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पश्चिम एशिया में युद्ध का भयंकर खतरा: फिनलैंड के राष्ट्रपति का बड़ा खुलासा!

पश्चिम एशिया में युद्ध की आग अब क्षेत्रीय सीमाओं को पार कर वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने हाल ही में वैश्विक कूटनीति, ईरान-अमेरिका तनाव और भारत की स्थिति पर कई चौंकाने वाले बयान दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के करीबी माने जाने वाले स्टब ने स्पष्ट किया है कि भले ही यूरोपीय देश अमेरिका के साथ खड़े हैं, लेकिन इज़राइल और अमेरिका के हालिया कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर हैं।

आइए जानते हैं कि 28 फरवरी के घातक हमलों, हिंद महासागर में बढ़ते तनाव और रूस-यूक्रेन संकट के बीच भारत की भूमिका को लेकर फिनिश राष्ट्रपति ने क्या कहा।

पश्चिम एशिया में युद्ध और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन

राष्ट्रपति स्टब ने मौजूदा संघर्ष को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका मानना है कि यूक्रेन में रूस के आक्रमण के बाद से ही संघर्षों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। पहले इज़राइल-फ़िलिस्तीन, फिर इज़राइल-अमेरिका-ईरान और अब यह तनाव खाड़ी देशों तक पहुँचने का जोखिम पैदा कर रहा है।

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28 फरवरी को ईरान पर हुए उस अमेरिकी-इजरायली हमले के बारे में (जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई), स्टब ने एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा:

“यह बिल्कुल स्पष्ट है कि इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका प्रथागत अंतरराष्ट्रीय कानून के ढांचे के बाहर काम कर रहे हैं। हालांकि, ईरान द्वारा परमाणु हथियार बनाने का प्रयास और यूरोप व मध्य पूर्व के 10 से अधिक राज्यों पर हमले भी अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ हैं।”

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यूरोप के रुख को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि स्पेन और फ्रांस जैसे देशों की आलोचनाओं के बावजूद, अगर अमेरिका और ईरान के बीच किसी एक को चुनना हो, तो यूरोप एकजुट होकर अमेरिका का ही समर्थन करेगा।

हिंद महासागर में ईरानी जहाज का डूबना और वैश्विक व्यापार

हिंद महासागर में एक ईरानी जहाज पर हुए अमेरिकी हमले ने इस युद्ध के फैलने की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। स्टब ने चेतावनी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बंद होता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल की कीमतों और विश्व व्यापार पर पड़ेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस युद्ध को वैश्विक संघर्ष बनने से रोकने के लिए कूटनीति के सभी साधनों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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रूस-यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया में युद्ध के बीच भारत की भूमिका

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी हालिया चर्चा का जिक्र करते हुए फिनिश राष्ट्रपति ने भारत की ‘गुटनिरपेक्षता’ (Non-alignment) नीति की जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत एक शांतिप्रिय देश है और उन गिने-चुने देशों में से है जो रूस और यूक्रेन—दोनों के साथ समान स्तर और सम्मान के साथ बात कर सकता है।

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रूसी तेल आयात और अमेरिकी प्रतिबंधों पर स्टब की राय

हाल ही में अमेरिका द्वारा भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रतिबंधों से 30 दिन की छूट दिए जाने के सवाल पर स्टब ने कूटनीतिक जवाब दिया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा:

  • “मैं 56 लाख लोगों के देश का एक विनम्र राष्ट्रपति हूँ। मैं भारत और अमेरिका के बीच अंतरराष्ट्रीय संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करूँगा।”

  • उन्होंने स्पष्ट किया कि 7% की वार्षिक वृद्धि दर और 1.5 अरब की आबादी वाले भारत के नेता (पीएम मोदी) को सलाह देना उनका काम नहीं है। भारत को अपनी ऊर्जा और कूटनीतिक नीतियां खुद तय करनी हैं।

“न्यू डेल्ही मोमेंट”: संयुक्त राष्ट्र में सुधार और भारत के लिए स्थायी सीट

रायसीना डायलॉग में “न्यू डेल्ही मोमेंट” सम्मेलन का आह्वान करने वाले स्टब ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक संस्थानों को 1945 के बजाय 2026 की वास्तविकता को प्रतिबिंबित करना चाहिए।

  • UNSC में भारत की जगह: उन्होंने पुरजोर वकालत की कि भारत जैसे देशों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सीट मिलनी चाहिए।

  • वित्तीय संस्थानों में सुधार: आईएमएफ (IMF), विश्व बैंक (World Bank) और डब्ल्यूटीओ (WTO) जैसे संस्थानों में शक्ति संतुलन को बदलने की सख्त जरूरत है।

  • भारत की सॉफ्ट पावर: भारत के आकार और भूगोल ने इसे एक ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है जहाँ वह अपनी ‘सॉफ्ट, हार्ड और स्मार्ट पावर’ का बेहतरीन इस्तेमाल कर रहा है।

फ़िनलैंड का नाटो परमाणु कार्यक्रम

फिनलैंड द्वारा परमाणु हथियारों से जुड़े कानून में बदलाव के सवाल पर, स्टब ने स्पष्ट किया कि फिनलैंड परमाणु राष्ट्र नहीं बन रहा है। यह कदम केवल 1987 के एक पुराने कानून की विसंगति को दूर करने और नाटो (NATO) के परमाणु कार्यक्रम का सुचारू हिस्सा बनने के लिए उठाया जा रहा है, जो विशुद्ध रूप से उनकी अपनी सुरक्षा के लिए है।

 

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