धर्म

धनतेरस पर यम दीपम सहित 13 दीपक जलाने की परंपरा और उन्हें रखने का सही स्थान

इस बार धनतेरस का त्योहार 06 नवंबर 2026 को मनाया जाएगा। धनतेरस पर 13 दीपक जलाना ‘यम दीपम’ की परंपरा से जुड़ा है। इस पर्व की सबसे पुरानी परंपरा दीपदान है। इन दीयों का उद्देश्य असामयिक मृत्यु से रक्षा करना और भविष्य में परिवार के सदस्यों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करना है। इन 13 दीपकों के पीछे एक विशेष आध्यात्मिक उद्देश्य भी है और प्रत्येक दीपक सुरक्षा का प्रतीक है। हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार, धनतेरस का त्योहार दिवाली से दो दिन पहले मनाया जाता है। यह त्यौहार आयुर्वेद और स्वास्थ्य के देवता ‘धन्वंतरि’ के प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है।

धन्वंतरि का जन्म समुद्र मंथन से हुआ था। इसी दिन वे समुद्र से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धनतेरस के दिन 13 दीपक जलाने का मुख्य उद्देश्य घर के हर कोने को रोशनी से जगमगाना है। इसके साथ ही इस दिन त्रयोदशी तिथि भी होती है। इसलिए धनतेरस पर 13 दीपक जलाए जाते हैं। ऐसे में आज हम आपको इस लेख के जरिए बताने जा रहे हैं कि किन जगहों पर दीपक रखना शुभ माना जाता है और इसका क्या महत्व है।

यह भी पढ़ें: ज्ञान गंगा: रावण के अत्याचारों से व्यथित पृथ्वी की करुण पुकार और श्रीराम अवतार की पृष्ठभूमि

यह भी पढ़ें: त्रिनेत्र गणेश मंदिर: रणथंभौर के त्रिनेत्र गणेश को भक्त पत्र लिखकर अपनी मनोकामनाएं भेजते हैं।

जानिए धनतेरस पर 13 दीपक जलाने का महत्व

धनतेरस के अवसर पर 13 अंक का विशेष महत्व माना जाता है। पारंपरिक वर्ष के 13 चंद्र महीनों में से प्रत्येक के लिए एक दीपक जलाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि एक साथ 13 दीपक जलाने से सभी महीनों में परिवार की रक्षा होती है। इन 13 दीपकों को शरीर के 13 प्रमुख महत्वपूर्ण अंगों से भी जोड़कर देखा जाता है।

आपको बता दें कि इन 13 दीयों के बीच में एक मुख्य दीया होता है। जिसे ‘यम का दीपक’ या ‘यम दीपक’ कहा जाता है। यह दीपक मृत्यु के देवता यम को प्रसन्न करने के लिए जलाया जाता है। इससे परिवार के सदस्यों में अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।

यह भी पढ़ें: प्रसिद्ध मंदिर: देश के 10 प्रसिद्ध कृष्ण मंदिर जहां दर्शन मात्र से पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना।

धनतेरस पर इन जगहों पर दीपक जलाने चाहिए

धनतेरस के दिन पहला दीपक घर की दक्षिण दिशा में रखा जाता है, जिसे भगवान यम के लिए जलाना चाहिए।

दूसरा दीपक घर के बाहर कूड़े वाले स्थान पर जलाना चाहिए। इससे असामयिक मृत्यु का भय कम हो जाता है।

यह भी पढ़ें: करवा चौथ 2026: महिलाएं अखंड सुहाग के लिए करवा चौथ का व्रत रखती हैं।

तीसरा दीपक मुख्य द्वार पर जलाना चाहिए। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

चौथा दीपक तुलसी के पास जलाना चाहिए। इससे घर में देवी लक्ष्मी का आगमन और वास होता है।

यह भी पढ़ें: गणेश चतुर्थी उत्सव: गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त और व्रत कथा, क्या है चंद्र दर्शन की मनाही?

पांचवां दीपक घर की छत पर जलाना चाहिए। इससे राहु का प्रभाव कम हो जाता है।

छठा दीपक घर के पूजा स्थल पर जलाना चाहिए। इससे परिवार पर देवी लक्ष्मी के साथ-साथ कुबेर देव की भी कृपा बनी रहती है।

सातवां दीपक घर के पास स्थित पीपल के पेड़ के पास जलाना चाहिए। इससे परिवार पर पितरों का आशीर्वाद बना रहता है।

आठवां दीपक घर के भंडार स्थान पर जलाना चाहिए। इससे दरिद्रता दूर होती है और नकारात्मक ऊर्जा से भी मुक्ति मिलती है।

नौवां दीपक शौचालय के बाहर रखना चाहिए। जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव किसी तरह कम हो जाता है।

दसवां दीपक घर की खिड़कियों के पास जलाएं। इससे पूरे घर में रोशनी फैलती है।

ग्यारहवां दीपक बरगद के पेड़ के नीचे जलाएं, इससे व्यक्ति और उसके परिवार पर भोलेनाथ की कृपा बनी रहती है।

बारहवां दीपक घर के मध्य भाग यानी ब्रह्मस्थान में जलाना चाहिए, इससे घर के सदस्यों के बीच सौहार्द बना रहता है।

तेरहवां दीपक घर के ईशान कोण में जलाना चाहिए। इससे सभी देवताओं की कृपा बनी रहती है।

ऐसे में अगर आप भी धनतेरस के दिन घर में अलग-अलग जगहों पर 13 दीपक रखते हैं तो यह बहुत शुभ होता है। इससे परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Link Copied!