गाष्टमी के इस पावन पर्व पर मां दुर्गा की पूजा करने से भक्तों की हर अधूरी मनोकामना पूरी होगी. आदि शक्ति मां दुर्गा को समर्पित ‘मासिक दुर्गा अष्टमी’ का व्रत हर माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार अगहन मास की दुर्गा अष्टमी का व्रत 28 नवंबर 2025 दिन शुक्रवार को रखा जाएगा।

यह भी पढ़ें: Sawan Somvar: नि:संतान दंपत्तियों के लिए सावन सोमवार का खास उपाय, गणेश स्तोत्र और अभिलाषाष्टक देगा संतान सुख

मार्गशीर्ष दुर्गा अष्टमी का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी तिथि 28 नवंबर को 12:29 बजे शुरू होगी और तिथि 29 नवंबर को 12:15 बजे समाप्त होगी। निशिता काल में मां दुर्गा की पूजा की जाती है। ऐसे में अगहन मास की दुर्गा अष्टमी पूजा 28 नवंबर को की जाएगी.

जानिए मार्गशीर्ष दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त एक समय भोजन करते हैं या फल खाते हैं। व्रत रखने से मन एकाग्र होता है और मन मां दुर्गा की भक्ति में लगता है। व्रत को पूरे विधि-विधान से पूरा करने से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली परेशानियां दूर हो जाती हैं। इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि बनी रहे इसलिए यह व्रत रखा जाता है।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत पर ऐसे करें मां दुर्गा की पूजा.

पंडितों के अनुसार दुर्गाष्टमी के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना चाहिए। इसके बाद मां दुर्गा की प्रतिमा पर गंगा जल डालकर स्थापित करना चाहिए। मां दुर्गा का अभिषेक गंगाजल से करना चाहिए। इसके साथ ही मां दुर्गा के सामने दीपक भी जलाना चाहिए. इसके बाद अक्षत, सिन्दूर और लाल फूल चढ़ाना चाहिए और मिठाई का भोग लगाना चाहिए। धूप, दीप, अगरबत्ती जलाकर दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। ऐसा करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी तिथि और शुभ समय

– अष्टमी तिथि प्रारंभ: 28 नवंबर को दोपहर 12 बजकर 29 मिनट से
– अष्टमी तिथि समाप्त: 29 नवंबर रात 12 बजकर 15 मिनट पर
चूंकि मासिक दुर्गाष्टमी पर निशीथ काल (रात) में मां दुर्गा की पूजा करने का विशेष महत्व है, इसलिए यह त्योहार 28 नवंबर को मनाया जाएगा।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन शुभ माना जाता है।

हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी के दिन कन्या पूजन करना शुभ माना जाता है। 9 कन्याओं को भोजन कराएं और उन्हें वस्त्र, फल, मिठाई और दक्षिणा देकर सम्मानित करें। यदि यह संभव न हो तो कम से कम एक कन्या का पूजन अवश्य करें। जरूरतमंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान करना भी शुभ माना जाता है।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी व्रत के दिन हर्षण योग का विशेष महत्व होता है।

हर्षण योग में मां दुर्गा की पूजा करने से साधक के जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और रुके हुए काम पूरे हो जाते हैं। यह योग उन लोगों के लिए विशेष फलदायी है जो लंबे समय से किसी मनोकामना की पूर्ति का इंतजार कर रहे हैं या किसी शारीरिक कष्ट से परेशान हैं। पंडितों के अनुसार इस शुभ योग में की गई पूजा का प्रभाव तुरंत और स्थायी होता है।

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी से जुड़ी पौराणिक कथा भी विशेष है.

मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी की पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन काल में महिषासुर नाम के राक्षस ने अत्याचार किया था. इस पर ब्रह्मा, विष्णु और शिव ने अपनी शक्तियों से देवी दुर्गा की रचना की और देवताओं ने उन्हें हथियार दिये। देवी ने महिषासुर का वध किया, जिससे दुर्गा अष्टमी का त्योहार शुरू हुआ और इसकी पूजा और व्रत से भक्तों को सुख, समृद्धि और विजय मिलती है।

जानिए मार्गशीर्ष दुर्गा अष्टमी व्रत का महत्व

पंडितों के अनुसार मार्गशीर्ष दुर्गाष्टमी के दिन व्रत रखने का विशेष महत्व है। इस दिन भक्त एक समय भोजन करते हैं या फल खाते हैं। व्रत रखने से मन एकाग्र होता है और मन मां दुर्गा की भक्ति में लगता है। व्रत को पूरे विधि-विधान से पूरा करने से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में आने वाली परेशानियां दूर हो जाती हैं। इसके अलावा घर में सुख-समृद्धि बनी रहे इसलिए यह व्रत रखा जाता है।
-प्रज्ञा पांडे

यह भी पढ़ें: बसंत पंचमी 2026: बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा करने से साधक को ज्ञान की प्राप्ति होती है।

यह भी पढ़ें: श्री गणेश जी की चालिसा: क्या गणेश चालिसा का पाठ बुधवार को, जीवन में बाधाओं को हटा दिया जाएगा

यह भी पढ़ें: दैनिक प्रेम राशिफल: 25 फरवरी 2026 — सितारों की चाल और आपके हृदय के तार

यह भी पढ़ें: ज्ञान गंगा: भगवान शंकर की गर्दन के चारों ओर लटके हुए एक सौ आठ नरमुंडों की माला का रहस्य क्या था?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Link Copied!