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तालिबान बंधक विवाद: अमेरिका का खौफनाक एक्शन, अफगानिस्तान को ‘बंधक कूटनीति’ का प्रायोजक घोषित किया

राज्य सचिव मार्को रुबियो सोमवार, 9 मार्च, 2026 को वाशिंगटन में विदेश विभाग में अमेरिकी बंधक और गलत तरीके से हिरासत में लिए गए लोगों के ध्वज फहराने के समारोह के दौरान बोलते हैं। | फोटो साभार: एपी

प्रकाशित – 10 मार्च, 2026 प्रातः 07:48 बजे IST

तालिबान बंधक विवाद ने अब एक बेहद गंभीर और खतरनाक मोड़ ले लिया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार (9 मार्च, 2026) को एक बड़ा कदम उठाते हुए अफगानिस्तान को ‘गलत हिरासत’ (Wrongful Detention) के प्रायोजक के रूप में आधिकारिक तौर पर नामित किया है। यह खौफनाक एक्शन ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत ने भी अफगानिस्तान पर “बंधक कूटनीति” में शामिल होने का गंभीर आरोप लगाया है।

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इस नए पदनाम के साथ, अफगानिस्तान अब ईरान की श्रेणी में आ गया है। अमेरिका का मानना है कि तालिबान अमेरिकी नागरिकों को हिरासत में लेकर नीतिगत रियायतें (Policy Concessions) ऐंठने की कोशिश कर रहा है। गौरतलब है कि 27 फरवरी को ईरान को भी इसी तरह का दर्जा दिया गया था, जिसके ठीक बाद मध्य पूर्व में अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी थी।

तालिबान बंधक विवाद: मार्को रुबियो की सख्त चेतावनी और अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा

तालिबान बंधक विवाद पर बोलते हुए अमेरिकी राज्य सचिव मार्को रुबियो ने एक बेहद सख्त बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तालिबान फिरौती वसूलने और अपनी नीतियां मनवाने के लिए आतंकवादी हथकंडों का इस्तेमाल कर रहा है। रुबियो ने कहा, “इन घृणित रणनीतियों को तत्काल समाप्त करने की आवश्यकता है। वर्तमान स्थिति में अमेरिकियों के लिए अफगानिस्तान की यात्रा करना बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है।”

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रुबियो ने तालिबान से मांग की है कि वह अपनी हिरासत में मौजूद सभी अमेरिकियों को तुरंत रिहा करे। इनमें जनवरी 2025 से देश में बंद अकादमिक शोधकर्ता डेनिस कोयल और 2022 में काबुल से गायब हुए अफगान-अमेरिकी व्यवसायी महमूद हबीबी शामिल हैं।

तालिबान बंधक विवाद: ट्रम्प प्रशासन का स्पष्ट संदेश और लीबसन का नजरिया

तालिबान बंधक विवाद के इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के पूर्व अधिकारी एरिक लीबसन ने भी अहम टिप्पणी की है। लीबसन वर्तमान में ‘ग्लोबल रीच’ नामक गैर-लाभकारी संस्था में मुख्य रणनीति अधिकारी हैं, जो हबीबी जैसे हिरासत में लिए गए अमेरिकियों के मामलों पर काम करती है। उन्होंने अमेरिकी सरकार के इस कदम की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह ट्रम्प प्रशासन की ओर से तालिबान को एक स्पष्ट संदेश है।

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लीबसन के अनुसार, “तालिबान के पास गिरफ्तार किए गए चार अमेरिकियों के मामलों को सुलझाने की कुंजी है। जब तक वे इस दिशा में कदम नहीं उठाते, तब तक अमेरिका-अफगानिस्तान संबंधों में कोई सकारात्मक प्रगति नहीं होगी।”

तालिबान बंधक विवाद: संयुक्त राष्ट्र में माइक वाल्ट्ज का कड़ा प्रहार

तालिबान बंधक विवाद की गूंज संयुक्त राष्ट्र (UN) तक पहुंच गई है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने सुरक्षा परिषद की एक बैठक में तालिबान पर सीधा प्रहार किया। उन्होंने अफगानिस्तान के लिए मांगी जा रही 1 अरब डॉलर की मानवीय सहायता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जो नेतृत्व महिलाओं को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित करता है और निर्दोष अमेरिकियों को बंधक बनाता है, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।

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वाल्ट्ज ने फरवरी 2020 में हस्ताक्षरित ‘दोहा शांति समझौते’ (Doha Agreement) पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “तालिबान की हरकतें उनके बुरे विश्वास को प्रदर्शित करती हैं। हालांकि अमेरिका दोहा प्रक्रिया में भाग लेना जारी रखता है, लेकिन हमें तालिबान के इरादों पर गहरा संदेह है। हम ऐसे समूह पर कतई भरोसा नहीं कर सकते।”

अमेरिका के इस कड़े रुख से स्पष्ट है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है, और तालिबान पर दबाव आने वाले दिनों में और बढ़ने वाला है।

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