धर्म

देवी सीता मंदिर बिहार में: अयोध्या के बाद अब बिहार के सीतामढी की बारी, 3.5 साल में बनेगा मां जानकी का भव्य मंदिर

साल 2024 में अयोध्या में राम मंदिर का अभिषेक किया गया। जिसके बाद से अयोध्या में भक्तों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। हर दिन लाखों श्रद्धालु भगवान श्री राम के दर्शन के लिए अयोध्या पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर में दर्शन, सुविधाएं और सुरक्षा के बेहतर इंतजाम हैं। ताकि श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। आपको बता दें कि राम मंदिर निर्माण के बाद अब बिहार में माता सीता के मंदिर को लेकर चर्चा तेज है.

बिहार के सीतामढी जिले में स्थित पुनौरा धाम में मां जानकी का दिव्य और भव्य मंदिर बनाने की तैयारी की जा रही है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह वही स्थान है जहां माता सीता का जन्म हुआ था। इस पवित्र तीर्थ स्थल पर अयोध्या के राम मंदिर की तर्ज पर मां जानकी का विशाल मंदिर बनाया जाएगा। इस मंदिर के निर्माण के बाद यह स्थान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आस्था और आकर्षण का केंद्र बन जाएगा।

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मंदिर बनने में कितना समय लगेगा

सीतामढी के जानकी मंदिर के निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने का काम शुरू हो गया है. बताया जा रहा है कि इस भव्य जानकी मंदिर को बनने में कुल 42 महीने यानी करीब साढ़े तीन साल का वक्त लगेगा. मंदिर का डिजाइन पहले ही तय हो चुका है और सारी योजनाएं भी तैयार हैं. जैसे-जैसे मंदिर निर्माण कार्य आगे बढ़ेगा, सीतामढी एक प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में पहचाना जायेगा.

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आने-जाने में कोई परेशानी नहीं होगी

मंदिर निर्माण में कोई बाधा न आए इसके लिए जमीन का सीमांकन भी किया जा रहा है. जिस स्थान पर पहले जलजमाव की समस्या थी, वहां मरम्मत का काम भी लगभग पूरा हो चुका है. मंदिर की ओर जाने वाली मुख्य सड़क पर जलजमाव की समस्या भी दूर हो गयी है. इससे श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई परेशानी नहीं होगी.

मंदिर का प्रारंभिक कार्य

इसके साथ ही मंदिर और आसपास की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाने की तैयारी की जा रही है. मंदिर निर्माण से पहले सभी जरूरी योजनाएं तैयार कर ली गई हैं और काम भी शुरू हो गया है. काम का यह प्रारंभिक चरण लगभग 6 महीने में पूरा होने की उम्मीद है। फिर मंदिर निर्माण का मुख्य कार्य शुरू होगा.

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रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

मां जानकी का मंदिर न सिर्फ आस्था स्थल बल्कि प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में भी स्थापित होगा. अयोध्या की तरह यहां भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. इससे आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा। आने वाले समय में सीतामढी का पुनौरा धाम भव्यता, दिव्यता और मां जानकी की श्रद्धा का बड़ा प्रतीक बनकर उभरेगा. यहां श्रद्धालुओं को अयोध्या जैसा आध्यात्मिक अनुभव मिलेगा।

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