राष्ट्रीय

तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा: भगवान के लिए रुकी उड़ानें, जानें इस अद्भुत और ऐतिहासिक परंपरा का रहस्य

तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा (Thiruvananthapuram Airport) आधुनिक तकनीक और सदियों पुरानी आस्था का एक ऐसा अनूठा संगम है, जो दुनिया में शायद ही कहीं और देखने को मिले। जब बात भगवान पद्मनाभस्वामी की हो, तो आधुनिक विमानन के पहिये भी कुछ घंटों के लिए थम जाते हैं। हाल ही में, पवित्र ‘पंगुनी अराट्टू’ (Painkuni Arattu) जुलूस को रास्ता देने के लिए इस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लगभग पांच घंटे के लिए सभी उड़ान सेवाएं पूरी तरह से निलंबित कर दी गईं।

यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि दशकों पुरानी एक ऐसी अद्भुत और ऐतिहासिक परंपरा है, जो आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। आइए इस चौंकाने वाली लेकिन आस्था से भरी परंपरा के बारे में विस्तार से जानते हैं।

यह भी पढ़ें: फारूक अब्दुल्ला निशाने पर, शख्स ने ट्रिगर खींचने की कोशिश की, फिर बाल-बाल बचा

तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा पर क्यों रुकती हैं उड़ानें?

तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा दशकों से साल में दो बार अपने रनवे का परिचालन रोकता आ रहा है। यह सब श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के द्विवार्षिक (साल में दो बार होने वाले) सदियों पुराने औपचारिक जुलूस को सुरक्षित रूप से रनवे पार कराने के लिए किया जाता है। गुरुवार को, यह जुलूस शाम लगभग 5 बजे मंदिर से शुरू हुआ और हवाई अड्डे के टरमैक से होते हुए शंगुमुघम (Shangumugham) समुद्र तट की ओर बढ़ा। इसके कारण शाम 4:45 बजे से रात 9:00 बजे तक उड़ानें पूरी तरह से रोक दी गईं।

यह भी पढ़ें: श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास और इसके वास्तुकला की भव्यता

यह भी पढ़ें: बीजेपी ‘200 आर-पार’बंगाल में, विजय ने तमिलनाडु में ब्लॉकबस्टर दी

त्रावणकोर शाही परिवार का शाही नेतृत्व

इस भव्य जुलूस में केवल आम भक्त ही नहीं, बल्कि पुलिस का दस्ता, पारंपरिक पुलिस बैंड और विशालकाय सजे-धजे हाथी भी शामिल होते हैं। पूर्ववर्ती त्रावणकोर शाही परिवार के वर्तमान मुखिया, श्री मूलम थिरुनल राम वर्मा ने इस धार्मिक जुलूस का नेतृत्व किया। वह पारंपरिक हरे रेशम की टोपी, पन्ना का हार पहने हुए और हाथ में एक औपचारिक तलवार लिए हुए हवाई अड्डे के टरमैक को पार करते हुए नजर आए। जुलूस तुरही और ढोल की गूंज के साथ पूरे उत्साह से आगे बढ़ा।

1932 से चली आ रही है तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा की यह ऐतिहासिक परंपरा

इतिहासकारों के अनुसार, इस अनूठी परंपरा की शुरुआत तब हुई जब 1932 में यह हवाई अड्डा स्थापित किया गया था। त्रावणकोर के तत्कालीन राजा श्री चिथिरा थिरुनल ने इसके निर्माण के समय ही यह स्पष्ट कर दिया था कि यह जगह साल के 363 दिन आम जनता के लिए और 2 दिन शाही परिवार के प्रमुख देवता, भगवान पद्मनाभ के लिए खुली रहेगी।

यह भी पढ़ें: आईआईएससी बैंगलोर 3 भविष्य के लिए तैयार बीटेक कार्यक्रम प्रदान करता है, विवरण देखें

यह भी पढ़ें: केरल के प्रमुख धार्मिक स्थल और उनके अनसुलझे रहस्य

आज, जब इस हवाई अड्डे का प्रबंधन अडाणी ग्रुप (Adani Group) के हाथों में है, तब भी यह शाही परंपरा और समझौता बिना किसी रुकावट के जारी है। तिरुवनंतपुरम हवाई अड्डा प्रशासन अक्टूबर-नवंबर में ‘अल्पासी उत्सव’ और मार्च-अप्रैल में ‘पंगुनी उत्सव’ के दौरान रनवे बंद करने से पहले विधिवत NOTAM (वायुसैनिकों को नोटिस) जारी करता है ताकि विमानन कंपनियों को पहले से ही पुनर्निर्धारण का समय मिल सके।

यह भी पढ़ें: राय | महा कुंभ भगदड़: अधिक सावधानी, देखभाल और संयम की आवश्यकता है

समुद्र तट पर पवित्र स्नान और वापसी की भव्यता

हवाई अड्डे के परिसर में प्रवेश करने के बाद, भगवान पद्मनाभ स्वामी, नरसिम्हा मूर्ति और कृष्ण स्वामी की “उत्सव विग्रह” (मूर्तियों) को कुछ देर के लिए रनवे के पास बने “अराट्टू मंडपम” में पूरे सम्मान के साथ रखा जाता है। इसके बाद, मूर्तियों को शंगुमुघम समुद्र तट पर ले जाकर समुद्र में पवित्र स्नान (डुबकी) कराया जाता है, जो उत्सव के समापन का प्रतीक है।

स्नान के बाद, पारंपरिक मशालों की रोशनी के बीच जुलूस उसी रास्ते से वापस मंदिर लौटता है। रात करीब 9 बजे जुलूस के वापस लौटने और हवाई अड्डे के कर्मचारियों द्वारा सड़क/रनवे को साफ कर उड़ान के लिए सुरक्षित घोषित करने के बाद ही हवाई अड्डे का परिचालन दोबारा शुरू किया जाता है।

तिरुवनंतपुरम इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (TIAL) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर इस घटना की मनमोहक तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, “जैसा कि श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का अराट्टू जुलूस हमारे रनवे पर अपनी पवित्र यात्रा करता है, यह केरल की विरासत और भक्ति से गहराई से जुड़ा हुआ है। हम इस श्रद्धेय परंपरा को देखकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं, जो इस बात की एक सुंदर याद दिलाती है कि कैसे आस्था समय और स्थान से परे है।”

About ni 24 live

Writer and contributor.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Link Copied!