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एशियाई शेयर बाजार 9 मार्च 2026: अमेरिका-ईरान युद्ध से भयंकर तबाही, कच्चा तेल 30% उछला

एशियाई शेयर बाजार 9 मार्च 2026: अमेरिका-ईरान युद्ध से भयंकर तबाही, कच्चा तेल 30% उछला

 

प्रकाशित – 09 मार्च, 2026 प्रातः 08:51 बजे IST

एशियाई शेयर बाजार 9 मार्च 2026 को एक भयंकर मंदी की चपेट में आ गए। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान युद्ध के दूसरे सप्ताह में प्रवेश करने के साथ ही वैश्विक बाजारों में हाहाकार मच गया है। आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में 30% का खौफनाक उछाल दर्ज किया गया है।

निवेशक पहले से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर भारी भरकम खर्च और तकनीकी शेयरों के ओवरवैल्यूएशन को लेकर चिंतित थे। लेकिन अब, 2022 में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद पहली बार कच्चे तेल के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचने से निवेशकों ने सुरक्षित निवेश (Safe-haven assets) की ओर भागना शुरू कर दिया है।

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एशियाई शेयर बाजार 9 मार्च 2026: कच्चे तेल की कीमतों में भयंकर आग

पिछले सप्ताह से जारी युद्ध के कारण प्रमुख तेल अनुबंधों में एक चौथाई से अधिक की वृद्धि हुई है। ईरान द्वारा खाड़ी देशों के तेल उत्पादक क्षेत्रों पर जवाबी कार्रवाई के बाद स्थिति और बिगड़ गई है।

  • वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI): अमेरिकी तेल बेंचमार्क 30% उछलकर 118.88 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया।
  • ब्रेंट क्रूड: 28% की वृद्धि के साथ 118.73 डॉलर प्रति बैरल हो गया।
  • कुल वृद्धि: 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से WTI में 75% और ब्रेंट में 60% से अधिक का उछाल आया है।

दक्षिणी इराक और उत्तरी कुर्दिस्तान में तेल क्षेत्रों पर हमले की सूचना है, जिससे अमेरिकी संचालित तेल क्षेत्रों का उत्पादन रुक गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य—जहां से वैश्विक कच्चे तेल का 20% हिस्सा गुजरता है—के अवरुद्ध होने से संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत को भी उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है।

डोनाल्ड ट्रंप का बयान और भू-राजनीतिक खौफ

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में संघर्ष अभी लंबा खिंच सकता है। उनके अनुसार, यह युद्ध केवल ईरान के “बिना शर्त आत्मसमर्पण” के बाद ही रुकेगा।

“अल्पावधि में, तेल की कीमतें, जो ईरान का परमाणु खतरा समाप्त होने पर तेजी से गिरेंगी, अमेरिका और विश्व की सुरक्षा व शांति के लिए चुकाई जाने वाली एक बहुत छोटी सी कीमत है। केवल एक मूर्ख ही अन्यथा सोचेगा!”
– डोनाल्ड ट्रंप (वाशिंगटन टाइम्स / सोशल मीडिया)

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर तबाही का खतरा

लगातार महंगी होती ऊर्जा कीमतों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति (Inflation) की एक नई लहर का डर पैदा कर दिया है। इसके चलते केंद्रीय बैंक विकास को समर्थन देने के लिए ब्याज दरों में कटौती करने से पीछे हट सकते हैं। एसपीआई एसेट मैनेजमेंट के स्टीफन इन्स ने इस स्थिति को गंभीर बताया है:

“100 डॉलर से ऊपर का तेल सिर्फ एक कमोडिटी रैली नहीं है, यह पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर एक कर (Tax) बन जाता है। बाजार सिर्फ झटके से नहीं, बल्कि तेल की भौतिक अनुपलब्धता से जूझ रहा है।”

अमेरिका में फरवरी के महीने में अप्रत्याशित रूप से नौकरियां घटने और खुदरा बिक्री में गिरावट की खबरों ने इस निराशावादी माहौल को और गहरा कर दिया है। जॉनस्ट्रेडिंग के माइकल ओ’रूर्के ने चेतावनी दी है कि शेयर बाजार में अभी सबसे बुरा दौर आना बाकी है।

एशियाई शेयर बाजार 9 मार्च 2026: प्रमुख सूचकांकों के खौफनाक आंकड़े (0230 GMT)

  • सियोल (कोस्पी): 7.9% नीचे 5,141.76 पर (तकनीकी रैली के कारण इस साल का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनकर्ता धड़ाम)
  • टोक्यो (निक्केई 225): 7.0% नीचे 51,740.46 पर
  • हांगकांग (हैंग सेंग): 3.2% नीचे 24,926.62 पर
  • शंघाई कंपोजिट: 1.3% नीचे 4,070.90 पर
  • न्यूयॉर्क (डॉव जोंस): 1.3% नीचे 47,501.55 पर
  • मुद्रा बाज़ार: डॉलर इंडेक्स में जबरदस्त उछाल। EUR/USD गिरकर $1.1520 पर और डॉलर/येन 158.70 येन पर पहुंचा।

तबाही के इस मंजर के बीच, निवेशकों के लिए पूंजी बचाना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। जब तक भू-राजनीतिक मोर्चे से कोई सकारात्मक खबर नहीं आती, तब तक बाज़ारों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की पूरी आशंका है।

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