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जन नायकन फिल्म कानूनी विवाद: थलपति विजय को सुप्रीम कोर्ट से लगा भयंकर झटका!

जन नायकन फिल्म कानूनी विवाद: थलपति विजय को सुप्रीम कोर्ट से लगा भयंकर झटका, मेकर्स की याचिका खारिज!

जन नायकन फिल्म कानूनी विवाद ने दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार विजय (थलपति विजय) की आगामी रिलीज पर संकट के बड़े बादल खड़े कर दिए हैं। फिल्म के निर्माताओं को देश के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) से उस वक्त एक बहुत बड़ा झटका लगा, जब अदालत ने फिल्म को दिए गए ‘ए’ (A – केवल वयस्कों के लिए) सर्टिफिकेट के खिलाफ दायर याचिका पर किसी भी प्रकार की अंतरिम राहत देने से साफ इनकार कर दिया।

जन नायकन फिल्म कानूनी विवाद: सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख

जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की बेंच ने इस संवेदनशील मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला पहले से ही 20 जनवरी को मद्रास उच्च न्यायालय के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
अदालत ने इस मामले में सीधा हस्तक्षेप करने के बजाय निर्देश दिया कि उच्च न्यायालय उसी दिन (20 जनवरी) इस प्रमाणन विवाद पर अपना अंतिम आदेश पारित करे।

‘ए’ (A) सर्टिफिकेट के खिलाफ क्यों गए मेकर्स?

जन नायकन के निर्माता, केवीएन प्रोडक्शंस एलएलपी (KVN Productions LLP) ने 13 जनवरी को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक विशेष याचिका दायर की थी। इस याचिका का मुख्य उद्देश्य मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश पर एकपक्षीय अंतरिम रोक लगाना था, जिसने फिल्म की प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया था।
  • U/A 16+ की थी मांग: हाई कोर्ट के एकल न्यायाधीश (सिंगल जज) ने अपने पहले के फैसले में सीबीएफसी (CBFC) को निर्देश दिया था कि फिल्म को यू/ए 16+ (U/A 16+) प्रमाणपत्र दिया जाए, ताकि फिल्म अपनी तय रिलीज प्रक्रिया में आगे बढ़ सके।
  • डिवीजन बेंच का फैसला: हालांकि, हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 9 जनवरी, 2026 को एकल न्यायाधीश के इस फैसले को पलट दिया और सीबीएफसी द्वारा किए जा रहे सर्टिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगा दी।
  • निर्माताओं ने इसी 9 जनवरी के आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

जन नायकन फिल्म कानूनी विवाद में दायर याचिका की मुख्य बातें

मेकर्स ने अपनी याचिका में सर्वोच्च न्यायालय से न्याय की गुहार लगाते हुए कई अहम बिंदु रखे थे, ताकि फिल्म रिलीज में हो रही देरी को रोका जा सके:
  1. अंतरिम रोक की मांग: निर्माताओं ने अत्यंत सम्मानपूर्वक प्रार्थना की थी कि सुप्रीम कोर्ट मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा डब्ल्यूए संख्या 94/2026 में सीएमपी संख्या 821/2026 में पारित दिनांक 09.01.2026 के आदेश के संचालन पर एकपक्षीय या अंतरिम रोक लगाए।
  2. अतिरिक्त निर्देश की अपील: याचिका में यह भी मांग की गई थी कि कोर्ट इस मामले में कोई और राहत या निर्देश दे जो वह उचित समझे, ताकि फिल्म के 5,000 से अधिक बुक किए गए सिनेमाघरों और वितरकों को भारी वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके।

CBFC का सुप्रीम कोर्ट में पलटवार

एक तरफ जहां जन नायकन के निर्माता राहत की उम्मीद कर रहे थे, वहीं दूसरी ओर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) ने भी सुप्रीम कोर्ट में अपनी तरफ से एक याचिका दायर कर दी। सीबीएफसी ने मांग की कि फिल्म प्रमाणन प्राधिकरण का पक्ष सुने बिना और उन्हें जवाब देने का मौका दिए बिना, इस मामले में कोई भी एकतरफा आदेश पारित न किया जाए।
फिलहाल, फिल्म की रिलीज और सर्टिफिकेशन का भविष्य अब पूरी तरह से मद्रास उच्च न्यायालय के 20 जनवरी के फैसले पर टिका हुआ है। थलपति विजय के करोड़ों फैंस और पूरी फिल्म इंडस्ट्री की निगाहें अब हाई कोर्ट के अगले कदम पर हैं।

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