धर्म

धनतेरस पर 13 दीपक जलाने की परंपरा, मुख्य द्वार से लेकर छत तक दीपदान करने के जरूरी नियम

आज यानी 6 नवंबर को देशभर में धनतेरस का त्योहार मनाया जा रहा है. धनतेरस से ही दिवाली का त्योहार शुरू हो जाता है. इस दिन 13 दीपक जलाने का संबंध ‘यम दीपम’ की परंपरा से है। यह त्योहार की सबसे पुरानी प्रथाओं में से एक है। इस दिन दीप दान करना बहुत शुभ माना जाता है।

इन सभी दीयों का उद्देश्य भविष्य में परिवार के सदस्यों की असामयिक मृत्यु से सुरक्षा और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करना है।

आपको बता दें कि इन 13 दीपकों के पीछे एक विशेष आध्यात्मिक उद्देश्य है और प्रत्येक दीपक सुरक्षा का प्रतीक है। हिंदू धर्म में चंद्र कैलेंडर के अनुसार, धनतेरस दिवाली से दो दिन पहले कार्तिक महीने में आता है। हालाँकि, यह त्यौहार आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता ‘धन्वंतरि’ के जन्म दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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धर्म ग्रंथों के अनुसार धन्वंतरि का जन्म समुद्र मंथन से हुआ था और वे इसी दिन अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस के दिन 13 दीपक जलाने का एक मुख्य उद्देश्य घर के हर कोने को रोशन करना है और इस दिन त्रयोदशी तिथि होती है इसलिए 13 दीपक जलाने की परंपरा है। आइए आपको बताते हैं कि किन जगहों पर दीपक रखना सबसे शुभ होता है और इनका क्या महत्व है?

धनतेरस पर 13 दीपक जलाने का महत्व

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पारंपरिक वर्ष के प्रत्येक चंद्र माह में एक दीपक जलाया जाता है और माना जाता है कि 13 दीपक जलाने से आने वाले सभी महीनों में परिवार की रक्षा होती है। वैसे 13 दीपकों को शरीर के 13 प्रमुख महत्वपूर्ण अंगों से भी जोड़कर देखा जाता है।

वहीं इन 13 दीपकों में से एक मुख्य दीपक है, जिसे ‘यम दीपम’ या यम का दीपक कहा जाता है। इसे मृत्यु के देवता को प्रसन्न करने के लिए जलाया जाता है। ताकि परिवार के सदस्यों की असामयिक मृत्यु न हो।

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धनतेरस पर किन स्थानों पर दीपक जलाएं

– आपको पहला दीपक यम देव के लिए अपने घर की दक्षिण दिशा में जलाना है.

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– दूसरा दीपक घर के बाहर कूड़ा रखने वाले स्थान पर जलाना है, इससे अकाल मृत्यु का भय कम हो जाता है।

-तीसरा दीपक आपको अपने घर के मुख्य दरवाजे पर रखना है, ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

-चौथा दीपक तुलसी के पौधे के पास जलाना है. इससे देवी लक्ष्मी का वास होता है।

– पांचवां दीपक आपको घर की छत पर जलाना है, जिससे राहु का प्रभाव कम हो सके.

– छठा दीपक घर के पूजा स्थान पर रखें. इससे देवी लक्ष्मी के साथ-साथ भगवान कुबेर जी की भी कृपा बनी रहेगी।

– सातवां दीपक अपने घर के पास स्थित पीपल के पेड़ के पास जलाएं. इससे पितरों का आशीर्वाद मिलता है।

– आठवां दीपक आपको घर के भंडार स्थान पर जलाना चाहिए, इससे घर से दरिद्रता दूर होती है और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति मिलती है।

– नौवें दीपक को घर के वॉशरूम के बाहर रखें, जिससे किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम हो सके।

– दसवां दीपक अपने घर की खिड़कियों के पास जलाएं, इससे पूरे घर में रोशनी फैल जाएगी।

– ग्यारहवां दीपक बेल के पेड़ के नीचे जलाना चाहिए, इससे भगवान शिव की कृपा मिलती है।

– बारहवां दीपक अपने घर के मध्य भाग यानी ब्रह्मस्थान पर जलाएं, जिससे घर के लोगों के बीच सौहार्द बना रहे।

– तेरहवां दीपक अपने घर के उत्तर-पूर्व कोने में जलाएं, जिससे सभी देवताओं का आशीर्वाद आपको मिलता रहे।

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