धर्म

कंस वध 2025: कंस वध का महापर्व, जानें अत्याचार पर धर्म की जीत की पूरी कहानी

द्वापर युग में हुआ कंस वध कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि यह धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष का प्रतीक थी। जब भगवान श्री हरि विष्णु ने इस युग में श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया। अतः उनका मुख्य उद्देश्य पृथ्वी को अत्याचारों से मुक्त कर धर्म की स्थापना करना था। मथुरा का अत्याचारी राजा कंस अपने ही पिता उग्रसेन को बंदी बनाकर राज्य चला रहा था। कंस ने देवताओं को भी भयभीत कर दिया था, जिससे लोग भयभीत हो गये थे।

कंस वध महोत्सव

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, कंस वध उत्सव कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन दिवाली के करीब 10 दिन बाद आता है. इसलिए, कई स्थानों पर दिवाली से जुड़े अनुष्ठान दशमी तिथि तक जारी रहते हैं। जबकि कंस ने वध के पवित्र क्रम के साथ इस उत्सव का समापन किया। द्रिक पंचांग के अनुसार इस बार कंस वध का पर्व 01 नवंबर 2025 को मनाया जा रहा है.

पौराणिक कथा

जब मथुरा के राजा कंस की बहन देवकी का विवाह वासुदेव से हुआ, उसी समय आकाशवाणी हुई, ‘हे कंस, तेरी बहन देवकी की आठवीं संतान तेरी मृत्यु का कारण बनेगी।’ यह आकाशवाणी सुनकर कंस ने देवकी और वासुदेव को कारागार में डाल दिया और देवकी की सभी संतानों को जन्म लेते ही एक-एक करके मार डाला। लेकिन आठवीं संतान श्री कृष्ण देव को योग से बचा लिया गया और वासुदेव उन्हें गोकुल ले गये। जहां श्रीकृष्ण की देखभाल नंदबाबा और मां यशोदा ने की थी। बचपन में श्री कृष्ण ने पूतना का वध, कालिया का दमन जैसे कई पराक्रम किये।

मथुरा आगमन

इस प्रकार श्रीकृष्ण की वीरता का समाचार सर्वत्र फैल गया। अंततः कंस ने श्रीकृष्ण को मथुरा भेजने का षड़यंत्र रचा। ताकि कुश्ती के बहाने श्रीकृष्ण की हत्या की जा सके। लेकिन श्री कृष्ण स्वयं भगवान विष्णु के अवतार थे, इसलिए उन्हें कौन मार सकता था? ऐसे में बुलावा मिलते ही श्रीकृष्ण और बलराम मथुरा पहुंचे और उन्होंने अपने पराक्रम से कंस के हाथी कुवलयापीड़ को मार डाला। तब श्रीकृष्ण ने चाणूर और मुष्टिक जैसे पहलवानों का वध किया।

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कंस का वध

अपने बड़े-बड़े योद्धाओं को हारता देख कंस स्वयं मैदान में उतर आया। इस पर श्रीकृष्ण ने बिना देर किये कंस का भी वध कर दिया। इसके बाद श्रीकृष्ण ने अपने नाना उग्रसेन को पुनः राजगद्दी पर बैठाया और अपनी प्रजा को भयमुक्त जीवन जीने का वचन दिया।

कंस वध का महत्त्व |

आपको बता दें कि कंस का वध सिर्फ एक युद्ध नहीं बल्कि अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक है। कंस वध की कथा हमें यह शिक्षा देती है कि जब-जब धर्म डगमगाने लगता है, तब-तब हमारे भीतर स्वयं श्री कृष्ण जन्म लेते हैं। कंस वध के अगले दिन देव उत्थान एकादशी का पर्व मनाया जाता है।

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