धर्म

गणेश विसर्जन 2026: 16 से 25 सितंबर तक महत्वपूर्ण तिथियां और विसर्जन की सही पूजा विधि

इस समय देशभर में गणेशोत्सव की धूम देखने को मिल रही है। लोग अपने घरों में गणपति की स्थापना करते हैं। स्थापना के बाद भक्त अपनी परंपरा और सुविधा के अनुसार डेढ़, तीन, पांच, सात या दस दिन में भगवान गणेश का विसर्जन करते हैं।

साल 2026 में विसर्जन के लिए कई शुभ दिन और समय हैं। अगर आप बप्पा को पूरे विधि-विधान से विदाई देना चाहते हैं तो सही तारीख, शुभ समय और पूजा के नियमों का खास ख्याल रखें।

गणेश विसर्जन 2026: महत्वपूर्ण तिथियां और शुभ समय

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– तीसरा दिन विसर्जन: 16 सितंबर 2026

– पांचवां दिन विसर्जन: 18 सितंबर 2026

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– सातवें दिन विसर्जन: 20 सितंबर 2026

– अनंत चतुर्दशी (दसवां दिन): 25 सितंबर 2026

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तीसरे दिन विसर्जन का शुभ मुहूर्त

-दोपहर का समय: दोपहर 03:20 बजे से शाम 06:25 बजे तक (चर, लाभ)
-शाम का समय: 07:53 बजे से 12:16 बजे तक (17 सितंबर)
-सुबह का समय: 03:11 AM से 04:39 AM तक (17 सितंबर)
-अगली सुबह का समय: 06:06 AM से 09:11 AM तक

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पांचवें दिन विसर्जन का शुभ समय (18 सितंबर 2026)

– प्रातः काल: प्रातः 06:07 बजे से प्रातः 10:43 बजे तक

– दोपहर का समय: दोपहर 12:15 बजे से 01:47 बजे तक और शाम 04:51 बजे से 06:23 बजे तक

– रात्रि समय: रात्रि 09:19 बजे से रात्रि 10:47 बजे तक

– देर रात का समय: रात 12:15 बजे से सुबह 04:40 बजे तक (19 सितंबर)

सातवें दिन विसर्जन का शुभ मुहूर्त

-सुबह का समय: सुबह 07:40 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक
-दोपहर का समय: 01:46 PM से 03:17 PM तक
-शाम का समय: शाम 06:20 बजे से रात 10:46 बजे तक
-देर रात का समय: 01:43 पूर्वाह्न से 03:12 पूर्वाह्न (21 सितंबर)
– भोर का समय: प्रातः 04:40 बजे से प्रातः 06:09 बजे तक (21 सितंबर)

अनंत चतुर्दशी विसर्जन मुहूर्त (25 सितंबर 2026)

यह गणेश उत्सव का मुख्य विसर्जन दिवस माना जाता है। इस दिन चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11:18 बजे शुरू होगी और 25 सितंबर को रात 11:06 बजे समाप्त होगी।

-सुबह का समय: 06:11 AM से 10:42 AM तक
-दोपहर का समय: दोपहर 12:13 बजे से 01:43 बजे तक और शाम 04:44 बजे से 06:14 बजे तक
-रात का समय: रात 09:14 बजे से रात 10:43 बजे तक
-मध्यरात्रि समय: 12:13 AM से 04:42 AM तक (26 सितंबर)

गणपति विसर्जन की सही विधि और नियम

– भगवान गणेश के विसर्जन के दिन मूर्ति को फिर से ताजे फूलों से सुंदर ढंग से सजाएं.

– इसके बाद बप्पा को उनकी पसंदीदा चीजें- दूर्वा, मोदक और लड्डू चढ़ाएं.

– अगरबत्ती जलाएं और पूरे परिवार के साथ महाआरती करें और जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें.

– आरती के बाद प्रतिमा पर चावल और फूल चढ़ाएं और चौकी को थोड़ा हिलाएं, जो उत्सव के अंत का प्रतीक है.

– अब प्रतिमा को आसन सहित सम्मानपूर्वक उठाएं और घर से बाहर ले जाएं.

– “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ विसर्जन स्थल की ओर बढ़ें।

– अब मूर्ति को श्रद्धापूर्वक किसी पवित्र नदी, तालाब या जलाशय में विसर्जित कर दें।

– वहीं, आप इको-फ्रेंडली मूर्ति को घर पर ही पानी से भरे किसी बड़े बर्तन या टब में विसर्जित कर सकते हैं.

– विसर्जन के समय ‘गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठ स्वस्थने परमेश्वर…’ या ‘ओम गणानां त्वा गणपति हवामहे…’ जैसे वैदिक मंत्रों का जाप करें।

विसर्जन के बाद इन बातों का रखें ध्यान

– मूर्ति को पानी में प्रवाहित करने के बाद तुरंत पीछे मुड़कर न देखें।

घर लौटते ही सबसे पहले हाथ-पैर धोकर मुख्य द्वार पर माथा टेकें।

– बप्पा से घर में सुख-समृद्धि बनाए रखने और अगले वर्ष दोबारा दर्शन देने की प्रार्थना करें.

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